त्योहारी सीजन में कई रूटों पर हवाई किराये डेढ़ से दोगुने से भी ज्यादा बढ़े; नए नियमों के तहत एयरलाइंस को उड़ान से पहले किराये की जानकारी देनी होगी
Yuva India: हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए केंद्र सरकार के नए नियमों को लेकर अहम जानकारी सामने आई है। सरकार के अनुसार, हवाई किरायों को सामान्य परिस्थितियों में सीधे नियंत्रित या नियमित नहीं किया जाएगा। किराया तय करने की व्यवस्था मांग और आपूर्ति पर आधारित रहेगी। हालांकि, प्राकृतिक आपदा, युद्ध या अन्य असाधारण परिस्थितियों में आम यात्रियों को राहत देने के लिए सरकार के पास किराये पर सीमा तय करने का अधिकार रहेगा।
त्योहारी सीजन में हवाई टिकटों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच यह मुद्दा फिर चर्चा में आया है। इस साल दिवाली और छठ के आसपास कई प्रमुख हवाई मार्गों पर किराये पिछले साल की तुलना में काफी अधिक रहे।
सामान्य परिस्थितियों में बाजार के आधार पर तय होगा किराया
सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि नए नियमों के तहत हवाई किरायों पर हर समय सीधा नियंत्रण नहीं लगाया जाएगा। एयरलाइंस मांग, उपलब्ध सीटों और परिचालन लागत जैसे कारकों के आधार पर किराया तय कर सकेंगी।
हालांकि, किसी प्राकृतिक आपदा या आपात स्थिति में किरायों में असामान्य बढ़ोतरी होने पर सरकार हस्तक्षेप कर सकती है। इसका उद्देश्य संकट के समय यात्रियों को अत्यधिक महंगे टिकटों से राहत देना है।
नए नियमों के तहत एयरलाइंस को उड़ान के किराये की जानकारी पहले से उपलब्ध करानी होगी। इसके लिए उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) को जानकारी देनी होगी। DGCA इस व्यवस्था की निगरानी करेगा।
दिवाली और छठ पर कई रूटों पर किराया तेजी से बढ़ा
2025 और 2026 के त्योहारी सीजन के दौरान कई प्रमुख हवाई मार्गों पर किराये में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई।
| हवाई मार्ग | 2025 का किराया | 2026 का किराया | बढ़ोतरी |
|---|---|---|---|
| मुंबई-दिल्ली | ₹8,534 | ₹11,531 | 35.1% |
| बेंगलुरु-दिल्ली | ₹9,264 | ₹16,469 | 77.8% |
| मुंबई-पटना | ₹14,540 | ₹25,643 | 76.4% |
| बेंगलुरु-पटना | ₹13,000 | ₹26,053 | 100.4% |
| मुंबई-वाराणसी | ₹7,500 | ₹15,926 | 112.3% |
| बेंगलुरु-वाराणसी | ₹8,500 | ₹17,698 | 108.2% |
| दिल्ली-पटना | ₹11,500 | ₹19,000 | 30.4% |
| हैदराबाद-पटना | ₹9,000 | ₹22,000 | 144.4% |
उड़ानों की मांग और ईंधन की कीमतों का असर
त्योहारी सीजन में बड़ी संख्या में लोग अपने घर जाने के लिए हवाई यात्रा करते हैं। इससे दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों से पटना और वाराणसी जैसे गंतव्यों के लिए टिकटों की मांग बढ़ जाती है।
इसके अलावा, विमानन ईंधन की कीमतें, उड़ानों की उपलब्धता और एयरलाइंस की परिचालन लागत भी किरायों को प्रभावित करती हैं। मांग अधिक होने और सीटें सीमित रहने पर टिकट महंगे हो सकते हैं।
सरकार के सामने चुनौती यह है कि बाजार आधारित व्यवस्था बनी रहे, लेकिन त्योहारों या आपात परिस्थितियों में यात्रियों को अनुचित कीमतों का सामना न करना पड़े।
सुप्रीम कोर्ट में भी उठा था हवाई किराये का मुद्दा
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में भी नए नियमों को लेकर जानकारी दी थी। अदालत में अनियंत्रित और मनमाने हवाई किरायों को रोकने के लिए नियम बनाने का मुद्दा उठा था।
ये नियम भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत तैयार किए गए हैं और इन्हें प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है। याचिका में सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन ने त्योहारों, छुट्टियों और आपातकालीन परिस्थितियों में अत्यधिक किराये तथा छिपे हुए शुल्कों पर रोक लगाने की मांग की थी।
यात्रियों के लिए क्या मायने हैं नए नियम?
नए नियमों से सामान्य परिस्थितियों में टिकटों की कीमतों पर तत्काल सरकारी नियंत्रण लागू होने की उम्मीद नहीं है। हालांकि, असाधारण परिस्थितियों में सरकार हस्तक्षेप कर सकती है। किराये की जानकारी पहले से उपलब्ध कराने और निगरानी की व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
यात्रियों के लिए सलाह है कि त्योहारों और छुट्टियों के दौरान टिकट पहले बुक करें, अलग-अलग एयरलाइंस के किरायों की तुलना करें और टिकट खरीदने से पहले सभी शुल्कों की जानकारी जरूर देखें।
