Yuva India: अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के क्रीमीलेयर नियमों को लेकर कानूनी असमंजस के कारण संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा 2025 में चयनित 958 उम्मीदवारों की सेवा आवंटन और ट्रेनिंग प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से 11 मार्च 2026 के फैसले के क्रियान्वयन को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। सरकार चाहती है कि यह स्पष्ट हो कि फैसला पुरानी भर्तियों पर भी लागू होगा या इसे केवल भविष्य की चयन प्रक्रियाओं तक सीमित रखा जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने 24 सितंबर 2026 को केंद्र की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। फिलहाल इस मामले में अंतिम निर्णय का इंतजार है। इस अनिश्चितता का असर सिविल सेवा के नए चयनित उम्मीदवारों की ट्रेनिंग और सेवा आवंटन पर पड़ रहा है।
11 मार्च के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ?
सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को Union of India बनाम Rohith Nathan मामले में OBC क्रीमीलेयर निर्धारण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर फैसला सुनाया था। अदालत ने कहा कि PSU और निजी क्षेत्र में कार्यरत माता-पिता की केवल वेतन आय के आधार पर उनके बच्चों को OBC नॉन-क्रीमीलेयर आरक्षण से बाहर करना उचित नहीं है। माता-पिता के पद, उनकी सामाजिक स्थिति और सरकारी सेवाओं में समकक्ष पदों से तुलना जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखना होगा।
यह विवाद केंद्र सरकार के 1993 के कार्यालय ज्ञापन और 2004 में जारी स्पष्टीकरण से जुड़ा था। 2004 के स्पष्टीकरण के तहत, जिन PSU या अन्य संस्थानों के पदों की सरकारी पदों से समकक्षता तय नहीं हुई थी, उनके कर्मचारियों की वेतन आय को क्रीमीलेयर निर्धारण में शामिल किया जा रहा था। अदालत ने माना कि केवल वेतन के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों में समान स्थिति वाले कर्मचारियों के बच्चों के साथ अलग व्यवहार भेदभावपूर्ण हो सकता है।
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की ?
केंद्र सरकार ने अदालत से अनुरोध किया है कि फैसले को पिछली तारीख से लागू करने के बजाय भविष्य में लागू करने की अनुमति दी जाए। सरकार का तर्क है कि यदि पुराने चयन, नियुक्तियों, सेवा आवंटन और प्रवेश प्रक्रियाओं को दोबारा खोला गया, तो प्रशासनिक स्तर पर गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
केंद्र ने इस फैसले को लागू करने के लिए दो साल का समय भी मांगा है। इस अवधि में विभिन्न सरकारी विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और निजी संस्थानों में पदों की समकक्षता तय करने तथा क्रीमीलेयर निर्धारण के लिए एक समान व्यवस्था तैयार करने की बात कही गई है।
सरकार ने यह भी कहा है कि पुराने मामलों में बदलाव से अधिकारियों की वरिष्ठता, कैडर आवंटन, सेवा शर्तों और करियर की प्रगति पर असर पड़ सकता है। हालांकि, ये केंद्र सरकार की ओर से रखी गई दलीलें हैं; इन पर अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट को करना है।
958 चयनित उम्मीदवारों की ट्रेनिंग क्यों अटकी ?
UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 के परिणाम में 958 उम्मीदवारों की सिफारिश की गई थी। इनमें IAS, IPS, IRS और अन्य केंद्रीय सेवाओं के लिए चयनित उम्मीदवार शामिल हैं। सामान्य प्रक्रिया के तहत चयन के बाद उम्मीदवारों को सेवा और कैडर आवंटित किए जाते हैं। इसके बाद मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) सहित संबंधित संस्थानों में प्रशिक्षण शुरू होता है।
लेकिन OBC क्रीमीलेयर के नियमों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण सेवा आवंटन और फाउंडेशन कोर्स की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत भी मांगी है, ताकि मामले के अंतिम निपटारे तक चयनित उम्मीदवारों की सेवा आवंटन प्रक्रिया पहले से लागू नियमों के अनुसार आगे बढ़ाई जा सके।
SSC, रेलवे और बैंक भर्ती पर भी पड़ सकता है असर
इस मामले का महत्व केवल UPSC तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, फैसले की व्याख्या और उसके लागू होने के तरीके का असर कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB), बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (IBPS) और अन्य भर्ती एजेंसियों की प्रक्रियाओं पर भी पड़ सकता है।
यदि पुराने मामलों की समीक्षा की अनुमति मिलती है, तो उन उम्मीदवारों के OBC नॉन-क्रीमीलेयर दर्जे पर दोबारा विचार करने की मांग उठ सकती है, जिन्हें पहले माता-पिता की वेतन आय के आधार पर क्रीमीलेयर श्रेणी में रखा गया था। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी पुराने चयन स्वतः बदल जाएंगे। वास्तविक असर सुप्रीम कोर्ट के अंतिम आदेश और सरकार की ओर से बनाए जाने वाले नियमों पर निर्भर करेगा।
अब आगे क्या होगा ?
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षित रखे गए फैसले का इंतजार है। अदालत यह स्पष्ट कर सकती है कि 11 मार्च के फैसले को पुरानी और जारी भर्ती प्रक्रियाओं पर किस सीमा तक लागू किया जाए और सरकार को नई व्यवस्था तैयार करने के लिए कितना समय मिले।
इस फैसले से OBC आरक्षण के तहत क्रीमीलेयर निर्धारण की प्रक्रिया, सरकारी नौकरियों में पात्रता और पुराने चयन मामलों की समीक्षा की दिशा तय हो सकती है। उम्मीदवारों के लिए जरूरी है कि वे आधिकारिक आदेशों और संबंधित भर्ती एजेंसियों की सूचनाओं पर नजर रखें। जब तक स्पष्ट निर्देश जारी नहीं होते, तब तक किसी भी भर्ती में नियम बदलने या पुराने चयन स्वतः संशोधित होने का दावा करना जल्दबाजी होगी।
