AISA-CJP में मुद्दों पर साथ, लेकिन गठबंधन अभी एजेंडे तक सीमित: नेहा बोरा
Yuva India: ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने कहा है कि AISA और कॉक जनता पार्टी (CJP) अलग-अलग विचारधारा और राजनीतिक दृष्टिकोण वाले संगठन हैं, लेकिन साझा मुद्दों पर दोनों के बीच समन्वय की गुंजाइश बनी हुई है। उन्होंने कहा कि दोनों संगठनों के बीच किसी व्यापक गठबंधन की बात अभी कहना जल्दबाजी होगी और सहयोग मुख्य रूप से साझा एजेंडे के आधार पर होता है।
उन्होंने 10 अक्टूबर को प्रस्तावित सामूहिक विरोध प्रदर्शन, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग समेत कई मुद्दों पर बात की।
AISA और CJP की विचारधारा अलग
नेहा बोरा ने कहा कि AISA और CJP दो अलग तरह के संगठन हैं और दोनों की विचारधारा एक जैसी नहीं है। उनके मुताबिक AISA स्पष्ट रूप से वामपंथी और रेडिकल-लेफ्ट छात्र आंदोलन से जुड़ा संगठन है, जबकि CJP की अपनी अलग राजनीतिक पहचान है।
उन्होंने कहा कि दोनों के बीच एजेंडा आधारित समन्वय होता है। साझा मुद्दों पर दोनों संगठन एक साथ काम कर सकते हैं, लेकिन इसे स्थायी राजनीतिक गठबंधन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
साझा मुद्दों पर मिलकर काम करने की संभावना
नेहा बोरा के अनुसार, दोनों संगठनों के बीच कामकाजी संबंध हैं, क्योंकि उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबे समय तक चलने वाले आंदोलनों के दौरान एक-दूसरे के साथ काम किया है।
उन्होंने बताया कि 2 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन के लिए भी CJP से संपर्क किया गया था। चूंकि CJP ने मुंबई में प्रदर्शन का आह्वान किया था, इसलिए मुंबई नहीं जा पाने वाले लोगों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की गई।
उन्होंने कहा कि NSUI और इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) जैसे अन्य संगठनों के साथ भी साझा मुद्दों पर साथ आने की संभावना है। जरूरत पड़ने पर बड़े आंदोलन के लिए मध्यस्थ या सहयोगी की भूमिका निभाने के लिए AISA तैयार है।
10 अक्टूबर के प्रदर्शन का क्या है उद्देश्य ?
नेहा बोरा ने कहा कि 10 अक्टूबर के प्रदर्शन का उद्देश्य उन सभी मुद्दों को फिर से उठाना है, जिन्हें सरकार की ओर से नजरअंदाज किया गया है। इसकी शुरुआत जंतर-मंतर से होगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर कागजों पर निर्धारित प्रदर्शन स्थल है, लेकिन आम लोगों के लिए इसे पूरी तरह सुलभ नहीं रहने दिया गया है। उनका कहना है कि जब चुनावी प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल उठ रहे हों, तब जनता को विरोध दर्ज कराने का अधिकार मिलना चाहिए।
ओखला, जामिया नगर और मंगोलपुरी तक पहुंचने की तैयारी
उन्होंने कहा कि आंदोलन को केवल जंतर-मंतर तक सीमित रखने के बजाय ओखला, जामिया नगर और मंगोलपुरी जैसे इलाकों तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की आशंका या शिकायतें सामने आई हैं।
AISA का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव के मुद्दे का असर गरीब और कामकाजी वर्ग के लोगों पर भी पड़ सकता है।
बैरिकेडिंग के बीच लोगों को जुटाना बड़ी चुनौती
नेहा बोरा ने माना कि प्रदर्शन वाले इलाकों में बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था के कारण लोगों को जुटाना आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में आम लोग ऐसे हैं, जिनके नाम प्रभावित हुए हैं और जो इस मुद्दे से सीधे जुड़े हैं।
उन्होंने कहा कि संगठन अगले कुछ दिनों में 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के लिए लोगों को जुटाने और जागरूक करने के कार्यक्रम आयोजित करेगा।
‘सरकार डर पैदा करती है तो जवाब भी देना होगा’
नई पीढ़ी के सरकार और गंभीर मुद्दों को हास्य एवं ट्रेंड के माध्यम से देखने के सवाल पर नेहा बोरा ने कहा कि जब सरकार डर का माहौल बनाने की कोशिश करती है और पुलिस या न्यायपालिका कानून के पक्ष में मजबूती से खड़ी नहीं होती, तो नागरिकों के पास विरोध दर्ज कराने के अलावा क्या विकल्प बचता है।
उन्होंने कहा कि ऐसे समय में लोग अपने घरों में चुप बैठकर नहीं रह सकते। इसी वजह से आंदोलन में हास्य और व्यंग्य का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

