Yuva India: नीट (NEET) समेत देश की प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं में परीक्षा केंद्र पर देरी से पहुंचने वाले अभ्यर्थियों को भी परीक्षा देने का अवसर देने पर विचार किया जाना चाहिए। संसदीय समिति ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक पर रोक लगाने और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही तय करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। समिति का मानना है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और अभ्यर्थियों के अनुकूल बनाने के लिए मौजूदा व्यवस्था में जरूरी बदलाव किए जाने चाहिए।
देरी से पहुंचने वाले अभ्यर्थियों को मिल सकता है मौका
संसदीय समिति ने सुझाव दिया है कि नीट सहित प्रमुख परीक्षाओं में किसी कारणवश देर से पहुंचने वाले अभ्यर्थियों को परीक्षा में बैठने का अवसर देने की संभावनाओं पर विचार किया जाए। इसके लिए ऐसे अभ्यर्थियों से लिखित हलफनामा लेने का विकल्प भी सुझाया गया है।
इस प्रस्ताव का उद्देश्य उन उम्मीदवारों को राहत देना है, जो रास्ते में यातायात, परिवहन या अन्य अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण परीक्षा केंद्र पर देर से पहुंचते हैं। हालांकि, यह समिति की सिफारिश है। इसे लागू करने के लिए संबंधित परीक्षा प्राधिकरणों को नियमों और सुरक्षा व्यवस्था के अनुरूप निर्णय लेना होगा।
परीक्षा केंद्रों की संख्या बढ़ाने पर जोर
समिति ने सरकारी परीक्षा केंद्रों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। अधिक परीक्षा केंद्र उपलब्ध होने से अभ्यर्थियों को अपने परीक्षा स्थल तक पहुंचने में सुविधा मिल सकती है और लंबी दूरी की यात्रा से जुड़ी परेशानियां कम हो सकती हैं।
इसके साथ ही कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई है। डिजिटल माध्यम से परीक्षा आयोजित करने से परीक्षा प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने और मूल्यांकन में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसके लिए पर्याप्त कंप्यूटर, तकनीकी सुविधाएं और मजबूत निगरानी व्यवस्था जरूरी होगी।
पेपर लीक रोकने के लिए प्रश्न बैंक तैयार करने का सुझाव
प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं की घटनाओं को रोकना समिति की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए एक बड़ा और लगातार अपडेट किया जाने वाला प्रश्न बैंक तैयार करने की सिफारिश की गई है।
समिति के अनुसार, प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रश्नों के चयन, सत्यापन और गोपनीयता पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। प्रश्न बैंक को
नियमित रूप से अपडेट करने से परीक्षा प्रक्रिया में विविधता लाने और प्रश्नपत्रों की सुरक्षा मजबूत करने में सहायता मिल सकती है।
समिति ने प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों की विश्वसनीयता की जांच करने तथा उनके हितों के टकराव की संभावनाओं का आकलन करने पर भी जोर दिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया निष्पक्ष और भरोसेमंद बनी रहे।
परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही तय करने की सिफारिश
संसदीय समिति ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की जवाबदेही तय करने का सुझाव भी दिया है। समिति का मानना है कि देशभर में बड़े स्तर पर परीक्षाएं आयोजित करने वाली एजेंसियों की जिम्मेदारियां स्पष्ट होनी चाहिए और परीक्षा में किसी प्रकार की गड़बड़ी होने पर जवाबदेही निर्धारित की जानी चाहिए।
इसके अलावा, परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए स्थायी कर्मचारियों की भर्ती पर जोर दिया गया है। अनुभवी और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता से परीक्षा आयोजन, तकनीकी प्रबंधन और सुरक्षा संबंधी कार्यों को बेहतर ढंग से संचालित किया जा सकता है।
समिति ने गड़बड़ी करने वाले सेवा प्रदाताओं की सूची तैयार करने का सुझाव भी दिया है, ताकि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाएं संबंधित एजेंसियों की विश्वसनीयता का आकलन कर सकें।
बड़ी परीक्षाओं में दो चरणों की व्यवस्था पर विचार
समिति ने बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में दो चरणों वाली परीक्षा व्यवस्था की संभावनाएं तलाशने की सिफारिश की है। ऐसी व्यवस्था लागू करने से पहले इसके लाभ, चुनौतियों और व्यावहारिक पहलुओं का अध्ययन करना जरूरी होगा।
इसके साथ ही एमबीबीएस, नर्सिंग और आयुष पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अलग-अलग प्रमुख परीक्षाओं की व्यवस्था पर विचार करने का सुझाव दिया गया है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य संबंधित पाठ्यक्रमों की जरूरतों के अनुसार प्रवेश प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
विशेषज्ञ संस्थानों की मदद लेने की सलाह
परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए समिति ने आईआईटी, एम्स और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद लेने की सिफारिश की है। इन संस्थानों के विशेषज्ञ परीक्षा प्रबंधन, तकनीकी सुरक्षा, प्रश्नपत्र निर्माण और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार के लिए सुझाव दे सकते हैं।
अभ्यर्थियों को राहत मिलने की उम्मीद
संसदीय समिति की इन सिफारिशों का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना, पेपर लीक जैसी समस्याओं पर रोक लगाना और अभ्यर्थियों के सामने आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को कम करना है। यदि संबंधित प्राधिकरण इन सुझावों को स्वीकार कर लागू करते हैं, तो परीक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
फिलहाल, देरी से पहुंचने वाले अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल करने सहित अन्य प्रस्ताव सिफारिशों के स्तर पर हैं। इनके लागू होने को लेकर अंतिम निर्णय संबंधित सरकारी विभागों और परीक्षा एजेंसियों की ओर से लिया जाएगा। अभ्यर्थियों को किसी भी परीक्षा में शामिल होने से पहले आधिकारिक दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए।
