स्ट्रिंग थ्योरी और ब्लैक होल पर अहम शोध के लिए मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान, ऑस्कर क्लेन मेडल पाने वाले पहले भारतीय भौतिक विज्ञानी बने अशोक सेन
Yuva India: भारत के प्रख्यात सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी प्रोफेसर अशोक सेन को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित ऑस्कर क्लेन मेडल से सम्मानित किया गया है। वह यह सम्मान प्राप्त करने वाले पहले भारतीय भौतिक विज्ञानी बन गए हैं। उन्हें यह पुरस्कार स्ट्रिंग थ्योरी, ब्लैक होल की एंट्रॉपी और स्ट्रिंग फील्ड थ्योरी के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण शोध योगदान के लिए दिया गया है। उनकी उपलब्धि को भारतीय विज्ञान जगत के लिए बड़ी पहचान के रूप में देखा जा रहा है।
स्ट्रिंग थ्योरी में अहम योगदान के लिए मिला सम्मान
प्रोफेसर अशोक सेन आधुनिक सैद्धांतिक भौतिकी के प्रमुख वैज्ञानिकों में गिने जाते हैं। उनका शोध स्ट्रिंग थ्योरी को समझने और विकसित करने में महत्वपूर्ण रहा है। स्ट्रिंग थ्योरी एक सैद्धांतिक ढांचा है, जिसके माध्यम से वैज्ञानिक प्रकृति के मूलभूत कणों और बलों को एक व्यापक सिद्धांत के तहत समझने की कोशिश करते हैं।
इस सिद्धांत का एक प्रमुख उद्देश्य क्वांटम भौतिकी और गुरुत्वाकर्षण के बीच संबंधों को समझना है। वैज्ञानिकों के सामने लंबे समय से यह चुनौती रही है कि सूक्ष्म कणों की दुनिया को समझाने वाले क्वांटम सिद्धांत और बड़े खगोलीय पिंडों पर लागू होने वाले गुरुत्वाकर्षण को एक सुसंगत ढांचे में कैसे जोड़ा जाए।
अशोक सेन ने इस दिशा में कई महत्वपूर्ण सैद्धांतिक योगदान दिए हैं। उनके काम में एस-ड्यूलिटी, ब्लैक होल की एंट्रॉपी की सटीक गणना और स्ट्रिंग फील्ड थ्योरी से जुड़े शोध शामिल हैं। इन उपलब्धियों ने आधुनिक स्ट्रिंग थ्योरी के विकास को आगे बढ़ाने में मदद की है।
ब्लैक होल और गुरुत्वाकर्षण को समझने में मदद
अशोक सेन के शोध का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ब्लैक होल की एंट्रॉपी से संबंधित है। सामान्य रूप से एंट्रॉपी किसी भौतिक प्रणाली की सूक्ष्म अवस्थाओं और अव्यवस्था से जुड़ी अवधारणा है। ब्लैक होल के संदर्भ में इसकी गणना करना सैद्धांतिक भौतिकी की बड़ी चुनौतियों में से एक रहा है।
सेन के शोध ने स्ट्रिंग थ्योरी के माध्यम से कुछ प्रकार के ब्लैक होल की एंट्रॉपी की गणना को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इससे ब्लैक होल के गुणों और क्वांटम गुरुत्वाकर्षण से जुड़े सवालों पर वैज्ञानिकों की समझ मजबूत हुई है।
उनका काम केवल सैद्धांतिक भौतिकी तक सीमित नहीं है, बल्कि ब्रह्मांड की मूल संरचना, पदार्थ के घटकों और प्रकृति के नियमों को एकीकृत रूप में समझने के व्यापक वैज्ञानिक प्रयास से भी जुड़ा है।
बेंगलुरु के ICTS में प्रोफेसर हैं अशोक सेन
प्रोफेसर अशोक सेन बेंगलुरु स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर थियोरेटिकल साइंसेज (ICTS) में ICTS-इन्फोसिस माधव चेयर प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। यह संस्थान सैद्धांतिक विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में शोध को बढ़ावा देता है।
सेन ने कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज और कलकत्ता विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की। विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें पहले भी कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं। इनमें वर्ष 2012 का ब्रेकथ्रू प्राइज इन फंडामेंटल फिजिक्स और 2014 का डिराक मेडल शामिल हैं।
भारत सरकार ने भी उन्हें विज्ञान के क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मानित किया है। उन्हें वर्ष 2001 में पद्मश्री और 2013 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। वर्ष 1998 में उन्हें रॉयल सोसाइटी का फेलो भी चुना गया था।
क्या है ऑस्कर क्लेन मेडल ?
ऑस्कर क्लेन मेडल भौतिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वैज्ञानिकों को दिया जाने वाला प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मान है। इसकी शुरुआत 1988 में हुई थी। यह पुरस्कार स्टॉकहोम विश्वविद्यालय और रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज की नोबेल कमेटी फॉर फिजिक्स से जुड़े आयोजन के तहत प्रदान किया जाता है।
इस पदक का नाम स्वीडन के सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी ऑस्कर क्लेन के नाम पर रखा गया है। इससे पहले इस सम्मान से स्टीफन हॉकिंग, पीटर हिग्स, स्टीवन वाइनबर्ग और हांस बेथे जैसे प्रसिद्ध वैज्ञानिक सम्मानित हो चुके हैं। ऐसे वैज्ञानिकों की सूची में अशोक सेन का शामिल होना उनके शोध की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को दर्शाता है।
स्टॉकहोम में दिया व्याख्यान
ऑस्कर क्लेन मेडल के साथ अशोक सेन ने 22 अक्टूबर 2026 को स्टॉकहोम विश्वविद्यालय के अल्बानोवा सेंटर में 2026 का ऑस्कर क्लेन मेमोरियल लेक्चर भी दिया। उनके व्याख्यान का शीर्षक था, “ग्रैविटी फ्रॉम स्ट्रिंग्स एंड स्ट्रिंग्स फ्रॉम ग्रैविटी”। इसमें स्ट्रिंग थ्योरी, गुरुत्वाकर्षण और क्वांटम गुरुत्वाकर्षण से जुड़े सवालों पर चर्चा की गई।
अशोक सेन की यह उपलब्धि भारत के वैज्ञानिक शोध की वैश्विक पहचान को मजबूत करती है। उनका काम दिखाता है कि मौलिक विज्ञान में लंबे समय तक किया गया शोध ब्रह्मांड के सबसे जटिल सवालों को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
