Yuva India: अमेरिका में नौकरी करने का सपना देख रहे भारतीय पेशेवरों के लिए राहत भरी खबर है। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) ने संघीय अदालतों के आदेशों के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से लागू की गई 1 लाख डॉलर की अतिरिक्त H-1B वीजा फीस के बिना भी कुछ वीजा याचिकाओं को मंजूरी देना शुरू कर दिया है। इस फैसले से उन अमेरिकी कंपनियों और विदेशी कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो अतिरिक्त फीस के कारण भर्ती प्रक्रिया में परेशानी का सामना कर रहे थे। भारतीय नागरिक H-1B वीजा के प्रमुख लाभार्थियों में शामिल हैं।
अदालत के आदेश से मिली राहत
ट्रंप प्रशासन ने सितंबर 2025 में कुछ नई H-1B वीजा याचिकाओं पर 1 लाख डॉलर की अतिरिक्त फीस लागू करने की घोषणा की थी। इस फैसले का उद्देश्य अमेरिकी कंपनियों द्वारा विदेशी कर्मचारियों की भर्ती को नियंत्रित करना और अमेरिकी कामगारों के हितों की रक्षा करना बताया गया था।
हालांकि, इस फीस को अदालत में चुनौती दी गई। 8 जून 2026 को मैसाचुसेट्स की संघीय अदालत ने फीस लागू करने से संबंधित सरकारी निर्देश को रद्द कर दिया। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने फैसले पर रोक लगाने की मांग की, लेकिन 24 जुलाई 2026 को प्रथम सर्किट अपील अदालत ने इस मांग को खारिज कर दिया। इसके चलते निचली अदालत का आदेश प्रभावी बना रहा और USCIS को संबंधित याचिकाओं पर यह फीस वसूलने से रोक दिया गया।
भारतीय पेशेवरों को क्यों होगा फायदा?
H-1B वीजा अमेरिकी कंपनियों को विशेष कौशल वाले विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने की अनुमति देता है। इसका इस्तेमाल सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, शोध, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे क्षेत्रों में किया जाता है। भारतीय पेशेवर इस कार्यक्रम के प्रमुख लाभार्थियों में शामिल हैं।
अमेरिका में तकनीकी और अन्य विशेषज्ञता वाले पदों पर काम करने के इच्छुक भारतीयों के लिए अतिरिक्त 1 लाख डॉलर की फीस बड़ी बाधा बन सकती थी। यह भुगतान सामान्यतः कर्मचारी के बजाय संबंधित नियोक्ता पर पड़ता है, लेकिन इससे कंपनियों की भर्ती लागत बढ़ सकती है। फीस के बिना पात्र याचिकाओं पर प्रक्रिया आगे बढ़ने से कुछ कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करना आसान हो सकता है।
लंबित आवेदनों पर भी आगे बढ़ रही प्रक्रिया
फीस के बिना दाखिल कुछ H-1B याचिकाओं को मंजूरी मिलने लगी है। हालांकि, सभी लंबित आवेदनों का निपटारा एक साथ नहीं हुआ है। कुछ मामलों में प्रीमियम प्रोसेसिंग के लिए निर्धारित 15 कारोबारी दिनों की अवधि बीतने के बाद भी निर्णय लंबित रहने की जानकारी सामने आई है। इसलिए आवेदकों को यह नहीं मानना चाहिए कि अदालत के फैसले के बाद हर आवेदन तुरंत स्वीकृत हो जाएगा।
क्या अब सभी H-1B आवेदकों को फीस नहीं देनी होगी?
यह समझना जरूरी है कि अदालत से मिली राहत का मतलब H-1B वीजा की सभी फीस समाप्त होना नहीं है। यह मामला मुख्य रूप से 1 लाख डॉलर की अतिरिक्त फीस से जुड़ा है। वीजा और याचिका प्रक्रिया से संबंधित अन्य लागू शुल्क, पात्रता नियम और दस्तावेजों की आवश्यकताएं अलग हो सकती हैं।
इसके अलावा, अमेरिकी प्रशासन ने इस फैसले को चुनौती देने की कानूनी प्रक्रिया जारी रखी है और भविष्य में नियमों में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अगस्त 2026 में प्रशासन ने कुछ H-1B याचिकाओं पर 1,03,265 डॉलर की फीस लागू करने के लिए अलग प्रस्तावित नियम भी पेश किया था। यह प्रस्ताव अलग कानूनी आधार पर तैयार किया गया है और इसे पहले वाली फीस से संबंधित अदालत के फैसले के समान नहीं समझना चाहिए।
भारतीय आवेदक क्या करें ?
H-1B वीजा के लिए आवेदन करने वाले भारतीय पेशेवरों को अपने नियोक्ता और आव्रजन विशेषज्ञ से वर्तमान नियमों की पुष्टि करनी चाहिए। फीस की लागू स्थिति, आवेदन की श्रेणी और याचिका दाखिल करने की तारीख के आधार पर स्थिति अलग हो सकती है। USCIS की आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखना भी जरूरी है।
कुल मिलाकर, 1 लाख डॉलर की अतिरिक्त फीस पर अदालत की रोक और उसके बिना कुछ याचिकाओं को मंजूरी मिलने से भारतीय पेशेवरों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, वीजा की मंजूरी अब भी पात्रता, दस्तावेजों और आवेदन की जांच पर निर्भर करेगी।
