सीएक्यूएम ने ग्रैप में किए अहम बदलाव; बच्चों की पढ़ाई, वाहनों, डीजल जनरेटर और सरकारी दफ्तरों से जुड़े नियमों में बदलाव
Yuva India : दिल्ली-NCR में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के नियमों में बदलाव किया गया है। अब प्रदूषण के बेहद गंभीर स्तर तक पहुंचने का इंतजार किए बिना मौसम और वायु गुणवत्ता के पूर्वानुमान के आधार पर कुछ पाबंदियां पहले ही लागू की जा सकेंगी। संशोधित GRAP शेड्यूल को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने मंजूरी दी है।
संशोधित व्यवस्था में धूल नियंत्रण, कचरा प्रबंधन और परिवहन से जुड़े कुछ दोहराए गए प्रावधानों को मिलाकर स्टेज-1 में 25 कार्रवाई बिंदु रखे गए हैं। वहीं स्टेज-2 में 8, स्टेज-3 में 10 और स्टेज-4 में 5 कार्रवाई बिंदु शामिल हैं।
स्कूलों में हाइब्रिड पढ़ाई का प्रावधान
नए प्रावधानों के तहत प्रदूषण की स्थिति गंभीर होने पर दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और नोएडा समेत NCR के कुछ क्षेत्रों में स्कूलों के लिए हाइब्रिड पढ़ाई (ऑनलाइन + ऑफलाइन) का विकल्प लागू किया जा सकता है। संशोधित GRAP में प्रदूषण बढ़ने की स्थिति के अनुसार अलग-अलग स्तर पर शैक्षणिक गतिविधियों के लिए प्रावधान किए गए हैं।
पुराने वाहनों पर सख्ती
संशोधित GRAP में पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर भी सख्ती बढ़ाई गई है। BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल या उससे नीचे के मानकों वाले हल्के मोटर वाहनों पर प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाकर सोनीपत को भी शामिल किया गया है। इससे पहले गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर जैसे हाई-व्हीकल-डेंसिटी जिलों में ऐसे प्रतिबंध लागू होते थे।
इसके अलावा दिल्ली में प्रवेश करने वाली बसों के लिए भी शुरुआती GRAP चरण से ही अधिक सख्त उत्सर्जन मानकों का प्रावधान किया गया है। कुछ डीजल वाहनों के प्रवेश पर भी अलग-अलग चरणों में प्रतिबंध लागू होंगे।
डीजल जनरेटर और सरकारी दफ्तरों पर भी असर
संशोधित व्यवस्था में डीजल जनरेटर सेट से जुड़े प्रावधानों को भी पहले के चरण में लाया गया है। वहीं प्रदूषण की स्थिति बिगड़ने पर दिल्ली और NCR के प्रमुख जिलों में सरकारी और स्थानीय निकायों के कार्यालयों के समय में बदलाव किया जा सकता है, ताकि सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम किया जा सके।

