वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट: भारत के सबसे गरीब 10% लोगों की रोजाना कमाई 287 रुपये, अमीर देशों के गरीबों से भी कम
Yuva India: भारत में आर्थिक विकास के साथ गरीबी कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, लेकिन आमदनी के मामले में अमीर और गरीब लोगों के बीच बड़ा अंतर अब भी बना हुआ है। वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, भारत के सबसे कम आय वाले 10 प्रतिशत लोगों की रोजाना आय करीब 3 डॉलर यानी लगभग 287 रुपये बताई गई है। वहीं, भारत के सबसे अधिक आय वाले 10 प्रतिशत लोगों के लिए रोजाना आय का स्तर करीब 10 डॉलर यानी लगभग 956 रुपये बताया गया है।
इस तुलना से पता चलता है कि देश में कम आय वाले लोगों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए अभी भी लगातार प्रयासों की जरूरत है। रिपोर्ट में भारत की तुलना अमेरिका, कनाडा, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से भी की गई है। हालांकि, इन आंकड़ों को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि अंतरराष्ट्रीय गरीबी और आय संबंधी आंकड़े अलग-अलग देशों की कीमतों और क्रय शक्ति को ध्यान में रखकर तैयार किए जाते हैं। इन्हें सीधे-सीधे किसी व्यक्ति की वास्तविक वेतन पर्ची या हाथ में आने वाली कमाई नहीं माना जाना चाहिए।
भारत और अमीर देशों के गरीबों की आय में अंतर
रिपोर्ट में दी गई तुलना के अनुसार, भारत के सबसे कम आय वाले 10 प्रतिशत लोगों की रोजाना आय करीब 3 डॉलर बताई गई है। इसके मुकाबले अमेरिका में सबसे कम आय वाले 10 प्रतिशत लोगों के लिए यह आंकड़ा करीब 25 डॉलर, कनाडा में 31 डॉलर, जर्मनी में 28 डॉलर और ऑस्ट्रेलिया में 28 डॉलर बताया गया है।
दूसरी ओर, इन देशों के सबसे अधिक आय वाले 10 प्रतिशत लोगों की रोजाना आय भी भारत के शीर्ष 10 प्रतिशत आय वर्ग से काफी ज्यादा बताई गई है। इससे पता चलता है कि अलग-अलग देशों के बीच औसत जीवन स्तर, आमदनी और खरीदने की क्षमता में काफी अंतर हो सकता है।
हालांकि, केवल इन आंकड़ों के आधार पर किसी देश की पूरी आर्थिक स्थिति का आकलन नहीं किया जा सकता। इसके लिए रोजगार, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, सामाजिक सुरक्षा और जीवन-यापन की लागत जैसे पहलुओं को भी देखना जरूरी है।
12 साल में करोड़ों लोग गरीबी से बाहर आए
वर्ल्ड बैंक की अप्रैल 2026 की India Development Update रिपोर्ट के मुताबिक, 2011-12 से 2023-24 के बीच भारत में 4.20 डॉलर प्रतिदिन वाली निम्न-मध्यम आय वाले देशों की गरीबी सीमा के नीचे रहने वाले लोगों का अनुपात काफी कम हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में करीब 49.6 करोड़ लोग इस गरीबी सीमा से ऊपर आए।
वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों में इस गरीबी सीमा के तहत गरीबी का अनुपात 2011-12 में 57.7 प्रतिशत था, जो 2023-24 में घटकर 16.1 प्रतिशत रह गया। यह गिरावट देश में गरीबी कम करने की दिशा में हुई प्रगति को दर्शाती है।
यहां यह समझना भी जरूरी है कि 4.20 डॉलर प्रतिदिन की सीमा भारत की आधिकारिक घरेलू गरीबी रेखा नहीं है। यह वर्ल्ड बैंक की अंतरराष्ट्रीय तुलना के लिए इस्तेमाल की जाने वाली गरीबी सीमा है, जिसे 2021 की क्रय शक्ति समानता (PPP) के आधार पर तय किया गया है।
गांवों और शहरों में भी घटी गरीबी
रिपोर्ट में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में गरीबी कम होने की बात सामने आई है। ग्रामीण क्षेत्रों में अत्यधिक गरीबी का अनुपात 2012 के 31 प्रतिशत से घटकर 2024 में 3.1 प्रतिशत रह गया। वहीं, शहरी क्षेत्रों में यह अनुपात 17.4 प्रतिशत से घटकर 1.4 प्रतिशत बताया गया है।
इसके अलावा, प्रतिदिन 400 रुपये से कम आय वाली आबादी के अनुपात में भी गिरावट दर्ज की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 64.9 प्रतिशत से घटकर 19.3 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 39.7 प्रतिशत से घटकर 8.6 प्रतिशत बताया गया है।
आर्थिक प्रगति के साथ चुनौतियां भी बरकरार
गरीबी में आई कमी सकारात्मक संकेत है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि आर्थिक असमानता पूरी तरह समाप्त हो गई है। कम आय वाले परिवारों के लिए स्थायी रोजगार, बेहतर मजदूरी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और महंगाई से राहत अब भी महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
वर्ल्ड बैंक के आंकड़े बताते हैं कि भारत ने गरीबी कम करने में उल्लेखनीय प्रगति की है। अब चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि आर्थिक विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे और कम आय वाले परिवारों की जीवन गुणवत्ता में लगातार सुधार हो।

