Yuva India: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान की गई राशि में कथित चोरी की जांच की अपनी निगरानी समाप्त कर दी है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा यह जानकारी दिए जाने के बाद यह आदेश आया कि मामले में आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और जांच पूरी हो चुकी है। इसके साथ ही अदालत ने जनहित को ध्यान में रखते हुए याचिकाकर्ताओं को ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही में मदद करने की अनुमति दे दी है।
मुख्य बिंदु:
जांच पूरी और चार्जशीट दाखिल: उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच को बताया कि जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल कर दी गई है।
किन लोगों पर है आरोप: जिन आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है, वे सभी मंदिर में दान संभालने या गिनने के कार्य से जुड़े थे। उनके नाम अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू हैं।
ऑडिट और बरामदगी: सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि दान गिनने के समय चोरी की जाती थी। हालांकि रिकॉर्डर में 45 दिन तक की रिकॉर्डिंग हो सकती है, लेकिन जांच के जरिए इसे बैंक खातों और जमीन जैसी संपत्तियों की खरीद तक ट्रेस किया गया। ऑडिट भी कराया गया है और सभी कलाकृतियों व दान का हिसाब लगा लिया गया है।
पीठ का आदेश: सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जोयमल्य बागची तथा वी। मोहना की बेंच ने संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट को कानून के अनुसार मामले की कार्यवाही आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने आरोपों के गुण-दोष पर कोई राय नहीं व्यक्त की है, इसलिए उसका यह आदेश किसी भी पक्ष को प्रभावित नहीं करेगा।
वरिष्ठ पदाधिकारियों की स्थिति: राज्य सरकार का कहना है कि जांच में पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा सहित वरिष्ठ ट्रस्ट पदाधिकारियों के खिलाफ अभियोजन का कोई सबूत नहीं मिला। उन्हें गवाह के तौर पर जांचा गया था। दान में अनियमितता के आरोप सामने आने के बाद दोनों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।
विपक्ष का रुख: समाजवादी पार्टी सहित विपक्ष का आरोप है कि जांच में केवल ‘छोटी मछलियों’ को पकड़ा गया है, जबकि वरिष्ठ पदाधिकारियों और बैंक कर्मचारियों को बख्श दिया गया जिनकी देखरेख वाली भूमिका की भी जांच होनी चाहिए थी।
