4 सरकारी बैंकों से हिस्सेदारी बेचेगी सरकार! पंजाब एंड सिंध बैंक समेत इन बैंकों पर नजर, 19% तक शेयर बेचने की तैयारी
Yuva India: केंद्र सरकार चार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अपनी हिस्सेदारी घटाने की तैयारी कर रही है। इनमें सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक शामिल हैं। सरकार इन बैंकों में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 75 प्रतिशत तक लाने पर विचार कर रही है। इसके लिए बाजार की परिस्थितियों के अनुसार शेयर बेचने की योजना बनाई जा सकती है।
इस कदम का प्रमुख उद्देश्य शेयर बाजार के न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (Minimum Public Shareholding) नियमों का पालन करना है। सरकार अगले एक साल के दौरान चरणबद्ध तरीके से हिस्सेदारी बेच सकती है। हालांकि, अभी बिक्री की अंतिम तारीख, शेयरों की संख्या और कीमत को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
किन चार सरकारी बैंकों में बिकेगी हिस्सेदारी ?
सरकार जिन चार बैंकों में अपनी हिस्सेदारी कम करने पर विचार कर रही है, उनमें उसकी मौजूदा हिस्सेदारी अलग-अलग है।
1. सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया: बैंक में सरकार की हिस्सेदारी लगभग 81.19 प्रतिशत है। इसे 75 प्रतिशत तक लाने के लिए करीब 6.19 प्रतिशत हिस्सेदारी घटानी पड़ सकती है।
2. यूको बैंक: इस बैंक में सरकार की हिस्सेदारी लगभग 90.95 प्रतिशत बताई गई है। इसे 75 प्रतिशत तक लाने के लिए करीब 15.95 प्रतिशत हिस्सेदारी कम करनी होगी।
3. पंजाब एंड सिंध बैंक: सरकार की इस बैंक में लगभग 93.85 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसे 75 प्रतिशत तक लाने के लिए करीब 18.85 प्रतिशत हिस्सेदारी घटानी पड़ सकती है। इसी वजह से इस बैंक में लगभग 19 प्रतिशत तक हिस्सेदारी बेचने की संभावना चर्चा में है।
4. इंडियन ओवरसीज बैंक: इसमें सरकार की हिस्सेदारी करीब 92.44 प्रतिशत बताई गई है। इसे 75 प्रतिशत तक लाने के लिए लगभग 17.44 प्रतिशत हिस्सेदारी कम करनी होगी।
क्यों हिस्सेदारी बेच रही है सरकार ?
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता नियमों के तहत सूचीबद्ध कंपनियों में आम निवेशकों के पास कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने का प्रावधान है। इन चार बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी अधिक होने के कारण सार्वजनिक शेयरधारिता बढ़ाने की जरूरत है।
हिस्सेदारी घटने से बाजार में इन बैंकों के अधिक शेयर उपलब्ध हो सकते हैं। इससे खुदरा और संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ने की संभावना रहती है। हालांकि, शेयरों की कीमत और निवेशकों की प्रतिक्रिया बाजार की स्थिति, बैंक के वित्तीय प्रदर्शन और बिक्री की शर्तों पर निर्भर करेगी।
OFS और QIP के जरिए हो सकती है बिक्री
सरकार ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए अपने शेयर बेच सकती है। इस प्रक्रिया में मौजूदा शेयरधारक बाजार में अपने शेयर निवेशकों को बेचते हैं।
इसके अलावा, बैंक क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के जरिए भी पूंजी जुटा सकते हैं। इसमें पात्र संस्थागत निवेशकों को शेयर जारी किए जाते हैं। दोनों तरीके अलग-अलग हैं—OFS में सरकार अपनी मौजूदा हिस्सेदारी बेच सकती है, जबकि QIP में बैंक नए शेयर जारी करके पूंजी जुटाता है। अंतिम तरीका संबंधित बैंक और सरकार की मंजूरी तथा बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
क्या सरकारी बैंकों का निजीकरण भी होगा ?
हिस्सेदारी बिक्री की खबरों के साथ सरकारी बैंकों के संभावित विलय और निजीकरण को लेकर भी चर्चा हो रही है। सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के अगले चरण के एकीकरण की रणनीति पर भी विचार कर रही है। इस प्रक्रिया में दो बैंकों को निजीकरण के लिए संभावित विकल्प के तौर पर देखे जाने की बात कही गई है।
हालांकि, चार बैंकों में हिस्सेदारी घटाने की योजना को इन बैंकों के तत्काल निजीकरण का फैसला नहीं माना जाना चाहिए। फिलहाल हिस्सेदारी बिक्री और व्यापक बैंकिंग सुधारों पर विचार किए जाने की जानकारी है। किसी बैंक के निजीकरण या विलय के लिए अलग निर्णय और जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।
निवेशकों की नजर रहेगी अगले कदम पर
सरकार की हिस्सेदारी बिक्री से इन बैंकों के शेयरों में बाजार की दिलचस्पी बढ़ सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि शेयरों की कीमत निश्चित रूप से बढ़ेगी। निवेशकों को बैंक के वित्तीय नतीजों, मूल्यांकन, जोखिम और आधिकारिक घोषणाओं पर ध्यान देना चाहिए।
कुल मिलाकर, चार सरकारी बैंकों में हिस्सेदारी घटाने की संभावित योजना का उद्देश्य सार्वजनिक शेयरधारिता बढ़ाना और नियामकीय नियमों के अनुरूप स्थिति बनाना है। अब देखना होगा कि सरकार बिक्री की समय-सीमा, मात्रा और तरीके को लेकर कब औपचारिक जानकारी देती है।
