Yuva India: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने सोमवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि देश में शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और राजनीतिक विरोध प्रदर्शन होने चाहिए, लेकिन उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) को इनमें न घसीटा जाए और न ही अदालत परिसर को प्रदर्शन का स्थान बनाया जाए।
तीन जजों की पीठ (पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे) की अध्यक्षता करते हुए चीफ जस्टिस ने कहा, “लोकतांत्रिक गतिविधियां शांतिपूर्ण ढंग से होनी चाहिए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का कामकाज सुचारू रूप से चलता रहना चाहिए… हमें किसी राजनीतिक दल से कोई सरोकार नहीं है।”
कामकाज में न हो कोई बाधा
मुख्य न्यायाधीश ने वकीलों, अदालत के कर्मचारियों और मुकदमों से जुड़े आम नागरिकों की आवाजाही पर जोर देते हुए कहा:
“अदालत को किसी भी विवाद में नहीं घसीटा जाना चाहिए। विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण हों और वकीलों, कोर्ट स्टाफ या लिटिगेंट्स (याचिकाकर्ताओं) की आवाजाही में कोई रुकावट या बाधा नहीं आनी चाहिए। मैं यह अनुरोध कर रहा हूं।”
क्यों गरमाया मामला?
CEC विरोधी प्रदर्शन और मार्च: यह टिप्पणी उस समय आई जब चुनाव आयुक्त (CEC) विरोधी प्रदर्शनों के तहत विपक्षी नेताओं द्वारा सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करने की संभावना थी, जिसके चलते कोर्ट परिसर में भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया था।
SCBA की मौखिक अर्जी: सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप राय ने वकीलों की कथित गैर-कानूनी हिरासत और इंटरनेट निलंबन के खिलाफ अदालत के समक्ष बात रखी। उन्होंने कहा कि वकील अपना पेशेवर कर्तव्य निभा रहे हैं और अधिकारियों को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
सुरक्षा बल पर टिप्पणी: सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने भी पुलिस को कम से कम एक बार संयम बरतने की हिदायत देने की बात कही।
13 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश ने दोहराया कि बार के प्रत्येक सदस्य को निर्धारित स्थानों पर प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है, लेकिन शीर्ष अदालत के परिसर को प्रदर्शन का केंद्र नहीं बनने दिया जाएगा।
अदालत ने सभी याचिकाओं पर 13 अक्टूबर को सुनवाई करने पर सहमति जताई है।

