Yuva India: देश में आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन टैक्स चुकाने वाले करदाताओं की संख्या में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। वित्त वर्ष 2019-20 से 2026-27 के बीच आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई, जबकि टैक्स देने वालों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद सरकार का आयकर संग्रह लगभग 2.6 गुना बढ़कर 13.80 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
वित्त वर्ष 2019-20 में 6.78 करोड़ लोगों ने आयकर रिटर्न दाखिल किया था। इनमें से 3.88 करोड़ लोगों ने टैक्स चुकाया, जबकि 2.90 करोड़ रिटर्न शून्य टैक्स वाले थे। वित्त वर्ष 2026-27 में 30 सितंबर तक 8.05 करोड़ रिटर्न दाखिल किए गए। इनमें 2.64 करोड़ करदाता टैक्स देने वाले और 5.41 करोड़ शून्य टैक्स वाले बताए गए हैं।
8 करोड़ से ज्यादा लोगों ने दाखिल किया ITR
सात साल की अवधि में आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या 6.78 करोड़ से बढ़कर 8.05 करोड़ हो गई। इस तरह रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या में लगभग 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
वहीं, शून्य टैक्स वाले रिटर्न की संख्या 2.90 करोड़ से बढ़कर 5.41 करोड़ हो गई। इसका मतलब है कि अब बड़ी संख्या में लोग रिटर्न तो दाखिल कर रहे हैं, लेकिन उनकी अंतिम कर देनदारी शून्य है।
हालांकि, शून्य टैक्स वाला रिटर्न दाखिल करने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति की कोई आय नहीं है। कर छूट, कटौती, रिबेट और लागू कर नियमों के आधार पर किसी व्यक्ति की कर योग्य आय होने के बावजूद अंतिम टैक्स देनदारी शून्य हो सकती है।
सात साल में टैक्स देने वालों की संख्या में गिरावट
वित्त वर्ष 2019-20 में टैक्स चुकाने वाले रिटर्न की संख्या 3.88 करोड़ थी। 2026-27 में 30 सितंबर तक यह संख्या घटकर 2.64 करोड़ रह गई। यानी दोनों आंकड़ों के बीच लगभग 1.24 करोड़ का अंतर है।
हालांकि, इन आंकड़ों की तुलना करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि 2026-27 के आंकड़े अभी वित्त वर्ष के शुरुआती छह महीनों तक के हैं। इसलिए इनकी तुलना पिछले पूरे वित्त वर्षों के आंकड़ों से सीधे करना उचित नहीं होगा। अंतिम संख्या में आगे बदलाव हो सकता है।
टैक्स कलेक्शन में 2.6 गुना बढ़ोतरी
करदाताओं की संख्या में गिरावट के बावजूद सरकार के आयकर संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि दिखाई गई है। वित्त वर्ष 2019-20 में आयकर संग्रह 4.73 लाख करोड़ रुपये था, जो 2026-27 में 30 सितंबर तक बढ़कर 13.80 लाख करोड़ रुपये हो गया।
इस बढ़ोतरी के पीछे करदाताओं की औसत कर देनदारी, आय में वृद्धि, कॉरपोरेट मुनाफा, वेतन और अन्य आय स्रोतों में बदलाव जैसे कई कारक हो सकते हैं। हालांकि, केवल इन आंकड़ों के आधार पर संग्रह बढ़ने की किसी एक वजह को निश्चित नहीं माना जा सकता।
वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग की वेबसाइट पर भी वर्षों के अनुसार प्रत्यक्ष कर संग्रह के आंकड़े उपलब्ध हैं। इन आंकड़ों में व्यक्तिगत आयकर और कॉरपोरेट टैक्स सहित अलग-अलग श्रेणियों का विवरण दिया जाता है।
औसत टैक्स भुगतान में भी बढ़ोतरी
औसत कर भुगतान 2019-20 में लगभग 1.22 लाख रुपये से बढ़कर 2026-27 में 5.23 लाख रुपये बताया गया है। इसका अर्थ है कि रिपोर्ट में शामिल करदाताओं के औसत भुगतान में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
हालांकि, औसत भुगतान में बढ़ोतरी का मतलब यह नहीं है कि हर करदाता पहले से अधिक टैक्स दे रहा है। औसत आंकड़ा अधिक आय वाले करदाताओं के भुगतान से भी प्रभावित हो सकता है।
आयकर रिटर्न और टैक्स भुगतान में क्या अंतर है?
आयकर रिटर्न में व्यक्ति अपनी आय, छूट, कटौती और कर संबंधी जानकारी घोषित करता है। वहीं, टैक्स भुगतान उसकी अंतिम कर देनदारी पर निर्भर करता है। इसलिए रिटर्न दाखिल करने वालों और वास्तव में टैक्स चुकाने वालों की संख्या अलग-अलग हो सकती है।
आयकर विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर करदाता अपनी श्रेणी और आय के अनुसार लागू रिटर्न फॉर्म, कर नियम और आवश्यक दिशा-निर्देश देख सकते हैं।
कुल मिलाकर आयकर रिटर्न दाखिल करने का दायरा बढ़ा है और सरकार का कर संग्रह भी बढ़ा है। लेकिन टैक्स देने वालों की वास्तविक संख्या और औसत भुगतान की सही तस्वीर समझने के लिए पूरे वित्त वर्ष के अंतिम आंकड़ों और आधिकारिक कर संग्रह के आंकड़ों का मिलान जरूरी है।

