पीएम मोदी बोले- भारत अब दुनिया का ‘बैक ऑफिस’ ही नहीं, ‘ब्रेन ऑफिस’ भी; नवाचार और तकनीक में बढ़ रही ताकत
Yuva India: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत अब दुनिया के लिए केवल ‘बैक ऑफिस’ नहीं, बल्कि ‘ब्रेन ऑफिस’ के रूप में भी उभर रहा है। पहले दुनिया भारत की प्रतिभा और बड़े कार्यबल पर निर्भर रहती थी, लेकिन अब देश की तकनीकी क्षमता, नवाचार, स्टार्टअप और समस्या सुलझाने की योग्यता पर भी भरोसा बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने यह बात 22 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित एनडीटीवी वर्ल्ड समिट 2026 को संबोधित करते हुए कही।
पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और इसके साथ वैश्विक व्यवस्था में भी बदलाव की जरूरत है। उन्होंने डिजिटल तकनीक, स्टार्टअप, सेमीकंडक्टर, दवा निर्माण और घरेलू उत्पादन क्षमता को भारत की भविष्य की प्रगति के लिए अहम बताया। उनके मुताबिक, भारत अपनी क्षमताओं को मजबूत करके न केवल देश की जरूरतें पूरी करना चाहता है, बल्कि वैश्विक विकास में भी योगदान देना चाहता है।
बैक ऑफिस से ब्रेन ऑफिस बनने की ओर भारत
‘बैक ऑफिस’ शब्द का इस्तेमाल लंबे समय से भारत में होने वाले आउटसोर्सिंग कार्यों के लिए किया जाता रहा है। इनमें कॉल सेंटर, डेटा प्रोसेसिंग और विदेशी कंपनियों को दी जाने वाली विभिन्न सेवाएं शामिल हैं। अब भारत सॉफ्टवेयर विकास, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग, इंजीनियरिंग, डेटा एनालिटिक्स और नए उत्पादों के विकास जैसे क्षेत्रों में भी अपनी भूमिका बढ़ा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की पहचान अब केवल बड़े पैमाने पर काम करने वाले कार्यबल तक सीमित नहीं है। देश में तकनीकी समाधान तैयार करने और नई सोच के साथ समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता भी विकसित हो रही है। स्टार्टअप इकोसिस्टम और डिजिटल नवाचार इस बदलाव के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
आत्मनिर्भरता और घरेलू उत्पादन पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि सरकार की नीतियों और निवेश के पीछे यह सोच रहती है कि देश की किन क्षमताओं को मजबूत किया जाए, किन क्षेत्रों में दूसरे देशों पर निर्भरता कम की जाए और भविष्य के संकटों के लिए अभी से तैयारी कैसे की जाए।
दवा उद्योग का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि भारत तैयार दवाओं के बड़े उत्पादकों में शामिल है, लेकिन पहले दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कई कच्चे पदार्थों के लिए आयात पर निर्भरता रही है। अब देश में इनके घरेलू उत्पादन और आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
इस तरह की पहल का उद्देश्य केवल आयात घटाना नहीं, बल्कि वैश्विक आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भी जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखना है।
सेमीकंडक्टर और डिजिटल तकनीक में बढ़ती भूमिका
प्रधानमंत्री ने भारत के सेमीकंडक्टर और चिप डिजाइन क्षेत्र का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय इंजीनियर आधुनिक चिप डिजाइन करने में योगदान दे रहे हैं और देश के छात्र भी इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं।
डिजिटल भुगतान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हरित ऊर्जा और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों को भी उन्होंने भारत की बदलती तकनीकी क्षमता का उदाहरण बताया। डिजिटल सेवाओं के विस्तार से कारोबार, सरकारी सेवाओं और आम नागरिकों के बीच लेनदेन को आसान बनाने में मदद मिली है।
हालांकि, इन क्षेत्रों में भारत की दीर्घकालीन सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि शोध, कौशल विकास, बुनियादी ढांचे और तकनीकी निर्माण में निवेश कितना प्रभावी रहता है।
बदलती विश्व व्यवस्था पर भी जताई चिंता
पीएम मोदी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में बदलाव हो रहा है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र समेत कई वैश्विक संस्थाएं नई चुनौतियों के अनुरूप पर्याप्त तेजी से नहीं बदल पाई हैं। उन्होंने वैश्विक संस्थाओं में सुधार और ग्लोबल साउथ के देशों को अधिक प्रतिनिधित्व देने की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि व्यापार, तकनीक और समुद्री मार्ग, जो पहले देशों को जोड़ने में मदद करते थे, अब कई जगह भू-राजनीतिक तनाव और प्रतिस्पर्धा के केंद्र बन रहे हैं। ऐसे हालात में अंतरराष्ट्रीय सहयोग केवल सामान्य समय तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि संकट के दौरान भी प्रभावी होना चाहिए।
विकसित भारत का लक्ष्य और वैश्विक योगदान
प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लक्ष्य को देश के साथ-साथ दुनिया के भविष्य से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि भारत अपनी आर्थिक और तकनीकी क्षमता मजबूत करके वैश्विक समृद्धि में योगदान दे सकता है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की ओर से विभिन्न देशों को टीके और दवाएं उपलब्ध कराने का उदाहरण भी उन्होंने दिया।
कुल मिलाकर, पीएम मोदी का संदेश था कि भारत को केवल सेवाएं उपलब्ध कराने वाले देश के रूप में नहीं, बल्कि नवाचार, तकनीकी विकास और नए समाधान तैयार करने वाले केंद्र के रूप में आगे बढ़ना चाहिए। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए घरेलू उत्पादन, शोध, कौशल और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना अहम होगा।

