Yuva India: पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से जुड़े कथित भ्रष्टाचार, ट्रांसफर-पोस्टिंग और सरकारी टेंडरों में हस्तक्षेप के आरोपों के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से दी गई सूचना पर लगभग दो महीने तक FIR दर्ज न करने को गंभीर मानते हुए मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि ED की सूचना प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध की ओर संकेत करती है। ऐसे में पुलिस को तुरंत FIR दर्ज करनी चाहिए थी।
क्या है मामला ?
ED ने 30 जुलाई 2026 को पीएमएलए की धारा 66(2) के तहत पंजाब पुलिस को एक पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की थी। पत्र में मुख्यमंत्री कार्यालय के ओएसडी राजबीर सिंह धामन, उनके सहयोगी नितिन गोयल और वीर देवेंद्र के खिलाफ ट्रांसफर-पोस्टिंग, सरकारी कामकाज और टेंडर प्रक्रियाओं में कथित हस्तक्षेप तथा लेन-देन के आरोपों का उल्लेख किया गया था।
ED की रिपोर्ट में 21 सोशल मीडिया चैट्स और कई दस्तावेज शामिल थे। इनमें ट्रांसफर-पोस्टिंग, सरकारी फैसलों, नियमों में बदलाव और टेंडर आवंटन से जुड़े कथित प्रभाव और लाभ के संकेत बताए गए थे।
हाईकोर्ट ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि जब ED का पत्र 3 अगस्त को प्राप्त हो गया था और अधिकारियों ने दस्तावेजों का अध्ययन भी किया, तो FIR दर्ज करने में दो महीने की देरी क्यों हुई। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि दस्तावेज पढ़ने योग्य नहीं थे तो विभिन्न विभागों को नोटिस कैसे जारी किए गए।
अदालत ने पुलिस की कार्रवाई को “साफ-सुथरी और पारदर्शी जांच” के अनुरूप नहीं माना और कहा कि उपलब्ध सामग्री FIR दर्ज करने के लिए पर्याप्त प्रतीत होती है।
याचिकाकर्ता का दावा
जनहित याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता निवेदित सराफ ने आरोप लगाया कि मामले को दबाने का प्रयास किया गया। याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया कि PIL दायर करने के बाद उन्हें चुप कराने के लिए उनके फार्म हाउस पर तोड़फोड़ की गई। हाईकोर्ट ने इस आरोप को प्रथम दृष्टया असामान्य बताते हुए कहा कि इससे वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर संदेह उत्पन्न होता है।
सरकार ने आदेश को चुनौती देने के संकेत दिए
पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि राज्य सरकार हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने पर विचार कर रही है। सरकार का कहना है कि मामले को राजनीतिक रंग देकर चुनावी माहौल प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने सीबीआई को मामले की जांच कर दो महीने के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 7 दिसंबर 2026 को निर्धारित की गई है।

