Yuva India : यूपीआई से भुगतान करने वाले कारोबारियों के लिए एमडीआर व्यवस्था को लेकर सरकार और बैंकों के बीच बातचीत शुरू होने वाली है। 15 अक्टूबर से यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लागू होने की तैयारी है। सरकार अब यह तय करने पर विचार कर रही है कि एमडीआर से होने वाली लागत की भरपाई के लिए कितनी सब्सिडी जारी रखी जाए और उसका स्वरूप क्या हो।
यूपीआई संचालन की लागत पूरी नहीं कर रहा एमडीआर
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, यूपीआई लेनदेन से मिलने वाला एमडीआर भुगतान प्लेटफॉर्म को चलाने और उसके रखरखाव की पूरी लागत को कवर करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। ऐसे में सरकार भारतीय बैंक संघ के साथ मिलकर आगे की सब्सिडी व्यवस्था पर चर्चा करेगी।
सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में प्रोत्साहन योजना के लिए ₹2,000 करोड़ का बजट रखा है। यह राशि कम मूल्य वाले भीम-यूपीआई लेनदेन और डेबिट कार्ड के प्रोत्साहन से जुड़ी योजना के लिए है।
ग्राहकों से एमडीआर वसूलने पर रोक की तैयारी
वित्त मंत्रालय यह भी सुनिश्चित करने के लिए कि व्यापारी एमडीआर का बोझ सीधे ग्राहकों पर न डालें भारतीय बैंक संघ के साथ बातचीत करेगा। मंत्रालय के अनुसार, 15 अक्टूबर से यूपीआई पर एमडीआर लागू होने की तारीख में फिलहाल बदलाव का प्रस्ताव नहीं है।
सरकार व्यापारियों और उनके संगठनों से भी बातचीत करेगी, ताकि उन्हें एमडीआर व्यवस्था के बारे में जानकारी दी जा सके और यह स्पष्ट किया जा सके कि ज्यादातर व्यापारियों पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा।
जीएसटी को लेकर भी सामने आया मुद्दा
भुगतान प्रोसेसर और बैंकों द्वारा व्यापारियों से वसूले जाने वाले एमडीआर पर जीएसटी लगाने का फैसला सरकार अकेले नहीं कर सकती। इस मामले में जीएसटी परिषद को दर तय करने, छूट देने या अन्य पहलुओं पर निर्णय लेना होगा।
यूपीआई एक सेवा है और एमडीआर व्यापारियों को यह सेवा उपलब्ध कराने का शुल्क है। इसलिए इस शुल्क पर जीएसटी से जुड़े निर्णय का अधिकार जीएसटी परिषद के पास है।
पहले भी दी गई है हजारों करोड़ की प्रोत्साहन राशि
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, यूपीआई और डेबिट कार्ड को बढ़ावा देने के लिए सरकार पहले भी बड़ी राशि खर्च कर चुकी है।
जो 2021-22 में 1,389 करोड़,
2022-23 में 2,210 करोड़,
2023-24 में 3,631 करोड़,
2024-25 में 1,046 करोड़ रूपये रही।
व्यापारियों से भी होगी बातचीत
वित्त मंत्रालय की ओर से व्यापारियों और उनके प्रमुख संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स से भी बातचीत की जाएगी। इसका उद्देश्य एमडीआर व्यवस्था को लेकर व्यापारियों की चिंताओं को दूर करना और यूपीआई भुगतान स्वीकार करने को लेकर किसी तरह की परेशानी से बचना है।

