Yuva India: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने वकीलों को ‘सीनियर एडवोकेट’ का दर्जा देने की प्रक्रिया को लेकर नए नियम लागू कर दिए हैं। नए नियमों के तहत अब सीनियर एडवोकेट बनने के लिए वकील की न्यूनतम आयु 40 वर्ष और वकालत का कम से कम 10 साल का अनुभव होना अनिवार्य कर दिया गया है।
अनुभव व पात्रता से जुड़े मुख्य बदलाव
अनुभव की शर्त: हाईकोर्ट, जिला अदालतों या ट्रिब्यूनल में न्यूनतम 10 वर्षों का वकालत अनुभव अनिवार्य है।
सुपीरियर ज्यूडिशियल सर्विस: सुपीरियर ज्यूडिशियल सर्विस के पूर्व अधिकारियों के लिए वकालत में कम से कम 3 साल का प्रैक्टिस अनुभव होना जरूरी है।
आचरण व अवमानना: बार काउंसिल या कोर्ट द्वारा किसी भी प्रकार के कदाचार (Misconduct) या अवमानना के दोषी पाए गए वकील इस पद के लिए पात्र नहीं होंगे।
आवेदन व चयन प्रक्रिया (Selection Process)
- सीनियर एडवोकेट्स का समर्थन: आवेदन पत्र पर कम से कम 5 वर्ष का अनुभव रखने वाले 2 सीनियर एडवोकेट के हस्ताक्षर होना अनिवार्य है।
- सीमा: एक सीनियर एडवोकेट एक साल में अधिकतम दो आवेदनों की ही सिफारिश कर सकता है।
- वार्षिक प्रक्रिया: सीनियर एडवोकेट चयन की प्रक्रिया साल में कम से कम एक बार आयोजित की जाएगी। इसके लिए एक परमानेंट सेक्रेटेरिएट का गठन किया गया है, जिसके सदस्य सचिव ‘रजिस्ट्रार (रूल्स)’ होंगे।
- आपत्तियां व सुझाव: योग्य आवेदकों की सूची हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएगी, जिस पर हितधारकों से आपत्तियां और सुझाव मांगे जाएंगे।
- 2 साल का प्रतिबंध: यदि किसी वकील का आवेदन खारिज या स्थगित होता है, तो वह अगले 2 वर्षों तक दोबारा आवेदन नहीं कर सकेगा।
- गुप्त मतदान: फुल कोर्ट में सर्वसम्मति न बनने की स्थिति में गुप्त मतदान कराया जाएगा। सीनियर पदनाम देने के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले जजों के कम से कम 2/3 (दो-तिहाई) बहुमत की आवश्यकता होगी।
सीनियर एडवोकेट बनने के बाद लागू होंगी ये पाबंदियां
नियमों के तहत सीनियर बनने वाले वकीलों को एक शपथ पत्र (Affidavit) देना होगा, जिसके तहत निम्नलिखित शर्तें लागू होंगी:
वकालतनामा नहीं देंगे: वकील किसी भी अदालत या ट्रिब्यूनल में वकालतनामा दाखिल नहीं करेंगे।
सीधे मसौदा नहीं बनाएंगे: वे सीधे मुकदमों का मसौदा (Drafting) तैयार नहीं करेंगे।
जूनियर एडवोकेट की सहायता: हर केस में उन्हें किसी अन्य जूनियर एडवोकेट की सहायता से ही पेश होना होगा।
सीधे परामर्श नहीं: वे पक्षकारों/क्लाइंट्स को सीधे परामर्श नहीं देंगे।
मुफ्त कानूनी सहायता: मुफ्त कानूनी सहायता (Legal Aid) के मामलों में बहस करने से मना नहीं कर सकेंगे।
