Yuva India: भारतीय तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने क्रिकेट में अपनी वापसी के लिए फिटनेस और अनुशासन पर जबरदस्त मेहनत की है। 36 साल की उम्र में उन्होंने उस स्विंग को दोबारा हासिल करने के लिए कई त्याग किए, जो कभी उनकी गेंदबाजी की सबसे बड़ी पहचान हुआ करती थी।
2022 के बाद राष्ट्रीय टीम से बाहर होने के बाद भुवनेश्वर ने अपनी फिटनेस पर विशेष ध्यान दिया। फिजियो रामनीश वोहरा के साथ उन्होंने लंबे समय तक काम किया और अपनी गेंदबाजी में पहले जैसी लय और स्विंग वापस लाने पर फोकस किया।
‘मैं फिर वैसा बनना चाहता था’
भुवनेश्वर ने अपने फिजियो से कहा था कि वह फिर से उसी तरह गेंदबाजी करना चाहते हैं जैसे अपने करियर के बेहतरीन दौर में करते थे। इसके बाद उनकी फिटनेस और गेंदबाजी क्षमता पर लगातार काम शुरू हुआ।
रामनीश वोहरा के मुताबिक भुवनेश्वर के लिए सबसे बड़ी चुनौती उनकी स्विंगिंग क्षमता को वापस हासिल करना थी। उन्होंने शुरुआत में गेंदबाजी की क्षमता बढ़ाने के बजाय शरीर को मजबूत करने, फंक्शनल एक्टिविटीज और लंबे समय तक मैच खेलने की क्षमता विकसित करने पर ध्यान दिया।
डाइट में किए बड़े बदलाव
भुवनेश्वर ने अपनी फिटनेस के लिए डाइट में भी बड़े बदलाव किए। उन्होंने करीब छह साल से शुगर, ग्लूटेन और लैक्टोज से दूरी बनाई हुई है।
उनकी मेहनत का असर शरीर पर भी साफ दिखाई दिया। पहले उनका वजन करीब 80 किलो था और शरीर में फैट 22-25% के आसपास था। बाद में उन्होंने वजन करीब 75 किलो किया और बॉडी फैट को लगभग 16% तक लाने में सफलता हासिल की।
उनके फिजियो का कहना है कि भुवनेश्वर ने अपनी उम्र के बावजूद खुद को इस तरह तैयार किया कि वह युवा खिलाड़ियों के साथ भी फिटनेस के मामले में प्रतिस्पर्धा कर सकें।
2022 के बाद शुरू हुआ कठिन दौर
भुवनेश्वर के करियर में 2022 के बाद मुश्किल दौर आया। न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 विश्व कप सेमीफाइनल में भारत की हार के बाद वह राष्ट्रीय टीम के नियमित सेटअप से बाहर हो गए।
इसके बाद उन्होंने क्रिकेट से दूरी बनाने के बजाय अपनी कमियों पर काम करना शुरू किया। फिजियो के मुताबिक भुवनेश्वर ने फिटनेस के लिए लगातार मेहनत की और अपनी गेंदबाजी में पहले जैसी स्विंग वापस लाने को प्राथमिकता दी।
IPL में भी दिखा मेहनत का असर
भुवनेश्वर की वापसी में IPL ने अहम भूमिका निभाई। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के लिए शानदार प्रदर्शन किया और एक मैच में 9 रन देकर 4 विकेट लेने सहित महत्वपूर्ण स्पेल किए।
उनकी वापसी का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि वह अब भी भारतीय तेज गेंदबाजों में टी20 क्रिकेट के सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों में शामिल हैं।
भुवनेश्वर के आंकड़े चर्चा में
· 37: एक कैलेंडर वर्ष में भुवनेश्वर के टी20 विकेट
· 45: 2025 के बाद IPL में उनके विकेट
· 105: टी20 मैचों की संख्या, जिन्हें वह राष्ट्रीय टीम से बाहर रहने के दौरान मिस कर चुके थे
· 363: भारतीय तेज गेंदबाजों में टी20 क्रिकेट के कुल विकेटों के मामले में उनका आंकड़ा
‘उन्होंने कभी ज्यादा पैसा नहीं मांगा’
भुवनेश्वर के फिजियो रामनीश वोहरा ने बताया कि गेंदबाज का लक्ष्य कभी सिर्फ पैसा या अधिक मैच खेलना नहीं रहा। वह हमेशा अपनी गेंदबाजी क्षमता को बेहतर करने पर ध्यान देते रहे।
उन्होंने कहा कि भुवनेश्वर ने सामाजिक गतिविधियों से दूरी बनाए रखी और अपना अधिकांश समय ट्रेनिंग, फिटनेस और क्रिकेट को दिया।
36 की उम्र में भी स्विंग पर भरोसा
भुवनेश्वर की सबसे बड़ी ताकत उनकी गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की क्षमता रही है। उम्र बढ़ने के साथ उनकी गति में कुछ बदलाव जरूर आया, लेकिन उन्होंने अपनी स्विंग और गेंद पर नियंत्रण को फिर से मजबूत करने पर काम किया।
अब उनका लक्ष्य सिर्फ वापसी करना नहीं, बल्कि उसी स्तर की गेंदबाजी करना है जिसके लिए वह अपने करियर के शुरुआती वर्षों में पहचाने जाते थे।
भुवनेश्वर की कहानी बताती है कि अनुभव, अनुशासन और लगातार मेहनत के दम पर खिलाड़ी उम्र के इस पड़ाव पर भी अपने खेल को नए सिरे से निखार सकता है।

