देश में 83% लोगों की इमरजेंसी बचत सालभर भी नहीं चलेगी, 92% युवाओं को रिटायरमेंट की चिंता
Yuva India: देश में बड़ी संख्या में कामकाजी लोग खुद को आर्थिक रूप से सुरक्षित मानते हैं, लेकिन मुश्किल समय के लिए उनकी तैयारी उतनी मजबूत नहीं है। Grant Thornton Bharat की India’s Financial Resilience Report 2026 के अनुसार, सर्वे में शामिल 63% लोगों ने खुद को आर्थिक रूप से स्थिर और आत्मविश्वासी बताया। इसके बावजूद 83% लोगों की इमरजेंसी बचत आय बंद होने पर एक साल से कम समय तक ही खर्च चला पाएगी। रिपोर्ट में युवाओं की रिटायरमेंट तैयारी, वेतन वृद्धि, महंगाई और आय के सीमित स्रोतों को लेकर भी कई अहम बातें सामने आई हैं।
यह सर्वे नवंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच देश के 528 लोगों के जवाबों पर आधारित है। इसमें शामिल 87% लोग निजी क्षेत्र में काम करते हैं, जबकि 71% टियर-1 शहरों में रहते हैं। इसलिए इसके आंकड़े सर्वे में शामिल लोगों की आर्थिक स्थिति को दर्शाते हैं, न कि पूरे देश की आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
92% युवाओं की रिटायरमेंट तैयारी कमजोर
देश में 34 साल से कम उम्र के 92% लोगों ने माना कि वे रिटायरमेंट के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं हैं। वहीं, 35 से 54 साल के 77% लोगों के पास भी रिटायरमेंट के लिए जरूरी वित्तीय तैयारी की कमी है।
यह स्थिति बताती है कि नौकरी और नियमित कमाई के बावजूद लंबे समय के वित्तीय लक्ष्यों के लिए पर्याप्त योजना नहीं बन पा रही है। रोजमर्रा के खर्च, परिवार की जिम्मेदारियां और महंगाई के कारण भविष्य के लिए पर्याप्त रकम जुटाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
रिटायरमेंट की तैयारी का मतलब केवल बचत करना नहीं, बल्कि भविष्य के खर्चों, स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों और नियमित आय बंद होने के बाद की आर्थिक जरूरतों का आकलन करना भी है।
91% लोगों की कमाई का मुख्य जरिया नौकरी
सर्वे में शामिल 91% लोगों ने नौकरी से मिलने वाले वेतन को अपनी आय का प्रमुख स्रोत बताया। इसके मुकाबले केवल 29% लोगों ने निवेश से आय मिलने की बात कही। कारोबार, किराये या दूसरी नौकरी से कमाई करने वालों की हिस्सेदारी भी 10% से कम रही।
महिलाओं में वेतन पर निर्भरता अधिक दिखाई दी। करीब 94% महिला प्रतिभागियों ने नौकरी को अपनी आय का मुख्य स्रोत बताया, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 89% था। लगभग 69% महिलाओं के पास आय का कोई दूसरा स्रोत नहीं था।
अगर किसी व्यक्ति की पूरी आर्थिक व्यवस्था एक ही नौकरी पर निर्भर है, तो नौकरी छूटने या वेतन रुकने की स्थिति में घर का बजट बिगड़ सकता है। ऐसे में आय के अतिरिक्त स्रोत और पर्याप्त इमरजेंसी फंड आर्थिक सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
62% लोगों को महंगाई की चिंता
62% लोगों का मानना है कि उनकी वेतन वृद्धि भविष्य की महंगाई के मुकाबले पर्याप्त नहीं है। 25 से 34 साल के आयु वर्ग में यह चिंता और अधिक है, जहां 70% लोगों ने कहा कि उनकी आय में बढ़ोतरी महंगाई की भरपाई नहीं कर पाएगी।
इसके अलावा, 82% प्रतिभागियों का मानना है कि उनके कौशल के हिसाब से उन्हें पर्याप्त वेतन नहीं मिलता। इसका असर बचत, निवेश और भविष्य की वित्तीय योजना पर पड़ सकता है।
परिवार की जिम्मेदारियां भी इस चुनौती को बढ़ाती हैं। सर्वे में 74% लोग कम से कम एक परिवार के सदस्य की आर्थिक मदद करते हैं, जबकि 32% अपने घर में अकेले कमाने वाले हैं।
इमरजेंसी फंड होने के बावजूद चिंता
करीब 84% लोगों के पास पूरा या आंशिक इमरजेंसी फंड मौजूद है। लेकिन 83% लोगों की बचत आय बंद होने पर एक साल से कम समय तक ही उनका खर्च चला सकती है।
इमरजेंसी फंड का उद्देश्य नौकरी छूटने, बीमारी या दूसरी अप्रत्याशित परिस्थितियों में जरूरी खर्चों को पूरा करना है। इसके लिए घर के मासिक खर्च, कर्ज की किस्तों और परिवार पर निर्भर लोगों की संख्या को ध्यान में रखना जरूरी है।
म्यूचुअल फंड में निवेश, लेकिन वित्तीय तैयारी अधूरी
सर्वे में शामिल 61% लोगों ने शेयर, क्रिप्टोकरेंसी या म्यूचुअल फंड जैसे बाजार से जुड़े निवेश साधनों में निवेश की जानकारी दी। इनमें 82% के पास म्यूचुअल फंड और 23% के पास सीधे शेयरों में निवेश था।
जीवन बीमा के मामले में 61% लोगों के पास 50 लाख से एक करोड़ रुपये तक का कवर था, जबकि 21% का जीवन बीमा कवर 20 लाख रुपये से कम था। स्वास्थ्य बीमा के मामले में करीब 60% लोगों के पास 25 लाख से 50 लाख रुपये तक का कवर था।
कुल मिलाकर, आर्थिक रूप से सुरक्षित महसूस करना और वास्तव में आर्थिक संकट का सामना करने के लिए तैयार होना दो अलग-अलग बातें हैं। नियमित बचत, पर्याप्त बीमा, इमरजेंसी फंड और रिटायरमेंट की योजना लंबे समय की वित्तीय मजबूती के लिए महत्वपूर्ण हैं।
