Yuva India: पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए जगतार सिंह हवारा ने अपनी बीमार मां से मिलने के लिए एक दिन की कस्टडी पैरोल पर सहमति दे दी है। कौमी इंसाफ मोर्चा की ओर से की गई अपील के बाद यह घटनाक्रम सामने आया है। हवारा की अपने पैतृक गांव हवारा में मां से मुलाकात रविवार को होने की संभावना है। हालांकि, इस मुलाकात के लिए औपचारिक आदेश जारी होना और तारीख को अंतिम रूप दिया जाना अभी बाकी है।
हवारा को सुरक्षा व्यवस्था के बीच अपनी मां से मिलने की अनुमति देने पर विचार किया जा रहा है। प्रस्तावित मुलाकात के दौरान सुरक्षा कर्मी उनके साथ रहेंगे। हवारा अपनी मां के साथ लगभग छह घंटे बिताएंगे। यात्रा में लगने वाला समय इस अवधि में शामिल नहीं होने की संभावना है।
मां की बिगड़ती सेहत को देखते हुए की गई अपील
कौमी इंसाफ मोर्चा से जुड़े अधिवक्ता जसपाल सिंह मंझपुर ने बताया कि हवारा ने अपने परिवार और संगठन के नेताओं की अपील के बाद एक दिन की मुलाकात के प्रस्ताव को स्वीकार किया है। संगठन के सदस्यों ने उनकी मां की बिगड़ती सेहत को लेकर चिंता जताई थी।
मंझपुर के अनुसार, यह सामान्य पैरोल नहीं, बल्कि हिरासत में सीमित अवधि के लिए मां से मुलाकात की व्यवस्था है। इसके तहत हवारा को करीब छह घंटे अपनी मां के साथ रहने का अवसर मिल सकता है। पूरी अवधि के दौरान सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी रहेगी।
इससे पहले हवारा ने कम अवधि की मुलाकात के लिए भी अनुरोध किया था। उनकी मांग थी कि उन्हें अन्य कैदियों को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं के समान शर्तों पर अपनी मां से मिलने दिया जाए।
मुख्यमंत्री भगवंत मान के प्रस्ताव पर नहीं बन पाई थी सहमति
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पहले हवारा को अपने पैतृक गांव जाकर मां से मिलने के लिए 10 दिन की पैरोल देने का सुझाव दिया था। हालांकि, सुरक्षा और अन्य तकनीकी मुद्दों के कारण इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका।
अब प्रशासन को हवारा को भटिंडा जेल से उनके गांव तक ले जाने और वापस लाने के लिए आवश्यक व्यवस्था करनी होगी। इसके साथ ही सुरक्षा संबंधी इंतजाम भी किए जाएंगे। मुलाकात की तारीख और अनुमति से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
इस मामले में एक दिन की कस्टडी पैरोल का प्रस्ताव इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे हवारा को अपनी बीमार मां से मिलने का अवसर मिल सकता है, जबकि सुरक्षा व्यवस्था भी बनाए रखी जाएगी।
बंदी सिंहों की रिहाई का मुद्दा भी उठा
हवारा की पैरोल का मामला सिख कैदियों की रिहाई और पैरोल से जुड़े व्यापक मुद्दे के बीच सामने आया है। कौमी इंसाफ मोर्चा लंबे समय से बंदी सिंहों की रिहाई और संबंधित मामलों के समाधान की मांग करता रहा है।
संगठन ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को ज्ञापन सौंपकर कई कैदियों से संबंधित लंबित मामलों को उठाया था। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि इन मामलों का समाधान कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत जल्द किया जाए।
प्रतिनिधिमंडल में गुरदीप सिंह भटिंडा, अधिवक्ता जसपाल सिंह मंझपुर, पाल सिंह फ्रांस और बलविंदर पाल सिंह सहित अन्य सदस्य शामिल थे। मुख्यमंत्री के साथ हुई बातचीत में सिख कैदियों की पैरोल, रिहाई और अन्य संबंधित मुद्दों पर चर्चा की गई।
अन्य सिख कैदियों के मामलों पर भी चर्चा
कौमी इंसाफ मोर्चा ने जगतार सिंह हवारा के अलावा परमजीत सिंह भेओरा और जगतार सिंह तारा के मामलों को भी उठाया। संगठन के अनुसार, इन कैदियों को लंबे समय से पैरोल नहीं मिली है। मोर्चा ने मांग की कि उनकी अर्जियों पर भी उचित कार्रवाई की जाए।
प्रतिनिधिमंडल ने बलवंत सिंह राजोआना का मामला भी उठाया। रिपोर्ट में कहा गया कि केंद्र सरकार द्वारा 2019 में गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के अवसर पर उनकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने की घोषणा का मुद्दा भी चर्चा में रहा। संगठन ने आरोप लगाया कि इस संबंध में बाद की आधिकारिक प्रक्रिया में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई।
कौमी इंसाफ मोर्चा का कहना है कि लंबे समय से लंबित मामलों को अनिश्चितकाल तक नहीं छोड़ा जाना चाहिए। संगठन ने संबंधित सरकारों और अधिकारियों से कानूनी विकल्पों के माध्यम से समाधान निकालने की मांग की है।
अब औपचारिक आदेश का इंतजार
जगतार सिंह हवारा की अपनी मां से प्रस्तावित मुलाकात को लेकर अब प्रशासनिक मंजूरी और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर है। यदि आवश्यक अनुमति जारी होती है, तो रविवार को उनकी मुलाकात संभव हो सकती है। फिलहाल मुलाकात की तारीख और औपचारिक आदेश को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।
