Yuva India : मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले सप्ताह सुनवाई करेगा। याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के कुछ महत्वपूर्ण फैसले अन्य दो चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बिना लिए गए।
मामले की सुनवाई मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष हुई। अदालत ने मामले को अगले सप्ताह विस्तृत सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
याचिका में क्या आरोप लगाए गए हैं ?
याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि चुनाव आयोग के कुछ निर्णय चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की सहमति या मंजूरी के बिना लिए गए। याचिका में इन फैसलों की वैधता पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग की गई है।
यह जनहित याचिका पटना निवासी राकेश कुमार सिंह द्वारा दायर की गई है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ ?
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान मामले पर संज्ञान लिया और इसे अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया। अदालत अब याचिका में लगाए गए आरोपों और संबंधित पक्षों की दलीलों पर विचार करेगी।
हालांकि, अभी तक अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है और न ही किसी प्रकार का अंतरिम आदेश जारी किया है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज
इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं और आयोग की स्वतंत्रता को लेकर चिंता व्यक्त की है।
कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक में पार्टी नेताओं ने चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग को एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के रूप में कार्य करना चाहिए और उसकी निष्पक्षता पर किसी प्रकार का सवाल नहीं उठना चाहिए।
राहुल गांधी का बयान
बैठक के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का राजनीतिक विकल्प है। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
INDIA गठबंधन की बैठक
इस मुद्दे पर चर्चा के लिए INDIA गठबंधन की बैठक भी आयोजित की जा रही है, जिसमें चुनाव आयोग से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श होने की संभावना है।
