Yuva India: देश में होम लोन बाजार की तस्वीर तेजी से बदल रही है। एक ओर 50 लाख रुपये से अधिक के बड़े होम लोन की मांग बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर छोटे होम लोन लेने वाले युवाओं की हिस्सेदारी में भी उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला है। क्रेडिट बाजार से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, घर खरीदने के लिए कर्ज लेने वाले युवाओं की संख्या और उनकी वित्तीय जरूरतों में बदलाव आ रहा है। महिलाओं की भागीदारी भी छोटे होम लोन के क्षेत्र में मजबूत बनी हुई है।
पिछले पांच वर्षों में 10 लाख रुपये तक के होम लोन खातों की संख्या में औसतन 0.3 प्रतिशत सालाना वृद्धि हुई, जबकि 50 लाख रुपये से अधिक के होम लोन खातों में सालाना 21.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह रुझान बताता है कि आवास ऋण बाजार में छोटे और बड़े, दोनों तरह के कर्ज की भूमिका महत्वपूर्ण है।
छोटे होम लोन में युवाओं की हिस्सेदारी लगभग दोगुनी
रिपोर्ट में 30 वर्ष तक के युवाओं की छोटे होम लोन में बढ़ती हिस्सेदारी को प्रमुख बदलाव के रूप में दिखाया गया है। वर्ष 2023 में इस श्रेणी के होम लोन में युवाओं की हिस्सेदारी 7.7 प्रतिशत थी, जो 2026 में बढ़कर 15.9 प्रतिशत हो गई। यानी तीन वर्षों में यह हिस्सेदारी दोगुने से भी अधिक स्तर पर पहुंच गई।
यह बदलाव संकेत देता है कि युवा उम्र में घर खरीदने और इसके लिए औपचारिक वित्तीय सहायता लेने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। हालांकि, इन आंकड़ों से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सभी युवाओं के लिए घर खरीदना आसान हो गया है। संपत्ति की कीमत, आय, ब्याज दर और कर्ज चुकाने की क्षमता अब भी महत्वपूर्ण कारक हैं।
25 लाख रुपये तक के होम लोन की बड़ी हिस्सेदारी
25 लाख रुपये तक के होम लोन खातों की संख्या में धीमी वृद्धि के बावजूद इस श्रेणी का कुल आवास ऋण बाजार में बड़ा हिस्सा बना हुआ है। अगस्त 2026 में इस सीमा तक के करीब 1.61 करोड़ सक्रिय होम लोन खाते थे, जो कुल होम लोन खातों का लगभग 67.6 प्रतिशत बताए गए हैं।
क्रेडिट सूचना कंपनी CRIF High Mark से जुड़ी आवास ऋण बाजार की रिपोर्टों में भी किफायती आवास ऋण की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है। अगस्त 2026 तक देश के लगभग 68 प्रतिशत सक्रिय आवास ऋण किफायती आवास श्रेणी में थे। इससे छोटे शहरों और सीमित बजट वाले घर खरीदारों के लिए इस श्रेणी की अहमियत स्पष्ट होती है।
कुल बकाया होम लोन में पांच साल में बड़ा उछाल
अगस्त 2021 से अगस्त 2026 के बीच देश में कुल बकाया होम लोन की राशि 24.2 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 46.1 लाख करोड़ रुपये हो गई। यह वृद्धि आवास ऋण बाजार के विस्तार को दर्शाती है।
हालांकि, बकाया ऋण में बढ़ोतरी को केवल घर खरीदने वालों की संख्या में वृद्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसमें नए ऋण, पहले से लिए गए कर्ज की शेष राशि और ऋण की औसत रकम जैसे कई कारक शामिल होते हैं।
छोटे होम लोन में महिलाओं की भागीदारी मजबूत
रिपोर्ट में महिलाओं की हिस्सेदारी को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। वर्ष 2023 में 30 वर्ष तक की महिलाओं की छोटे होम लोन में हिस्सेदारी 31.5 प्रतिशत थी, जो 2026 में लगभग 31.4 प्रतिशत रही। यानी इस अवधि में उनकी हिस्सेदारी लगभग स्थिर बनी रही।
दूसरी ओर, छोटे होम लोन के क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी बढ़ने से यह संकेत मिलता है कि आवास ऋण बाजार में नई पीढ़ी की भूमिका मजबूत हो रही है। महिलाओं की भागीदारी से जुड़ी व्यापक प्रवृत्ति पर TransUnion CIBIL और NITI Aayog के संयुक्त अध्ययन में भी चर्चा की गई है। अप्रैल 2026 में प्रकाशित इस अध्ययन में महिलाओं की ऋण तक पहुंच और वित्तीय भागीदारी में हो रहे बदलावों का विश्लेषण किया गया है।
छोटे शहरों में भी बढ़ रही आवास ऋण की मांग
शीर्ष 100 शहरों से बाहर के क्षेत्रों में भी होम लोन बाजार में बदलाव दिखाई दे रहा है। इन शहरों में छोटे होम लोन की बकाया राशि में राष्ट्रीय औसत की तुलना में बेहतर वृद्धि दर्ज होने का उल्लेख किया गया है। यह संकेत देता है कि आवास ऋण की मांग बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है।
छोटे शहरों में घर खरीदने की इच्छा, स्थानीय संपत्ति बाजार और औपचारिक ऋण तक पहुंच इस रुझान को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में घरों की कीमत और आय के स्तर में अंतर होने के कारण सभी शहरों की स्थिति एक जैसी नहीं है।
घर खरीदने से पहले किन बातों का रखें ध्यान ?
होम लोन लेने वाले युवाओं और परिवारों को केवल स्वीकृत ऋण राशि पर ध्यान देने के बजाय अपनी मासिक आय, ब्याज दर, ईएमआई और लंबी अवधि की वित्तीय जरूरतों का आकलन करना चाहिए। बड़े होम लोन के साथ कुल ब्याज का बोझ भी बढ़ सकता है, जबकि छोटे कर्ज में भी लंबी अवधि की किस्तें बजट को प्रभावित कर सकती हैं।
कुल मिलाकर, आंकड़े बताते हैं कि भारत का होम लोन बाजार विस्तार कर रहा है। बड़े ऋणों की बढ़ती हिस्सेदारी के साथ छोटे होम लोन में युवाओं की बढ़ती भागीदारी भी एक महत्वपूर्ण बदलाव है। आने वाले समय में ब्याज दरों, संपत्ति की कीमतों और लोगों की आय का रुझान इस बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

