Yuva India: सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली के त्योहार पर दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में कुछ शर्तों के साथ प्रमाणित ग्रीन क्रैकर्स (हरित पटाखों) के इस्तेमाल की अनुमति दे दी है। अदालत ने अपने 23 पन्नों के आदेश में स्पष्ट किया कि दिवाली पर पटाखे फोड़ना एक “धार्मिक प्रथा” है, लेकिन इसे अनियंत्रित छोड़ देने से पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर भारी असर पड़ता है।
प्रमुख बिंदु और शर्तें:
समय सीमा: दिल्ली-एनसीआर में नवंबर 7 और 8 को सुबह 6 बजे से 7 बजे तक और रात 8 बजे से 10 बजे तक ही प्रमाणित ग्रीन क्रैकर्स जलाने की अनुमति होगी।
नो-क्रैकर जोन: अस्पतालों, नर्सिंग होम, प्राथमिक और जिला स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों और किसी भी अधिसूचित शांत क्षेत्रों (Silence Zones) के 300 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार के पटाखे फोड़ने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।
लड़ियों और श्रृंखलाओं पर रोक: पटाखों की लड़ियों और श्रृंखलाओं (Series and Garlands) के निर्माण, बिक्री या फोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
शैक्षणिक संस्थान: यही प्रतिबंध शैक्षणिक संस्थानों पर भी लागू होंगे।
अदालत की टिप्पणियां:
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने कहा कि दिवाली का जश्न मनाना लोगों के बीच एक सकारात्मक माहौल, आशा और कल्याण की भावना पैदा करता है। हालांकि, पीठ ने यह भी तर्क दिया कि पर्यावरण को खराब होने देना, जिससे सभी जीवों के स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा हो, उत्सव के मूल उद्देश्य को ही विफल कर देता है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि अनियंत्रित रूप से पटाखों का उपयोग प्रदूषण के स्तर में भारी वृद्धि का कारण बनता है।
