शरीर का बढ़ा हुआ वजन हाई ब्लड प्रेशर, टाइप-2 डायबिटीज और हृदय रोग जैसी कई बीमारियों के जोखिम से जुड़ा माना जाता है। यही वजह है कि वजन नियंत्रित रखने की सलाह बार-बार दी जाती है। खासकर पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी मेटाबॉलिक हेल्थ पर असर डाल सकती है।
लेकिन क्या सिर्फ दुबला या सामान्य वजन होना अच्छी सेहत की गारंटी है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसा जरूरी नहीं है। कई लोगों का वजन सामान्य सीमा में रहता है, फिर भी उनका ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ा हुआ हो सकता है।
इसलिए सिर्फ वजन या शरीर की बनावट देखकर अपनी सेहत का अंदाजा लगाना सही नहीं है।
सामान्य वजन में भी हो सकता है डायबिटीज का खतरा
टाइप-2 डायबिटीज का खतरा मोटापे के साथ बढ़ सकता है, लेकिन यह इसका अकेला कारण नहीं है। उम्र, पारिवारिक इतिहास, शारीरिक गतिविधि की कमी और खानपान जैसी कई चीजें भी जोखिम को प्रभावित करती हैं।
कुछ लोगों का कुल वजन सामान्य होता है, लेकिन पेट के आसपास चर्बी अधिक जमा होती है। ऐसी स्थिति में इंसुलिन रेजिस्टेंस और बढ़े हुए ब्लड शुगर का खतरा हो सकता है।
अगर सामान्य वजन के बावजूद बार-बार प्यास लगना, ज्यादा पेशाब आना, लगातार थकान या धुंधला दिखाई देना जैसे लक्षण महसूस हों तो डॉक्टर की सलाह पर ब्लड शुगर की जांच कराना बेहतर है।
हाई ब्लड प्रेशर भी वजन देखकर नहीं आता
हाई ब्लड प्रेशर को अक्सर ‘साइलेंट’ समस्या कहा जाता है, क्योंकि शुरुआती चरण में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं दे सकते।
सामान्य वजन वाले लोगों में भी हाई बीपी हो सकता है। ज्यादा नमक वाला भोजन, तनाव, कम शारीरिक गतिविधि, धूम्रपान और पारिवारिक इतिहास जैसे कारक इसका जोखिम बढ़ा सकते हैं।
इसलिए समय-समय पर ब्लड प्रेशर जांचना जरूरी है, खासकर अगर परिवार में हाई बीपी या हृदय रोग का इतिहास रहा हो।
कोलेस्ट्रॉल भी हो सकता है ज्यादा
दुबले-पतले व्यक्ति में भी खराब कोलेस्ट्रॉल यानी LDL और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बढ़ा हुआ हो सकता है।
इसके पीछे जेनेटिक कारण, खानपान, धूम्रपान, शराब का अधिक सेवन और शारीरिक निष्क्रियता जैसी वजहें हो सकती हैं।
ऐसे में केवल शरीर का आकार देखकर यह मान लेना ठीक नहीं कि कोलेस्ट्रॉल सामान्य ही होगा।
दिल की बीमारी का जोखिम भी बना रहता है
हृदय रोग का खतरा सिर्फ मोटापे पर निर्भर नहीं करता। हाई बीपी, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, खराब नींद और परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यानी वजन सामान्य होने के बावजूद अगर ये जोखिम मौजूद हैं, तो हृदय संबंधी समस्याओं की आशंका बनी रह सकती है।
सिर्फ वजन नहीं, इन चीजों पर भी रखें नजर
अच्छी सेहत का आकलन केवल वजन या BMI से नहीं किया जाना चाहिए। ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल, कमर का घेरा, शारीरिक गतिविधि और पारिवारिक स्वास्थ्य इतिहास भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और समय-समय पर हेल्थ चेकअप कई क्रॉनिक बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।
नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। किसी भी लक्षण या स्वास्थ्य संबंधी चिंता की स्थिति में डॉक्टर से सलाह लें।

