Yuva India: टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस में अंदरूनी घमासान और तेज हो गया है। टाटा ट्रस्ट्स में 66 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के पास याचिका दायर कर सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) के कामकाज की तुरंत जांच की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने ट्रस्ट के नए चेयरमैन नोएल टाटा की भूमिका और उनकी नियुक्ति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
4 प्रमुख मांगें और आपत्तियां
वेणु श्रीनिवासन ने चैरिटी कमिश्नर से चार मुख्य बिंदुओं पर हस्तक्षेप की मांग की है:
- कार्रवाई व निलंबन: संबंधित ट्रस्टियों के निलंबन या हटाने तक की कार्रवाई की जाए।
- वोटिंग पर रोक: टाटा संस के नॉमिनी से जुड़े फैसलों में नोएल टाटा की भागीदारी और वोटिंग पर तुरंत रोक लगाई जाए।
- नियुक्ति पर सवाल: नोएल टाटा के बेटे नेविल टाटा की नियुक्ति पर आपत्ति दर्ज कराई गई है।
- यथास्थिति बनी रहे: जांच पूरी होने तक सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के बोर्ड में कोई बदलाव न किया जाए।
बोर्ड का मौजूदा गणित
सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के बोर्ड में पावर बैलेंस दो हिस्सों में बंटा हुआ दिख रहा है:
नोएल टाटा के पक्ष में 4 डायरेक्टर: नोएल टाटा, नेविल टाटा, दरियस खंबाटा और भास्कर भट।
वेणु श्रीनिवासन के पक्ष में 2 डायरेक्टर: वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह।
RBI की लिस्टिंग और नियमों पर विवाद
टाटा संस की लिस्टिंग: नोएल टाटा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को टाटा संस की लिस्टिंग से बचाने/मनाने के प्रयास में जुटे हैं। इसके तहत दो अनलिस्टेड कंपनियों को टाटा संस में मिलाने का प्रस्ताव है, जिससे यह लिस्टिंग से बच सकती है।
प्रोटोकॉल पर कानूनी राय खारिज: ट्रस्ट ने पहले एक प्रोटोकॉल बनाया था कि नॉमिनी निदेशक ट्रस्टियों की सलाह पर वोट करें। हालांकि, पूर्व सॉलिसिटर जनरल रोहिंटन फली नरीमन ने इसे कंपनी अधिनियम 2013 और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का उल्लंघन बताया था।
आगे क्या?
मामले पर चैरिटी कमिश्नर की नजर बनी हुई है। चैरिटी कमिश्नर कार्यालय यह जांच कर रहा है कि क्या परोपकारी संस्था का कोई फैसला टाटा संस के कारोबारी फैसलों को प्रभावित करता है और क्या यह नियमों के खिलाफ है। इसके अलावा, महाराष्ट्र ट्रस्ट एक्ट 1950 के अनुपालन की भी पड़ताल की जा रही है।
