Yuva India: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े बढ़ते खतरों और इसके दुरुपयोग को देखते हुए केंद्र सरकार अब सख्त कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी (IT) मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की है कि सरकार अगले एक महीने के भीतर AI के नियमन पर एक कंसल्टेशन पेपर (परामर्श पत्र) जारी करेगी।
IT मंत्री ने स्पष्ट किया कि AI नियमन का समय अब आ चुका है और इस पूरी प्रक्रिया में मानवता तथा सुरक्षा को सर्वोपरि रखा जाएगा।
दीपफेक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव पर मुख्य फोकस
दीपफेक का बढ़ता खतरा: आईटी मंत्री ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि दीपफेक की गुणवत्ता दिन-ब-दिन खतरनाक रूप से बेहतर हो रही है, जिससे लोगों को गलत व भ्रामक जानकारी देकर गुमराह किया जा रहा है।
मनोवैज्ञानिक असर: कंसल्टेशन पेपर में AI के मानसिक एवं मनोवैज्ञानिक प्रभावों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। विश्वभर में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहाँ AI ने उपयोगकर्ताओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया है।
उद्योग की होगी मुख्य जिम्मेदारी
सरकार का मानना है कि AI के जोखिमों को नियंत्रित करने में टेक कंपनियों और उद्योग जगत (Industry Stakeholders) की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी।
सोशल मीडिया पर लेबलिंग: पूर्व में यह प्रस्ताव भी रखा जा चुका है कि यूट्यूब, इंस्टाग्राम और ‘X’ जैसे प्लेटफॉर्म्स को AI द्वारा बनाए गए कंटेंट पर लगातार “AI Generated” लेबल दिखाना अनिवार्य किया जाना चाहिए।
एजेंटिक AI (Agentic AI) पर नजर: सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि स्वायत्त (Autonomous) AI सिस्टम को कितनी आजादी दी जाए और वे किस हद तक डेटा रिटेन/रीयूज़ कर सकते हैं।
साइबर फ्रॉड और दीपफेक पर पीएम मोदी ने वैश्विक ढांचे की मांग की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) में बोलते हुए साइबर अपराधों और दीपफेक से निपटने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय और वैश्विक ढांचे (Global Framework) की वकालत की।
सीमाओं से परे साइबर अपराध: पीएम मोदी ने चेतावनी दी कि साइबर फ्रॉड और साइबर क्राइम सीमाओं को नहीं मानते हैं। उन्होंने कहा, “प्रौद्योगिकी तभी व्यापक बनती है जब वह विश्वास हासिल करती है।”
वैश्विक सहयोग की जरूरत: प्रधानमंत्री ने सरकारों, टेक कंपनियों, टेलीकॉम ऑपरेटर्स और वित्तीय संस्थानों से अपील की कि वे ऐसे फ्रॉड के आम जनता तक पहुँचने से पहले ही रोकने का मजबूत तंत्र तैयार करें।

