Yuva India: दिल्ली की सड़कों पर अक्सर लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा लागू किए जाने वाले इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) से बहुत बड़ी राहत मिलने की संभावना कम है। हाल ही में हुए एक सिमुलेशन अध्ययन (Simulation Study) में सामने आया है कि इस AI-संचालित (Artificial Intelligence) प्रणाली से शहर के सबसे व्यस्त मार्गों पर केवल मामूली या मामूली राहत ही मिलेगी।
24 महीनों में तीन चरणों में लागू होगा सिस्टम
दिल्ली पुलिस इस AI-आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को अगले 24 महीनों में तीन चरणों में लागू करने जा रही है। पहले चरण में इसे दिल्ली के 42 प्रमुख कॉरिडोरों पर लागू किया जाएगा।
रिंग रोड और आउटर रिंग रोड का क्या होगा हाल?
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस द्वारा किए गए सिमुलेशन अध्ययन के अनुसार:
48 किलोमीटर लंबे रिंग रोड पर: यात्रा के समय और जाम में होने वाली देरी में केवल 10% की कमी आने का अनुमान है।
26.5 किलोमीटर लंबे आउटर रिंग रोड पर: जाम के कारण होने वाली देरी में लगभग 30% की गिरावट और कुल यात्रा समय (Travel Time) में 20% से अधिक की बचत हो सकती है।
क्या होता है ‘डिले टाइम‘ और ‘ट्रैवल टाइम‘?
अध्ययन में स्पष्ट किया गया है कि:
डिले टाइम (Delay Time): वह समय है जो वाहन चालक ट्रैफिक जाम में फंसकर बिताते हैं।
ट्रैवल टाइम (Travel Time): पूरी यात्रा को पूरा करने में लगने वाला कुल समय है।
विशेषज्ञों का मानना है कि राजधानी की सड़कों पर अत्यधिक वाहनों के दबाव को देखते हुए केवल तकनीकी बदलावों से पूरा जाम खत्म होना मुश्किल है, हालांकि यह व्यवस्था यातायात को सुगम बनाने में कुछ हद तक मदद जरूर करेगी।
