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भारतविज्ञान-टेक्नॉलॉजी

22 साल बाद धरती पर लौटेगा NASA का Swift टेलीस्कोप

Bhawana Vats
Last updated: November 1, 2026 3:25 pm
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NASA का Swift टेलीस्कोप
NASA का Swift टेलीस्कोप
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NASA का Swift टेलीस्कोप धरती की ओर बढ़ा, रेस्क्यू मिशन फेल; 6 नवंबर को गिरने की आशंका

Yuva India: अंतरिक्ष में 22 साल से ज्यादा समय तक ब्रह्मांड के रहस्यों का पता लगाने वाला NASA का Neil Gehrels Swift Observatory अब अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है। इसे अंतरिक्ष में बचाने के लिए चलाया गया रेस्क्यू मिशन सफल नहीं हो सका। अब यह टेलीस्कोप पृथ्वी की ओर गिर रहा है और अमेरिकी अंतरिक्ष बल के अनुमान के मुताबिक इसके 6 नवंबर 2026 के आसपास पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करने की आशंका है।

करीब डेढ़ टन वजनी इस अंतरिक्ष वेधशाला का अधिकांश हिस्सा वायुमंडल में प्रवेश करते समय जलकर नष्ट हो सकता है। हालांकि, इसके कुछ भारी और मजबूत हिस्से धरती तक पहुंच सकते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक मलबे के समुद्र में गिरने की संभावना अधिक है, लेकिन अभी यह निश्चित नहीं है कि इसका कोई हिस्सा किस स्थान पर गिरेगा।

22 साल तक अंतरिक्ष में किया काम

NASA ने Swift Observatory को 20 नवंबर 2004 को लॉन्च किया था। इसे शुरुआत में केवल दो साल के मुख्य मिशन के लिए तैयार किया गया था, लेकिन इसने अपनी निर्धारित अवधि से 10 गुना ज्यादा समय तक काम किया। वर्ष 2018 में इसका नाम बदलकर Neil Gehrels Swift Observatory रखा गया था।

इस टेलीस्कोप का मुख्य उद्देश्य गामा-रे बर्स्ट का पता लगाना और उनकी स्थिति की जानकारी दूसरे अंतरिक्ष टेलीस्कोप तक पहुंचाना था। गामा-रे बर्स्ट ब्रह्मांड में होने वाले बेहद शक्तिशाली ऊर्जा विस्फोट होते हैं। ये कुछ सेकंड में इतनी अधिक ऊर्जा छोड़ सकते हैं कि वैज्ञानिकों के लिए इनका अध्ययन बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

NASA के मुताबिक, Swift ने अपने मिशन के दौरान 2,000 से अधिक गामा-रे बर्स्ट और करीब 1,400 सुपरनोवा का अध्ययन किया। इसके अलावा इसने ब्लैक होल, सक्रिय आकाशगंगाओं, धूमकेतुओं और क्षुद्रग्रहों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी जुटाईं। इसके वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर करीब 7,000 शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं।

सूरज की गतिविधियों से घटने लगी कक्षा

पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में मौजूद उपग्रहों पर वायुमंडल के बेहद हल्के घर्षण का असर पड़ता है। समय के साथ यह घर्षण उनकी ऊंचाई कम करता रहता है। हाल के वर्षों में सूर्य की बढ़ी हुई गतिविधियों के कारण पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल का विस्तार हुआ, जिससे Swift पर वायुमंडलीय खिंचाव बढ़ गया और इसकी कक्षा तेजी से नीचे आने लगी।

NASA ने इस स्थिति से निपटने के लिए सितंबर 2025 में एरिजोना की कंपनी Katalyst Space Technologies को करीब 3 करोड़ डॉलर का अनुबंध दिया था। योजना के तहत कंपनी को LINK नाम का रोबोटिक अंतरिक्ष यान तैयार करना था, जो Swift के पास पहुंचकर उसे पकड़ता और उसकी कक्षा को ऊंचा कर देता।

क्यों फेल हुआ रेस्क्यू मिशन?

LINK अंतरिक्ष यान को 3 जुलाई 2026 को लॉन्च किया गया था। यह मिशन अपनी तरह का एक अनोखा प्रयास था, क्योंकि इसके जरिए एक निजी कंपनी को रोबोटिक तकनीक से पहले से अंतरिक्ष में मौजूद वैज्ञानिक उपग्रह की कक्षा बदलनी थी।

हालांकि, लॉन्च के बाद LINK में दिशा और स्थिति नियंत्रण (Attitude Control) से जुड़ी तकनीकी समस्याएं आ गईं। अंतरिक्ष यान का घूमना नियंत्रित करना मुश्किल हो गया और वह Swift के करीब पहुंचकर उसे पकड़ने की स्थिति में नहीं आ सका। NASA और Katalyst ने अगस्त में इसे बचाने की योजना छोड़ दी। LINK भी बाद में सितंबर में पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश कर गया।

NASA ने इस असफल प्रयास के बावजूद इसे भविष्य की अंतरिक्ष सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण अनुभव बताया है। इस मिशन से अंतरिक्ष में रोबोटिक मरम्मत और उपग्रहों की कक्षा बदलने की तकनीक को लेकर कई जानकारियां मिली हैं।

क्या धरती पर गिरने से होगा नुकसान ?

अमेरिकी स्पेस फोर्स Swift की कक्षा और उसकी वापसी पर नजर रख रही है। अनुमान है कि टेलीस्कोप का अधिकांश हिस्सा पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते समय तेज गर्मी और घर्षण के कारण जल जाएगा। इसके कुछ घने और मजबूत हिस्से बच सकते हैं, लेकिन उनके समुद्र में गिरने की संभावना अधिक बताई गई है।

फिलहाल इसके गिरने का सटीक समय और स्थान निश्चित नहीं है। 6 नवंबर की तारीख एक अनुमान है, जिसे अंतरिक्ष एजेंसियां लगातार अपडेट कर सकती हैं। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि इसका मलबा किसी खास देश या क्षेत्र में ही गिरेगा।

मिशन खत्म, लेकिन वैज्ञानिक योगदान जारी रहेगा

Swift का अंतरिक्ष में सफर भले ही समाप्त होने वाला है, लेकिन इसका वैज्ञानिक महत्व आने वाले कई वर्षों तक बना रहेगा। इसके द्वारा जुटाए गए आंकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं और दुनिया भर के वैज्ञानिक इनका इस्तेमाल ब्रह्मांड की घटनाओं को समझने के लिए कर सकेंगे।

NASA अब अन्य अंतरिक्ष टेलीस्कोप और भविष्य के मिशनों की मदद से उन खगोलीय घटनाओं का अध्ययन जारी रखने की योजना बना रहा है, जिन पर Swift ने लंबे समय तक काम किया। इस तरह Swift की विदाई अंतरिक्ष विज्ञान के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत जरूर है, लेकिन इससे मिली जानकारी भविष्य की खोजों में मदद करती रहेगी।

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