Yuva India: अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास कई स्थानों पर दोनों देशों के सैनिकों के बीच आमना-सामना जारी रहने की जानकारी सामने आई है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने 22 अक्टूबर को राजस्थान के अलवर में एक कार्यक्रम के दौरान इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि सीमा पर तैनात ITBP की शौर्य कमांडो टीमों ने इन परिस्थितियों में अच्छा काम किया है। इस घटनाक्रम के बाद सीमा सुरक्षा, आधुनिक युद्ध तकनीक और सैनिकों की तैयारी पर चर्चा तेज हो गई है।
हालांकि, 24 अक्टूबर को सामने आई एक अन्य रिपोर्ट में रक्षा सूत्रों के हवाले से कहा गया कि अरुणाचल प्रदेश के असफिला और लोंगजू क्षेत्रों में स्थिति संवेदनशील होने के बावजूद जमीन पर हालात स्थिर और नियंत्रण में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन क्षेत्रों में गश्त के दौरान दोनों देशों के सैनिकों का आमना-सामना होता रहता है, लेकिन हालिया घटनाओं में हिंसक झड़प की पुष्टि नहीं हुई है।
ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक पर बढ़ेगा जोर
ITBP प्रमुख ने कहा कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में चीन की सैन्य क्षमताओं का मुकाबला करने के लिए पारंपरिक तरीकों के साथ नई तकनीक को अपनाना जरूरी है।
उनके अनुसार, ITBP की सीमा सुरक्षा करने वाली बटालियनों में ड्रोन प्लाटून तैयार की गई हैं। जवानों को ड्रोन चलाने, निगरानी करने और तकनीक विकसित करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बल अपने स्तर पर ड्रोन बनाने की दिशा में भी काम कर रहा है।
ITBP को आधुनिकीकरण के लिए 400 करोड़ रुपये मिले हैं, जिनमें से लगभग 70 प्रतिशत राशि ड्रोन युद्ध क्षमता को मजबूत करने पर खर्च करने की योजना है। इसके अलावा, करीब 4,000 करोड़ रुपये की एक अन्य आधुनिकीकरण योजना को सैद्धांतिक मंजूरी मिली है। इसमें लगभग 1,000 करोड़ रुपये ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रणालियों के लिए निर्धारित किए गए हैं।
गलवान जैसी स्थिति से निपटने के लिए ‘स्ट्राइक’ प्रशिक्षण
जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें भारत के 20 जवान शहीद हुए थे। इस घटना ने सीमा पर सैनिकों की तैयारी और आमने-सामने की परिस्थितियों से निपटने की क्षमता को लेकर कई सवाल खड़े किए थे।
इसी तरह की परिस्थितियों में बेहतर प्रतिक्रिया देने के लिए ITBP ने ‘स्ट्राइक’ नाम का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। इसका उद्देश्य जवानों को नजदीकी संघर्ष, सामरिक रणनीति और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप तैयार करना है।
ITBP महानिदेशक के अनुसार, बल के सभी जवानों को दिसंबर 2027 तक इस प्रशिक्षण से गुजरने का लक्ष्य रखा गया है। इससे सीमा पर तैनात कर्मियों की तैयारी और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कार्रवाई करने की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
शौर्य कमांडो और भूमिगत बंकरों की तैयारी
ITBP सीमा पर तैनात जवानों की सुरक्षा के लिए बुनियादी ढांचे को भी मजबूत कर रहा है। इसके तहत अग्रिम चौकियों पर भूमिगत आश्रय और बंकर बनाने की पहल की गई है, ताकि आधुनिक हथियारों और संभावित हमलों की स्थिति में जवानों को सुरक्षा मिल सके।
इसके साथ ही ऊंचाई वाले इलाकों में सैनिकों के रहने की सुविधाओं को बेहतर बनाने पर काम हो रहा है। अत्यधिक ठंड वाले क्षेत्रों में बैरकों को सुरक्षित रखने, सौर ऊर्जा से पानी गर्म करने और दूरस्थ चौकियों पर बिजली की व्यवस्था जैसे उपायों पर भी जोर दिया जा रहा है।
शौर्य कमांडो की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इन जवानों को पहाड़ी क्षेत्रों में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कार्रवाई करने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।
भारत-चीन के बीच बातचीत भी महत्वपूर्ण
सीमा पर तनाव के बीच भारत और चीन के बीच सैन्य तथा कूटनीतिक संवाद जारी है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि निर्धारित गश्त के तरीकों से अलग गतिविधियों के कारण सीमा पर कभी-कभी स्थिति तनावपूर्ण हो जाती है। दोनों देश मौजूदा सैन्य और कूटनीतिक तंत्र के जरिए गलतफहमियों को दूर करने और लंबित मुद्दों के समाधान की कोशिश कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, अरुणाचल प्रदेश में LAC के आसपास की स्थिति पर नजर बनी हुई है। ITBP की ओर से ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम, विशेष कमांडो और आधुनिक प्रशिक्षण पर जोर देना बताता है कि सीमा सुरक्षा में तकनीक और सैनिकों की तैयारी की भूमिका लगातार बढ़ रही है। वहीं, क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए दोनों देशों के बीच संवाद भी अहम बना हुआ है।

