पंजाब में चुनाव से पहले 140 से ज्यादा अधिकारियों के तबादलों की तैयारी, 12 श्रेणियों की पोस्टिंग की समीक्षा
Yuva India: पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों की तैनाती की समीक्षा शुरू हो गई है। चुनाव आयोग के निर्देशों के बाद राज्य में 140 से अधिक अधिकारियों के तबादले संभावित हैं। इनमें उन अधिकारियों पर खास ध्यान दिया जा रहा है, जो अपने गृह जिले में तैनात हैं या एक ही जिले में तीन साल से अधिक समय से काम कर रहे हैं। इस प्रक्रिया का उद्देश्य चुनाव के दौरान प्रशासनिक निष्पक्षता बनाए रखना और चुनाव संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।
चुनाव आयोग के निर्देशों के बाद शुरू हुई समीक्षा
चुनाव आयोग ने 27 अक्टूबर 2026 को पंजाब समेत पांच राज्यों—गोवा, मणिपुर, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड—को चुनाव से जुड़े अधिकारियों की तैनाती के संबंध में निर्देश दिए। आयोग के मुताबिक, जिन अधिकारियों की पोस्टिंग उनके गृह जिले में है या जिन्होंने पिछले चार वर्षों में किसी जिले में तीन साल पूरे कर लिए हैं अथवा तय तारीख तक पूरे कर लेंगे, उन्हें निर्धारित नियमों के अनुसार स्थानांतरित किया जाना चाहिए।
पंजाब, गोवा, मणिपुर और उत्तराखंड के लिए तीन साल की तैनाती की गणना की कटऑफ तारीख 31 मार्च 2027 रखी गई है। उत्तर प्रदेश के लिए यह तारीख 31 मई 2027 है।
12 श्रेणियों के अधिकारियों की पोस्टिंग पर नजर
पंजाब में शुरुआती समीक्षा के तहत सिविल और पुलिस प्रशासन की करीब 12 श्रेणियों के अधिकारियों की पोस्टिंग जांची जा रही है। इनमें डिप्टी कमिश्नर (डीसी), अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (एडीसी), एसडीएम, जिला राजस्व अधिकारी, एसएसपी, एसपी, डीएसपी, एडीसी और एसडीएम सहित अन्य संबंधित पदों पर तैनात अधिकारियों की सूची तैयार की जा रही है।
इसके अलावा जिला चुनाव अधिकारी (DEO), रिटर्निंग अधिकारी (RO) और सहायक रिटर्निंग अधिकारी (ARO) जैसे चुनावी जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों की तैनाती भी नियमों के अनुसार देखी जाएगी। पुलिस विभाग में सब-इंस्पेक्टर से लेकर वरिष्ठ रैंक के अधिकारियों तक पर निर्देश लागू हो सकते हैं, यदि वे चुनाव संबंधी कार्य से जुड़े हैं।
पिछले चुनाव में तैनाती वाले क्षेत्र में दोबारा पोस्टिंग नहीं
आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिला चुनाव अधिकारी, रिटर्निंग अधिकारी, सहायक रिटर्निंग अधिकारी और संबंधित पुलिस अधिकारियों को पिछले विधानसभा चुनाव या उसके बाद हुए उपचुनाव के दौरान जिस जिले अथवा विधानसभा क्षेत्र में तैनात किया गया था, वहां दोबारा तैनात नहीं किया जाना चाहिए।
एक ही जिले में पदोन्नति के बाद भी काम करने की अवधि की गणना में शामिल किया जाएगा। हालांकि, राज्य मुख्यालय में की गई सेवा को निर्धारित शर्तों के तहत तीन साल की अवधि की गणना से अलग रखा जा सकता है। कुछ अधिकारियों को नियमों के अनुसार छूट भी मिल सकती है, लेकिन चुनाव संबंधी जिम्मेदारी से जुड़े मामलों में आयोग के निर्देश लागू रहेंगे।
मुख्य सचिव कार्यालय से आगे की कार्रवाई
अधिकारियों की मौजूदा पोस्टिंग, गृह जिले और कार्यकाल के आधार पर सूची तैयार की जा रही है। समीक्षा पूरी होने के बाद मुख्य सचिव कार्यालय के स्तर पर आगे की कार्रवाई हो सकती है। इसके तहत जरूरत के अनुसार तबादलों और नई पोस्टिंग के आदेश जारी किए जाएंगे।
चुनाव आयोग ने पांचों राज्यों से 30 नवंबर 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट देने को कहा है। मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण में लगे अधिकारियों के तबादले संबंधित प्रक्रिया की अंतिम सूची प्रकाशित होने के बाद, मुख्य निर्वाचन अधिकारी से परामर्श करके किए जाएंगे।
मार्च 2027 में खत्म होगा पंजाब विधानसभा का कार्यकाल
पंजाब विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 16 मार्च 2027 तक है। इसी तरह गोवा विधानसभा का कार्यकाल 14 मार्च, मणिपुर का 13 मार्च और उत्तराखंड का 28 मार्च 2027 तक है। उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 तक है। इन राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं।
चुनाव से पहले अधिकारियों की तैनाती की समीक्षा को निष्पक्ष चुनाव की तैयारी का अहम हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, 140 से अधिक अधिकारियों के संभावित तबादलों की अंतिम संख्या और किन अधिकारियों को किन पदों पर भेजा जाएगा, यह आधिकारिक आदेश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
