Yuva India: देश के जाने-माने न्यूरोसर्जन, एम्स भोपाल के अध्यक्ष और पद्मश्री से सम्मानित प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार महापात्र का 2 नवंबर को नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में निधन हो गया। वे 74 वर्ष के थे और लंबे समय से न्यूरोलॉजिकल बीमारियों व ब्रेन ट्यूमर (ग्लियोब्लास्टोमा) से जूझ रहे थे। जीवनभर अनगिनत मरीजों के ब्रेन ट्यूमर की जटिल सर्जरी करने वाले डॉ. महापात्र खुद इस बीमारी से नहीं बच सके।
जग्गा-कालिया की 16 घंटे लंबी ऐतिहासिक सर्जरी का किया था नेतृत्व
डॉ. महापात्र को सबसे अधिक प्रसिद्धि वर्ष 2017 में ओडिशा के सिर से जुड़े जुड़वां बच्चों ‘जग्गा और कालिया’ को अलग करने वाली बेहद जटिल सर्जरी के नेतृत्व के लिए मिली थी। दोनों बच्चों के मस्तिष्क की रक्तिकाएं साझा होने और जरा सी चूक से जान जाने का गंभीर खतरा होने के बावजूद, एम्स दिल्ली में उनके नेतृत्व में 30 डॉक्टरों की टीम ने 16 घंटे की मैराथन सर्जरी कर दोनों भाइयों को सफलतापूर्वक अलग किया था। यह दुर्लभ उपलब्धि ‘लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में भी दर्ज हुई थी।
चिकित्सा जगत में अतुलनीय योगदान
डॉ. अशोक कुमार महापात्र ने अपने लंबे करियर में एम्स नई दिल्ली के न्यूरोसर्जरी विभाग के विकास में अहम भूमिका निभाई और विभाग के प्रमुख रहे। इसके अलावा वे एम्स भुवनेश्वर के संस्थापक (फाउंडिंग) निदेशक, संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGIMS) लखनऊ के निदेशक तथा शिक्षा ‘ओ’ अनुसंधान (SOA) विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर के कुलपति के रूप में भी सेवा दे चुके थे। चिकित्सा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट और विशिष्ट योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2025 में देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया था।
चिकित्सा बिरादरी में शोक की लहर
उनके निधन पर देश के राजनीतिक दिग्गजों, चिकित्सा जगत के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक सहित तमाम वरिष्ठ डॉक्टरों ने इसे देश की चिकित्सा बिरादरी के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।
