मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से तेल बाजार में उथल-पुथल, सऊदी अरब और होर्मुज जलडमरूमध्य के घटनाक्रम पर दुनिया की नजर
Yuva India: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर को ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 117 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। यह करीब पांच महीनों का उच्चतम स्तर है। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव, सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों पर हमलों और समुद्री मार्गों से तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, कारोबार के दौरान कीमतों में कुछ उतार-चढ़ाव भी देखा गया।
तेल की कीमतों में इस तेजी का असर केवल ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं है। कच्चा तेल महंगा होने से परिवहन, उत्पादन और माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है। इससे दुनिया के कई देशों में महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है। भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए भी अंतरराष्ट्रीय कीमतों में होने वाला बदलाव महत्वपूर्ण है।
मिडिल ईस्ट के तनाव से बढ़ी सप्लाई की चिंता
तेल की कीमतों में तेजी की प्रमुख वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है। यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब में हमलों की खबरों और ईरान-अमेरिका के बीच संभावित नए सैन्य टकराव की आशंका ने बाजार को प्रभावित किया है।
सऊदी अरब दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल है। ऐसे में वहां तेल क्षेत्रों, बंदरगाहों या ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचने की आशंका से वैश्विक आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ जाती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य भी इस संकट के केंद्र में है। यह समुद्री मार्ग खाड़ी क्षेत्र से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक तेल पहुंचाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होने या सुरक्षा जोखिम बढ़ने से तेल की आपूर्ति और माल ढुलाई प्रभावित हो सकती है।
ब्रेंट क्रूड 117 डॉलर के पार
ब्रेंट क्रूड अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का प्रमुख मानक है। 23 अक्टूबर को इसका भाव कुछ समय के लिए 117 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया। इससे पहले गुरुवार को ब्रेंट क्रूड 113.17 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार करता दिखाई दिया।
तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से निवेशकों की चिंता बढ़ी है। यदि आपूर्ति में लंबे समय तक बाधा बनी रहती है, तो कीमतों पर दबाव जारी रह सकता है। दूसरी ओर, क्षेत्र में तनाव कम होने और समुद्री मार्ग सामान्य रहने पर बाजार को राहत मिल सकती है।
रूस से डीजल लेकर अमेरिका जा रहा टैंकर
तेल बाजार के बीच रूस से डीजल की एक खेप अमेरिका की ओर रवाना होने की खबर भी सामने आई है। माल्टा के झंडे वाला टैंकर Agioi Fanendes रूस के प्रिमोर्स्क बंदरगाह से करीब 40,000 मीट्रिक टन अल्ट्रा-लो-सल्फर डीजल लेकर रवाना हुआ है। जहाज के 7 नवंबर के आसपास अमेरिका पहुंचने की उम्मीद जताई गई है। हालांकि, खरीदार और अंतिम डिलीवरी से जुड़ी कुछ जानकारियां स्पष्ट नहीं हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका में डीजल की ऊंची कीमतों को लेकर दबाव है। रूस से ईंधन की आपूर्ति बढ़ाने के प्रयासों का उद्देश्य बाजार में उपलब्धता सुधारना और कीमतों पर दबाव कम करना बताया गया है। लेकिन एक खेप से वैश्विक तेल बाजार की स्थिति तुरंत बदल जाएगी, ऐसा मानना जल्दबाजी होगी।
शेयर बाजार और महंगाई पर भी असर
ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल का असर शेयर बाजारों पर भी पड़ सकता है। तेल महंगा होने से कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ती है, जबकि निवेशकों को भविष्य में महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंता हो सकती है। 23 अक्टूबर को अमेरिकी शेयर बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई।
भारत के लिए भी कच्चे तेल की कीमतें अहम हैं, क्योंकि आयात महंगा होने से देश के आयात बिल और व्यापार संतुलन पर दबाव पड़ सकता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का असर घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर कब और कितना पड़ेगा, यह रुपये की विनिमय दर, सरकारी करों, तेल कंपनियों की नीतियों और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया का तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बाजार की दिशा तय कर रहे हैं। आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों पर सैन्य घटनाक्रम, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और कूटनीतिक प्रयासों का असर देखने को मिल सकता है।

