Yuva India: डिप्रेशन (अवसाद) का कारण केवल मानसिक तनाव ही नहीं, बल्कि शरीर की आंतरिक घड़ी यानी बायोलॉजिकल क्लॉक का बिगड़ना भी हो सकता है। ‘ब्रिटिश जर्नल ऑफ साइकियाट्री’ में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार, मेजर डिप्रेशन से पीड़ित 11 हजार से अधिक लोगों में से करीब 25% मरीजों में ‘सर्केडियन डिप्रेशन’ पाया गया है।
साइंस डायरेक्ट और जॉन हॉप्किंस मेडिसिन में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक, डिप्रेशन और नींद के बीच का संबंध बेहद गहरा है। खराब नींद की वजह से डिप्रेशन हो सकता है और डिप्रेशन के कारण नींद से जुड़ी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
डिप्रेशन के प्रकार और नींद पर असर
अध्ययन में डिप्रेशन के अलग-अलग रूपों और उनसे जुड़ी नींद की आदतों के बारे में बताया गया है:
मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर: इस तरह के डिप्रेशन से पीड़ित 80% से 100% मरीजों को इन्सोमनिया यानी अनिद्रा की शिकायत होती है।
एटिपिकल डिप्रेशन: इस प्रकार के डिप्रेशन के मरीजों में हाइपरसोमनिया यानी बहुत ज्यादा सोना और दिन में लगातार नींद आने की आदत देखी जाती है।
सर्केडियन डिप्रेशन: यह सीधे तौर पर आंतरिक बॉडी क्लॉक यानी सर्केडियन रिदम से जुड़ा होता है। इसमें मौसम के बदलाव के साथ लक्षण बढ़ना (जैसे सर्दियों में समस्या बढ़ना), रातभर जागना और सोने के बाद भी अत्यधिक थकान बने रहना जैसी आदतें शामिल हैं।
डिस्टीमिया: इस स्थिति में लंबे समय तक ठीक से नींद न आना, नींद के बीच में बार-बार टूट जाना और सुबह बहुत जल्दी जागने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
बॉडी क्लॉक सुधारने के 5 असरदार तरीके
विशेषज्ञों के मुताबिक, अपनी दिनचर्या और बॉडी क्लॉक में सुधार करके डिप्रेशन के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है:
- जागने का समय तय करें: रोज लगभग एक ही समय पर उठने की आदत डालें, फिर चाहे छुट्टी का दिन ही क्यों न हो।
- सुबह की रोशनी लें: सुबह उठने के बाद कुछ समय प्राकृतिक रोशनी (धूप) में बिताएं।
- रात का स्क्रीन टाइम घटाएं: सोने से कम से कम कुछ देर पहले मोबाइल और तेज रोशनी वाली स्क्रीन से दूरी बना लें।
- नींद का रिकॉर्ड रखें: अपने सोने-जागने के निश्चित समय और अपने मूड में आ रहे बदलावों को नोट करें।
- विशेषज्ञ से सलाह लें: यदि आपको लगातार उदासी, अत्यधिक थकान या नींद के पैटर्न में अचानक बड़ा बदलाव महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
