उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। भाजपा जहां लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष भी अपने समीकरण मजबूत करने में जुटा है। इसी कड़ी में बात बहराइच जिले की मटेरा विधानसभा सीट की, जहां पिछले तीन चुनावों में समाजवादी पार्टी का दबदबा देखने को मिला है।
मटेरा सीट की खास बात यह है कि यहां पहले यासर शाह ने लगातार दो चुनाव जीते और 2022 में उनकी पत्नी मारिया शाह ने जीत दर्ज कर परिवार की पकड़ बरकरार रखी।
मटेरा विधानसभा सीट कब बनी?
बहराइच जिले में कुल सात विधानसभा सीटें हैं—बलहा, नानपारा, मटेरा, महसी, बहराइच, पयागपुर और कैसरगंज।
मटेरा विधानसभा सीट वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी। यहां पहली बार 2012 में विधानसभा चुनाव हुआ। इस चुनाव में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार यासर शाह ने जीत दर्ज की और मटेरा के पहले विधायक बने।
2012 में यासर शाह ने जीता पहला चुनाव
मटेरा सीट पर हुए पहले विधानसभा चुनाव में मुकाबला काफी करीबी रहा था।
समाजवादी पार्टी के यासर शाह को 41,944 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार अली अकबर ने 39,143 वोट हासिल किए। यासर शाह ने यह चुनाव 2,801 वोटों के अंतर से जीता।
भाजपा के पदम सेन चौधरी 29,137 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
इस जीत के साथ ही मटेरा की नई विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी ने अपना खाता खोल दिया।
कौन हैं यासर शाह?
यासर शाह का परिवार बहराइच की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहा है। उनके पिता डॉ. वकार अहमद शाह समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहे और बहराइच विधानसभा सीट से लगातार पांच बार विधायक चुने गए।
वकार अहमद शाह 1993 से 2012 के बीच बहराइच सीट पर मजबूत राजनीतिक पकड़ बनाए रहे। वह मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव की सरकारों में मंत्री भी रहे।
2012 का चुनाव इस परिवार के लिए खास रहा। वकार अहमद शाह बहराइच सीट से पांचवीं बार जीते, जबकि उनके बेटे यासर शाह ने पड़ोसी मटेरा सीट से पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया।
2017 में भी यासर शाह ने बचाई सीट
2017 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा की बड़ी लहर देखने को मिली, लेकिन मटेरा में समाजवादी पार्टी अपनी सीट बचाने में सफल रही।
यासर शाह ने भाजपा उम्मीदवार अरुण वीर सिंह को 1,595 वोटों से हराया।
यासर शाह को 79,188 वोट मिले, जबकि अरुण वीर सिंह के खाते में 77,593 वोट आए। बसपा उम्मीदवार सुल्तान अहमद खान 33,482 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
यह मुकाबला बेहद करीबी रहा, लेकिन यासर शाह लगातार दूसरी बार विधानसभा पहुंचने में सफल रहे।
बहराइच सीट पर टूटा परिवार का लंबा सिलसिला
2017 में एक तरफ यासर शाह मटेरा सीट बचाने में सफल रहे, वहीं दूसरी ओर उनके परिवार को बहराइच विधानसभा सीट पर झटका लगा।
उस समय वकार अहमद शाह गंभीर रूप से बीमार थे। समाजवादी पार्टी ने उनकी पत्नी रुवाब सईदा को बहराइच सीट से उम्मीदवार बनाया। रुवाब सईदा इससे पहले 2004 में बहराइच लोकसभा सीट से सांसद भी रह चुकी थीं।
हालांकि वह विधानसभा चुनाव नहीं जीत सकीं। इसके साथ ही बहराइच सीट पर वकार अहमद शाह परिवार की करीब 24 साल से चली आ रही जीत का सिलसिला टूट गया।
2022 में पत्नी मारिया शाह ने संभाली राजनीतिक विरासत
2022 के विधानसभा चुनाव में मटेरा सीट पर यासर शाह की पत्नी मारिया शाह समाजवादी पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरीं।
उन्होंने चुनाव जीतकर मटेरा सीट पर परिवार की पकड़ कायम रखी। इस तरह सीट बनने के बाद हुए तीन विधानसभा चुनावों में शाह परिवार का प्रभाव लगातार बना रहा।
पहले 2012 और 2017 में यासर शाह विधायक बने और इसके बाद 2022 में मारिया शाह ने जीत दर्ज की।
2027 में दिलचस्प होगा मटेरा का मुकाबला
मटेरा सीट का चुनावी इतिहास ज्यादा पुराना नहीं है, लेकिन थोड़े ही समय में यह बहराइच जिले की अहम राजनीतिक सीटों में शामिल हो चुकी है।
यहां समाजवादी पार्टी और शाह परिवार की मजबूत मौजूदगी रही है। दूसरी ओर भाजपा आने वाले चुनाव में इस समीकरण को तोड़ने की कोशिश करेगी।
ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव में मटेरा सीट पर उम्मीदवारों के चयन से लेकर जातीय और स्थानीय समीकरण तक काफी अहम रहने वाले हैं।

