इंडिगो की कमाई 26% बढ़ी, फिर भी 1,879 करोड़ रुपये का घाटा; महंगे ईंधन ने बिगाड़ा खेल
Yuva India: देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनियों में शामिल इंडिगो (IndiGo) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही यानी जुलाई से सितंबर 2026 के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी की परिचालन आय में सालाना आधार पर करीब 26 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इसके बावजूद एयरलाइन को 1,879 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा उठाना पड़ा। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी का घाटा 2,582 करोड़ रुपये था। यानी सालाना आधार पर घाटा करीब 27 प्रतिशत कम हुआ है, लेकिन कंपनी अब भी मुनाफे में वापसी नहीं कर पाई है।
इंडिगो की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन के नतीजों के मुताबिक, जुलाई-सितंबर तिमाही में परिचालन से आय बढ़कर 23,364 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले साल की समान अवधि में 18,555 करोड़ रुपये थी। वहीं, कंपनी का कुल खर्च बढ़कर 26,188 करोड़ रुपये पहुंच गया। महंगे विमान ईंधन और रुपये की कमजोरी ने कंपनी की कमाई पर दबाव बनाए रखा।
ईंधन खर्च में 67% की भारी बढ़ोतरी
इंडिगो के घाटे की सबसे बड़ी वजह विमान ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में बढ़ोतरी रही। जुलाई-सितंबर 2026 के दौरान कंपनी का ईंधन खर्च बढ़कर 9,967 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी अवधि में यह खर्च 5,962 करोड़ रुपये था। इस तरह ईंधन पर होने वाला खर्च करीब 67 प्रतिशत बढ़ गया।
कंपनी के कुल खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी भी बढ़कर करीब 38 प्रतिशत हो गई, जबकि पिछले साल यह लगभग 27 प्रतिशत थी। इसका मतलब है कि एयरलाइन की कमाई का बड़ा हिस्सा अब केवल विमान उड़ाने के ईंधन पर खर्च हो रहा है।
इसके अलावा रुपये की कमजोरी ने भी कंपनी की मुश्किलें बढ़ाईं। विमान लीज पर लेने, रखरखाव और दूसरे कई खर्च डॉलर में होते हैं। ऐसे में डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से एयरलाइन की लागत और बढ़ जाती है।
टिकट महंगे हुए, प्रति किलोमीटर कमाई 34% बढ़ी
कंपनी ने बढ़ती लागत का असर कम करने के लिए टिकटों से होने वाली कमाई बढ़ाने पर जोर दिया। इंडिगो की प्रति यात्री प्रति किलोमीटर औसत कमाई 34 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 6.30 रुपये हो गई। पिछले साल यह करीब 4.69 रुपये थी।
हालांकि, टिकट महंगे होने के बावजूद यात्रियों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई। जुलाई-सितंबर तिमाही में इंडिगो ने करीब 2.75 करोड़ यात्रियों को सफर कराया, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 4.7 प्रतिशत कम है।
वहीं, एयरलाइन की उपलब्ध सीट क्षमता में भी करीब 1 प्रतिशत की कमी आई और यह 40.8 अरब सीट-किलोमीटर रही। विमान की सीटें भरने की दर यानी लोड फैक्टर घटकर 80.3 प्रतिशत पर आ गया, जबकि पिछले साल यह 82.5 प्रतिशत था। इससे साफ है कि टिकट से प्रति यात्री कमाई बढ़ने के बावजूद विमानों में सीटें भरने की दर कमजोर हुई।
रुपये की कमजोरी से 1,155 करोड़ का अतिरिक्त असर
इंडिगो के वित्तीय नतीजों में विदेशी मुद्रा विनिमय दर का असर भी दिखाई दिया। कंपनी के मुताबिक, रुपये में कमजोरी के कारण उसके घाटे पर करीब 1,155 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रभाव पड़ा।
अगर विदेशी मुद्रा के उतार-चढ़ाव के प्रभाव को हटा दिया जाए, तो कंपनी का घाटा करीब 724 करोड़ रुपये रहता। इसके मुकाबले पिछले साल की समान तिमाही में विदेशी मुद्रा प्रभाव को हटाने के बाद कंपनी को करीब 104 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। इससे पता चलता है कि केवल रुपये की कमजोरी ही नहीं, बल्कि परिचालन लागत और दूसरी चुनौतियां भी कंपनी पर दबाव बना रही हैं।
कंपनी के पास 52,685 करोड़ रुपये का कैश
घाटे के बावजूद इंडिगो की वित्तीय स्थिति में कुछ मजबूत पक्ष भी हैं। कंपनी के पास कुल 52,685 करोड़ रुपये की नकदी उपलब्ध थी। इसमें करीब 39,929 करोड़ रुपये फ्री कैश के रूप में बताए गए हैं। कंपनी पर कुल कर्ज करीब 87,303 करोड़ रुपये है।
सितंबर 2026 के अंत तक इंडिगो के बेड़े में 442 विमान शामिल थे। वहीं, समय पर उड़ान संचालन यानी ऑन-टाइम परफॉर्मेंस करीब 91.3 प्रतिशत रहा। यह आंकड़ा बताता है कि बढ़ती लागत और वित्तीय दबाव के बीच भी कंपनी ने अपने परिचालन को बनाए रखने की कोशिश की है।
आगे भी एयरलाइन के सामने चुनौतियां
इंडिगो के लिए आने वाली तिमाहियों में ईंधन की कीमतें, रुपये की विनिमय दर और यात्रियों की मांग अहम रहने वाली हैं। कंपनी ने टिकट से होने वाली कमाई बढ़ाने और क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करने की रणनीति अपनाई है। लेकिन अगर ईंधन महंगा बना रहता है और डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है, तो लागत पर दबाव जारी रह सकता है।
कुल मिलाकर, इंडिगो की दूसरी तिमाही में कमाई बढ़ी और पिछले साल के मुकाबले घाटा कम हुआ, लेकिन कंपनी को अभी मुनाफे में लौटने के लिए लंबा रास्ता तय करना है।
