इस साल 4,526 भारतीय नागरिकों को कनाडा से निकाला, कुल कार्रवाई में 27% से ज्यादा हिस्सेदारी
Yuva India: कनाडा में आव्रजन नियमों के उल्लंघन और देश में रहने की पात्रता नहीं रखने वाले विदेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई तेज होती दिखाई दे रही है। कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी (CBSA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 30 सितंबर 2026 तक 4,526 भारतीय नागरिकों को कनाडा से हटाया जा चुका है। इस अवधि में देश से बाहर किए गए कुल विदेशी नागरिकों की संख्या 16,426 रही। यानी कुल कार्रवाई में भारतीय नागरिकों की हिस्सेदारी 27 प्रतिशत से अधिक है।
2020 के बाद यह पहली बार है जब कनाडा से हटाए गए विदेशी नागरिकों में किसी एक देश के नागरिकों की संख्या के मामले में भारतीय सबसे आगे हैं। CBSA के आंकड़ों में भारत के बाद मैक्सिको के 2,547 नागरिकों को हटाया गया है।
2020 के बाद पहली बार भारतीय नागरिक सबसे आगे
CBSA के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2020 में कनाडा से कुल 12,858 विदेशी नागरिकों को हटाया गया था। इनमें 1,424 भारतीय नागरिक शामिल थे। इसके बाद 2021 से 2025 तक मैक्सिको के नागरिकों की संख्या इस सूची में सबसे अधिक रही।
वर्ष 2025 में कनाडा से 23,160 लोगों को हटाया गया था। इनमें मैक्सिको के 4,837 और भारत के 3,779 नागरिक शामिल थे। वहीं, 2024 में 2,004 भारतीय नागरिकों को हटाया गया था। इस तरह 2026 के पहले नौ महीनों में भारतीय नागरिकों का आंकड़ा पिछले पूरे वर्ष के आंकड़े से भी आगे निकल गया है।
11,393 भारतीयों के मामले रिमूवल प्रक्रिया में
CBSA की रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण आंकड़ा सामने आया है। 30 सितंबर 2026 तक एजेंसी की ‘रिमूवल-इन-प्रोग्रेस’ सूची में कुल 52,457 मामले दर्ज थे। इनमें 11,393 मामले भारतीय नागरिकों से संबंधित थे। इस सूची में मैक्सिको के 6,182 नागरिक दूसरे स्थान पर थे।
हालांकि, इस आंकड़े का अर्थ यह नहीं है कि इन सभी लोगों को निश्चित रूप से कनाडा से निकाल दिया जाएगा। यह उन मामलों की सूची है जिनमें हटाने की प्रक्रिया चल रही है। कुछ मामलों में कानूनी प्रक्रिया, शरणार्थी आवेदन या अन्य कारणों से कार्रवाई की स्थिति बदल सकती है। CBSA के अनुसार, किसी व्यक्ति की स्थिति समय के साथ बदल सकती है और अलग-अलग प्रशासनिक सूचियों में उसका रिकॉर्ड आ सकता है।
कनाडा में कितने तरह के होते हैं रिमूवल ऑर्डर?
कनाडा के आव्रजन कानून के तहत मुख्य रूप से तीन प्रकार के Removal Orders जारी किए जा सकते हैं। इनके नियम और प्रभाव अलग-अलग होते हैं।
1. Departure Order: इस आदेश के तहत व्यक्ति को आदेश लागू होने के 30 दिनों के भीतर कनाडा छोड़ना होता है। तय शर्तों का पालन नहीं करने पर यह आदेश स्वतः Deportation Order में बदल सकता है।
2. Exclusion Order: इसके तहत व्यक्ति को आमतौर पर एक साल तक कनाडा में दोबारा प्रवेश की अनुमति नहीं होती, जब तक वह आवश्यक लिखित अनुमति हासिल न कर ले। यदि आदेश गलत जानकारी देने या धोखाधड़ी (Misrepresentation) के कारण जारी हुआ है, तो प्रतिबंध की अवधि पांच साल हो सकती है।
3. Deportation Order: यह सबसे गंभीर आदेश है। इसके तहत व्यक्ति को कनाडा में दोबारा प्रवेश करने के लिए विशेष लिखित अनुमति लेनी पड़ती है। इसे स्थायी प्रतिबंध कहा जाता है, लेकिन संबंधित अनुमति मिलने पर वापसी का रास्ता संभव हो सकता है।
CBSA ने क्या कहा?
CBSA का कहना है कि जिन विदेशी नागरिकों को कनाडा में प्रवेश करने या वहां रहने का कानूनी अधिकार नहीं है, उन्हें हटाना देश की आव्रजन व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जरूरी है। एजेंसी के अनुसार, कानून के तहत की जाने वाली कार्रवाई उन लोगों के प्रति निष्पक्षता सुनिश्चित करने का हिस्सा है, जो निर्धारित नियमों का पालन करके कनाडा आते हैं।
भारतीय नागरिकों के लिए क्या है संकेत?
इन आंकड़ों के बीच कनाडा में पढ़ाई, नौकरी या अन्य उद्देश्यों से रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए अपने वीजा और आव्रजन दस्तावेजों की शर्तों का पालन करना महत्वपूर्ण है। स्टडी परमिट, वर्क परमिट या वीजा की अवधि समाप्त होने, अनुमति से बाहर काम करने अथवा आवेदन में गलत जानकारी देने जैसी स्थितियां आव्रजन संबंधी परेशानी पैदा कर सकती हैं।
हालांकि, केवल भारतीय नागरिक होने के आधार पर किसी व्यक्ति को देश से नहीं निकाला जाता। प्रत्येक मामले में संबंधित व्यक्ति की कानूनी स्थिति और परिस्थितियों के आधार पर कार्रवाई होती है। इसलिए कनाडा में रहने वाले भारतीयों को अपने दस्तावेजों और परमिट की शर्तों की नियमित जांच करनी चाहिए।
