Yuva India: केंद्र सरकार जीएसटी प्रशासन को सरल बनाने और करदाताओं को बड़ी राहत देने के लिए बड़े सुधारों की तैयारी कर रही है। ‘जीएसटी सुधार 2.0’ (GST Reform 2.0) के तहत अधिकारियों से गिरफ्तारी की शक्ति वापस लेने और गिरफ्तारी के लिए कोर्ट के आदेश को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। आगामी 7 अक्टूबर को होने वाली जीएसटी परिषद (GST Council) की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लग सकती है।
मुख्य बिंदु
गिरफ्तारी की शक्ति पर अंकुश: अब कर अधिकारियों द्वारा मनमाने तरीके से गिरफ्तारी नहीं की जा सकेगी। गिरफ्तारी के लिए केवल न्यायिक न्यायालय (Courts) ही अधिकृत होंगे।
अपराधिक सीमा में बढ़ोतरी: जीएसटी चोरी के आपराधिक मामले दर्ज करने की सीमा 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है।
सितंबर 2025 का ऐतिहासिक सुधार: सरकार ने इससे पहले सितंबर 2025 में टैक्स स्लैब को सीमित कर 5% और 18% कर दिया था, जबकि 12% और 28% वाले स्लैब समाप्त कर दिए गए थे।
कर्मचारियों के बीमा पर ITC: बैठक में कंपनियों/नियोक्ताओं को कर्मचारियों के लिए चुकाए गए बीमा कवर प्रीमियम पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दावा करने की अनुमति दी जा सकती है।
गिरफ्तारी नहीं, डाटा-आधारित जांच पर रहेगा ध्यान
केंद्रीय जीएसटी अधिनियम की धारा 69 के तहत वर्तमान में जीएसटी कमिश्नर को पर्याप्त कारणों के आधार पर किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार है।
नए सुधार लागू होने के बाद:
जांच और वित्तीय वसूली पर जोर: अधिकारियों का मुख्य ध्यान अब डेटा-संचालित (Data-based) जांच और कर वसूली पर रहेगा।
कम होगी मुकदमेबाजी: वर्गीकरण (Classification), मूल्यांकन या ITC जैसे सामान्य व्यावसायिक विवादों में कारोबारियों को बेवजह पुलिस/न्यायिक मामलों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
गंभीर धोखाधड़ी पर ही कोर्ट से कार्रवाई: जानबूझकर कर चोरी या गंभीर धोखाधड़ी के मामलों में अदालतों के माध्यम से ही अभियोजन (Prosecution) चलाया जा सकेगा।
जीएसटी सुधार 2.0 से क्या बदलेगा?
- आसान अनुपालन (Easy Compliance): जीएसटी पंजीकरण प्रक्रिया को और सुगम बनाया जाएगा।
- तेज रिफंड (Faster Refund): कारोबारियों के अटके रिफंड को तेजी से क्लियर करने की व्यवस्था होगी।
- पारदर्शी नोटिस व्यवस्था: ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) और जुर्माने से जुड़े नियमों में पारदर्शिता लाई जाएगी।
- एजेंसियों को जिम्मा: कर विवाद निपटाने का काम जीएसटी विभाग करेगा, जबकि गंभीर आपराधिक जांच कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अदालतों के हवाले होगी।

