मैदान पर गाना गुनगुनाने से कम होता है खेल का दबाव, अमेरिकी फुटबॉल कोच की तकनीक पर चर्चा
Yuva India: खेल के मैदान पर खिलाड़ियों को अक्सर बड़े मुकाबलों के दौरान दबाव, तनाव और एकाग्रता बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ता है। ऐसे में कुछ खिलाड़ी अपनी तैयारी और प्रदर्शन को बेहतर बनाए रखने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं। इनमें एक तरीका है मैदान पर गाना गुनगुनाना। यह सुनने में भले ही सामान्य आदत लगे, लेकिन खेल मनोविज्ञान और सांस लेने की तकनीकों के संदर्भ में इसे तनाव नियंत्रित करने का एक संभावित तरीका माना जा रहा है।
अमेरिकी नेशनल फुटबॉल लीग (NFL) की टीम शिकागो बियर्स के स्टार क्वार्टरबैक कालेब विलियम्स बड़े मुकाबलों के दौरान मैदान पर गुनगुनाते हैं। हाल ही में एक मैच के टीवी प्रसारण में उन्हें लंबी सांस छोड़ने के बाद कुछ गुनगुनाते हुए देखा गया। रिपोर्ट में इस आदत को खेल के दबाव से निपटने की उनकी व्यक्तिगत तकनीक के रूप में बताया गया है।
गुनगुनाने से ध्यान दबाव से हटकर खेल पर रहता है
कालेब विलियम्स के अनुसार, गुनगुनाना उन्हें मानसिक रूप से शांत रहने और खेल पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है। बड़े मुकाबलों में खिलाड़ियों के सामने दर्शकों की उम्मीदें, टीम की जिम्मेदारी और मैच के नतीजे का दबाव होता है। ऐसे समय में मन में कई तरह के विचार आ सकते हैं। गुनगुनाने जैसी छोटी गतिविधि खिलाड़ी को अपनी लय बनाए रखने में मदद कर सकती है।
यह तरीका केवल फुटबॉल तक सीमित नहीं है। भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी बल्लेबाजी के दौरान गाने गुनगुनाने की बात कह चुके हैं। 2013 में पीटीआई की एक रिपोर्ट में लेखक और पूर्व क्रिकेट टीम मैनेजर रुडी वेबस्टर की किताब Think Like a Champion के हवाले से बताया गया था कि धोनी गेंदबाज के रन-अप के दौरान गाना गुनगुनाते थे। उनका कहना था कि इससे अनावश्यक विचारों से ध्यान हटाकर गेंद पर फोकस करने में मदद मिलती है। गेंदबाज के गेंद छोड़ने के समय वह अपना पूरा ध्यान गेंद पर लगा देते थे।
सांस छोड़ने और गुनगुनाने का क्या है संबंध?
विशेषज्ञों के अनुसार, गुनगुनाने के दौरान व्यक्ति आमतौर पर सांस को धीरे-धीरे बाहर छोड़ता है। नियंत्रित और धीमी सांस लेने की तकनीक शरीर की तनाव प्रतिक्रिया को कम करने और मानसिक एकाग्रता बनाए रखने में मदद कर सकती है। खेल प्रदर्शन और सांस लेने की तकनीकों पर 2023 में प्रकाशित एक वैज्ञानिक समीक्षा में बताया गया कि धीमी सांस लेने से कुछ परिस्थितियों में हृदय गति, तनाव और चिंता कम करने तथा ध्यान केंद्रित रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि खेल प्रदर्शन पर इसके प्रभाव को लेकर अभी और अध्ययन की जरूरत है।
2024 में प्रकाशित एक व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण में भी सांस लेने की अलग-अलग तकनीकों और खिलाड़ियों के शारीरिक प्रदर्शन के बीच संबंध का अध्ययन किया गया। इसमें धीमी गति से सांस लेने और सांस रोकने की कुछ तकनीकों के संभावित लाभ सामने आए, लेकिन अध्ययनों में अंतर और कई शोधों में सीमाओं के कारण किसी एक तरीके को सभी खिलाड़ियों के लिए निश्चित रूप से प्रभावी नहीं माना गया।
गुनगुनाना खिलाड़ियों के लिए कैसे हो सकता है मददगार?
मैदान पर गुनगुनाने से खिलाड़ी को अपनी सांस की गति पर ध्यान देने का अवसर मिल सकता है। इससे वह कुछ समय के लिए बाहरी शोर और दबाव से ध्यान हटाकर अपनी मानसिक स्थिति को संभाल सकता है। लगातार तनाव में रहने वाले खिलाड़ियों के लिए सांस को नियंत्रित करना और मानसिक रूप से शांत रहना उपयोगी हो सकता है।
आयरलैंड के ब्रीदिंग और परफॉर्मेंस विशेषज्ञ पैट्रिक मैककेन के विचारों का भी रिपोर्ट में उल्लेख है। उनके अनुसार, गुनगुनाना सांस छोड़ने की प्रक्रिया को लंबा कर सकता है। धीरे-धीरे सांस छोड़ने से शरीर को शांत होने का संकेत मिल सकता है। हालांकि, हर खिलाड़ी की जरूरत और प्रतिक्रिया अलग होती है।
क्या आम जिंदगी में भी आजमा सकते हैं यह तरीका?
गुनगुनाना केवल खिलाड़ियों के लिए ही नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए भी तनावपूर्ण परिस्थितियों में एक आसान अभ्यास हो सकता है। परीक्षा, इंटरव्यू, सार्वजनिक भाषण या किसी महत्वपूर्ण काम से पहले व्यक्ति धीमी और सहज सांस लेने पर ध्यान दे सकता है। हल्के स्वर में गुनगुनाना कुछ लोगों को आराम महसूस करा सकता है।
2025 में प्रकाशित एक छोटे पायलट अध्ययन में 16 स्वस्थ वयस्कों पर धीमी सांस और गुनगुनाते हुए सांस लेने के प्रभावों का परीक्षण किया गया। अध्ययन में दोनों तकनीकों के दौरान हृदय गति परिवर्तनशीलता (HRV) में कुछ सकारात्मक बदलाव और आराम महसूस करने के संकेत मिले। हालांकि, प्रतिभागियों की संख्या कम थी, इसलिए इसे सभी लोगों पर लागू नहीं किया जा सकता।
कुल मिलाकर, मैदान पर गुनगुनाना खिलाड़ियों के लिए मानसिक दबाव संभालने का एक व्यक्तिगत तरीका हो सकता है। लेकिन इसे प्रदर्शन बढ़ाने का कोई पक्का वैज्ञानिक नुस्खा नहीं माना जाना चाहिए। जरूरत से ज्यादा तनाव या घबराहट होने पर प्रशिक्षित खेल मनोवैज्ञानिक और स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लेना भी जरूरी है।
