Yuva India: दक्षिण-पश्चिम मानसून की समय से पहले वापसी और ‘एल नीनो’ (El Niño) के लगातार मजबूत होने के कारण देश में सूखे का संकट गहराता जा रहा है। मौसम में आए इस बड़े बदलाव और कम बारिश के कारण रबी (शीतकालीन) फसलों के उत्पादन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। पैदावार और कृषि चुनौतियों पर चर्चा के लिए कृषि मंत्रालय ने दो दिवसीय आपातकालीन उच्च स्तरीय बैठक (ब्रेनस्टॉर्मिंग सेशन) बुलाई है।
52.5% हिस्सा सूखे जैसी स्थिति की चपेट में
‘आईआईटी गांधीनगर’ के इंडिया ड्रॉट मॉनिटर (India Drought Monitor) की रिपोर्ट के अनुसार, 16 सितंबर तक देश का लगभग 52.5 प्रतिशत भूभाग सूखा या सूखे जैसी परिस्थितियों से प्रभावित है। एक महीने पहले यह आंकड़ा 38.9 प्रतिशत था, जो इस बात का प्रमाण है कि संकट बेहद तेजी से बढ़ा है। रिपोर्ट में विशेष रूप से भारत के पश्चिमी और दक्षिणी क्षेत्रों में गंभीर स्थिति की चेतावनी दी गई है, जहाँ क्रमशः 79% और 67% हिस्सा सूखे या पानी की कमी से जूझ रहा है।
मानसूनी बारिश में 15 फीसदी की गिरावट
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक:
- 1 जून से 22 सितंबर के बीच देश में औसतन 9 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य आंकड़ा 832.4 मिमी होना चाहिए था। यह सामान्य से 15 प्रतिशत कम है।
- देश का लगभग 41 फीसदी क्षेत्रफल इस सीजन में सामान्य से कम मानसूनी बारिश दर्ज कर चुका है।
- मेघालय, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, गोवा, कर्नाटक, केरल, असम, तमिलनाडु, हरियाणा और तेलंगाना जैसे राज्यों में बारिश का बड़ा घाटा देखा गया है।
चावल उत्पादन घटने की संभावना
निजी मौसम एजेंसी ‘स्काईमेट’ (Skymet) ने भारत के मानसूनी अनुमान को घटाकर दीर्घकालिक औसत (LPA) का 85 प्रतिशत कर दिया है, जिससे देश में सूखे की संभावना 70 प्रतिशत तक पहुँच गई है।
मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार चावल के उत्पादन में 6.5 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। पिछले साल देश में रिकॉर्ड 15.4 करोड़ टन चावल का उत्पादन हुआ था। यह गिरावट भारत को वर्ष 2009-10 (एल नीनो से प्रभावित वर्ष) के बाद के सबसे निचले उत्पादन स्तर पर ला सकती है।
एल नीनो का प्रभाव और आईएमडी की चेतावनी
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान असामान्य रूप से गर्म होने (एल नीनो) के कारण भारतीय मानसून कमजोर हुआ है।
IMD के विश्लेषण के अनुसार, 13 अगस्त से 9 सितंबर के बीच 218 जिलों में मध्यम से गंभीर सूखे जैसी स्थितियाँ देखी गईं। हालांकि, आईएमडी ने स्पष्ट किया है कि केवल बारिश का तनाव ही अंतिम पैमाना नहीं है, जलाशय के जलस्तर और भूजल की वास्तविक स्थिति का आकलन भी महत्वपूर्ण होगा।
