सड़क नहीं होने से शादी के दिन पैदल पहाड़ी रास्ता पार करने को मजबूर हुई शर्मिला, मुख्यमंत्री ने सड़क निर्माण के निर्देश दिए
Yuva India: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में सड़क संपर्क की कमी की समस्या एक बार फिर चर्चा में है। देहरादून जिले के चकराता क्षेत्र में एक दुल्हन को अपनी शादी के बाद ससुराल पहुंचने के लिए भारी लहंगे में करीब 18 किलोमीटर का दुर्गम रास्ता पैदल तय करना पड़ा। इस दौरान उसने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से अपने गांव तक सड़क बनवाने की अपील की। दुल्हन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आया। मुख्यमंत्री ने भी इस मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित विभाग को सड़क निर्माण के निर्देश दिए हैं।
कौन है 18 किलोमीटर पैदल चलने वाली दुल्हन?
दुल्हन का नाम शर्मिला है। उनका विवाह चकराता क्षेत्र के बुल्हाड़ गांव के रहने वाले शर्मिला और उदांवा गांव के अनिल चौहान से जुड़ा बताया गया है। शादी के बाद जब वह बारात के साथ ससुराल के लिए रवाना हुईं, तो वाहन से सफर का एक हिस्सा पूरा करने के बाद आगे मोटर मार्ग उपलब्ध नहीं था। इसके चलते उन्हें लोखंडी से उदांवा गांव तक पहाड़ी रास्ते पर पैदल चलना पड़ा।
शादी के भारी जोड़े और गहनों में इस तरह का सफर आसान नहीं था। शर्मिला को गृह प्रवेश के शुभ मुहूर्त तक ससुराल पहुंचने की चिंता थी। इसी कारण वह रास्ते में तेजी से चलती और कुछ हिस्सों में दौड़ती भी दिखाई दीं।
मुख्यमंत्री धामी से सड़क बनवाने की अपील
पैदल सफर के दौरान ग्रामीणों ने दुल्हन का वीडियो बनाया। इसमें शर्मिला उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से गांव तक सड़क बनवाने की अपील करती दिखाई देती हैं। उनका कहना है कि गांव में सड़क नहीं होने के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी होती है और भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े, इसके लिए सड़क बनना जरूरी है।
वीडियो सामने आने के बाद गांव की सड़क कनेक्टिविटी का मुद्दा फिर सुर्खियों में आ गया। मुख्यमंत्री की ओर से मामले का संज्ञान लेने और ग्रामीण निर्माण विभाग को सड़क निर्माण के निर्देश दिए जाने की खबर भी सामने आई है। हालांकि, सड़क निर्माण कब शुरू होगा और परियोजना कब तक पूरी होगी, यह संबंधित विभाग की आगे की कार्रवाई से स्पष्ट होगा।
सड़क नहीं होने से ग्रामीणों को कई परेशानियां
उत्तराखंड के कई पहाड़ी क्षेत्रों में दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सड़क निर्माण चुनौतीपूर्ण रहा है। सड़क संपर्क नहीं होने का असर केवल शादी-ब्याह जैसे आयोजनों पर नहीं पड़ता, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित होती है।
ग्रामीणों को बाजार, स्कूल, सरकारी कार्यालय और स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने में कठिनाई हो सकती है। विशेष रूप से बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार लोगों के लिए अस्पताल पहुंचना मुश्किल हो जाता है। आपात स्थिति में मरीज को सड़क तक पहुंचाने के लिए लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ सकती है।
ऐसे क्षेत्रों में सड़क संपर्क बेहतर होने से परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और स्थानीय रोजगार के अवसरों तक पहुंच आसान हो सकती है।
सड़क निर्माण की मांग ने फिर खींचा ध्यान
शर्मिला की यह यात्रा अब केवल एक शादी का अनोखा घटनाक्रम नहीं रह गई है। इसने पहाड़ी गांवों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों की उम्मीद है कि मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद उदांवा गांव तक सड़क पहुंचाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
फिलहाल सबसे अहम बात यह होगी कि सड़क निर्माण के निर्देश धरातल पर कब उतरते हैं। यदि गांव तक मोटर मार्ग बनता है, तो इससे स्थानीय लोगों को आवागमन में राहत मिल सकती है और भविष्य में शादी या अन्य जरूरी अवसरों पर लोगों को इस तरह की परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी।
