Yuva India: 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के तीन बागी विधायकों—सनाउर से हरमीत सिंह पठणमाजरा, समाना से पूर्व मंत्री चेतन सिंह जोड़ामाजरा और अमृतसर नॉर्थ से पूर्व आईपीएस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह—ने नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव व पंजाब प्रभारी सतीश पूनिया और पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवाल सिंह ढिल्लों की मौजूदगी में इन नेताओं ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।
इस्तीफे और दल-बदल की वजह
हरमीत सिंह पठणमाजरा और चेतन सिंह जोड़ामाजरा: दोनों नेताओं ने रविवार को AAP की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया था। इनका इस्तीफा AAP द्वारा 2027 चुनावों के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करने के तुरंत बाद आया, जिसमें सनाउर और समाना सीटों को शामिल नहीं किया गया था।
कुंवर विजय प्रताप सिंह: पूर्व आईपीएस अधिकारी और अमृतसर नॉर्थ से विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह ने सोमवार को पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां को अपना इस्तीफा सौंपा। वह जून 2025 से ही पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित चल रहे थे।
मान सरकार पर तीखे हमले
- भाजपा में शामिल होने के बाद तीनों नेताओं ने भगवंत मान नीत AAP सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
- पठणमाजरा ने आरोप लगाया कि राज्य पर ₹2.5 लाख करोड़ से अधिक का कर्ज हो चुका है और सरकार नशा माफिया व कानून-व्यवस्था पर लगाम लगाने में पूरी तरह विफल रही है।
- जोड़ामाजरा ने पिछले पांच वर्षों में राज्य की स्थिति बिगड़ने की बात कही।
- कुंवर विजय प्रताप सिंह ने AAP में अपने 5 साल के कार्यकाल को “इंटरर्नशिप अवधि” करार दिया और कहा कि पंजाब को विकास और शांति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘डबल इंजन सरकार’ की सख्त जरूरत है।
विधानसभा अध्यक्ष ने मंजूर किए इस्तीफे
AAP द्वारा दलबदल विरोधी कानून के तहत सदस्यता रद्द करने की याचिका दायर करने के कुछ ही घंटों बाद स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने कुंवर विजय प्रताप सिंह और हरमीत सिंह पठणमाजरा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए। वहीं, जोड़ामाजरा के इस्तीफे पर कानूनी प्रक्रिया जारी है।
AAP की प्रतिक्रिया
आम आदमी पार्टी के राज्य अध्यक्ष अमन अरोड़ा और मुख्य प्रवक्ता नील गर्ग ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा के पास पंजाब में न तो नेतृत्व है और न ही राजनीतिक जनाधार। AAP प्रवक्ताओं ने दावा किया कि जनता के साथ धोखा करने वाले या पार्टी से निलंबित नेताओं के जाने से AAP के वोट बैंक और समर्थन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
