Yuva India: एक समय फर्श पर पहुंच चुके यस बैंक (YES Bank) ने शानदार वापसी करते हुए खुद को देश के शीर्ष 10 निजी बैंकों की सूची में फिर से मजबूती से स्थापित कर लिया है। मार्च 2020 में वित्तीय संकट के कगार पर खड़े इस बैंक को बचाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और केंद्र सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा था, जिसके बाद आज यह बैंक पुनरुद्धार और मजबूती की एक नई मिसाल बनकर उभरा है।
मार्च 2020 का संकट: जब रुक गई थीं सांसें
5 मार्च 2020 की शाम को आरबीआई ने यस बैंक के बोर्ड को भंग कर खाताधारकों के लिए निकासी सीमा ₹50,000 तय कर दी थी। इसके बाद देशभर के एटीएम पर लंबी कतारें लग गईं और शेयर ₹36.85 से गिरकर सीधे ₹5.55 के निचले स्तर पर आ गया। अगस्त 2018 में ₹404 प्रति शेयर की कीमत पर कारोबार करने वाला यह बैंक दो साल में करीब 98.6% तक टूट गया।
वित्तीय अनियमतताओं के कारण तत्कालीन संस्थापक व एमडी राणा कपूर पर जांच एजेंसियों की कार्रवाई शुरू हुई, जिन्होंने 2019 में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच दी थी। बैंक को वित्त वर्ष की एक तिमाही में ₹18,564 करोड़ का रिकॉर्ड घाटा झेलना पड़ा था।
पुनरुद्धार की प्रमुख वजहें और वित्तीय स्थिति
एसबीआई (SBI), एचडीएफसी (HDFC), आईसीआईसीआई (ICICI) और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे प्रमुख बैंकों के कंसोर्टियम ने संकट के समय ₹10,350 करोड़ का निवेश कर बैंक को सहारा दिया।
संपत्ति में भारी उछाल: वित्त वर्ष 2026 में बैंक की कुल संपत्ति बढ़कर ₹4.69 लाख करोड़ हो गई है, जो मार्च 2020 में लगभग ₹2.85 लाख करोड़ थी।
जमा राशि में वृद्धि: बैंक में जमा राशि मार्च 2020 के ₹1.05 लाख करोड़ से बढ़कर ₹2.85 लाख करोड़ पहुंच गई है।
एनपीए (NPA) में सुधार: ग्रॉस एनपीए (Gross NPA) 16.8% से घटकर 1.6% और नेट एनपीए (Net NPA) 5% से घटकर 0.3% पर आ गया है।
घाटे से मुनाफे का सफर: 2020 में ₹16,433 करोड़ के घाटे के मुकाबले 2026 में बैंक ने ₹3,476 करोड़ का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है।
भविष्य की योजनाएं (Next Steps)
यस बैंक की वर्तमान में देशभर में 1,334 शाखाएं और लगभग 29,573 कर्मचारी हैं। बैंक के प्रबंध निदेशक (MD) विनय टॉंसे के अनुसार, आने वाले 4 से 5 वर्षों में 400 से 500 नई शाखाएं खोलने की योजना है, जिसमें रिटेल, ट्रांजैक्शन बैंकिंग और फॉरेक्स/ट्रेड पर मुख्य फोकस रहेगा।
