Yuva India: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची को लेकर जारी राजनीतिक विवाद पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के तीन प्रमुख सहयोगियों—चिराग पासवान (LJP-RV), उपेन्द्र कुशवाहा (RLM) और चंद्रबाबू नायडू (TDP)—ने निर्वाचन आयोग (EC) से जनता के भ्रम दूर करने और अपनी बात मजबूती से सामने रखने की मांग की है।
मुख्य बिंदु:
जनता का विश्वास जरूरी: एलजेपी (रामविलास) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि यदि लोग चुनावी प्रक्रिया पर से भरोसा खोने लगेंगे, तो यह लोकतंत्र के लिए सही संकेत नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अगर आयोग के कामकाज पर सवाल उठ रहे हैं, तो यह मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) और आयोग की जिम्मेदारी है कि वे स्थिति स्पष्ट करें।
भ्रम दूर करे आयोग: आरएलएम (RLM) के प्रमुख उपेन्द्र कुशवाहा ने सोशल मीडिया पर कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जनता के बीच भ्रम फैला हुआ है। उन्होंने मांग की कि चुनाव आयोग को तुरंत इस भ्रम को दूर करने के लिए स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
वीआईपी (VIP) वोटरों से जुड़ा निर्देश नियमित प्रक्रिया: चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, सांसदों, जजों, कलाकारों, खिलाड़ियों और सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों (VIPs) के नामों को चिन्हित करना एक नियमित प्रक्रिया है और यह SIR आदेशों का हिस्सा है जिसे आयोग ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका
सुप्रीम कोर्ट में अर्जी: सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ने याचिका दायर कर मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ “एकतरफा और अनाधिकृत निर्णय” लेने के आरोप में कार्रवाई की मांग की है।
अवमानना याचिका की अनुमति: एक अन्य पक्ष ने सीईसी के खिलाफ अवमानना याचिका दायर करने के लिए अटॉर्नी जनरल से अनुमति मांगी है।
दिल्ली: वोटर लिस्ट से नाम कटा तो नहीं मिलेगा ‘तीर्थ’ और ‘लक्ष्मी योजना’ का लाभ
योजनाओं के नियम सख्त: दिल्ली सरकार की दो फ्लैगशिप योजनाओं—’दिल्ली लक्ष्मी योजना’ और ‘मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना’—के तहत लाभ उठाने के लिए मान्य वोटर आईडी कार्ड का होना अनिवार्य है।
लाखों नाम हटे: मतदाता सूची के प्रारूप (draft electoral roll) से 47.6 लाख वोटरों के नाम हटाए जाने की बात सामने आई है। जिन नागरिकों के नाम सूची से काट दिए गए हैं, वे इन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पाएंगे।

