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विशेषभारत

दिल्ली-NCR और पंजाब समेत कई राज्य प्रदूषण नियंत्रण में पिछड़े, 40-60% लक्ष्य ही पूरे

Bhawana Vats
Last updated: October 30, 2026 12:07 pm
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दिल्ली-NCR, पंजाब और हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण में पिछड़े, सिर्फ 40-60% लक्ष्य पूरे; सर्दियों से पहले बढ़ी चिंता

Contents
राजस्थान का प्रदर्शन सबसे कमजोर, यूपी सबसे आगेकिन क्षेत्रों में किए जाने हैं सुधार?पंजाब में पराली जलाने पर रोक बड़ी चुनौतीसर्दियों से पहले बढ़ सकती है मुश्किल

Yuva India: दिल्ली-NCR और आसपास के राज्यों में वायु प्रदूषण से निपटने की तैयारियों को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। दिल्ली के साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब में प्रदूषण कम करने के लिए तय किए गए वार्षिक कार्ययोजनाओं के केवल 40 से 60 प्रतिशत उपाय ही पूरे हो पाए हैं। यानी कई जरूरी काम अब भी अधूरे हैं। यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है, जब सर्दियों की शुरुआत के साथ दिल्ली-NCR में हवा की गुणवत्ता खराब होने और प्रदूषण बढ़ने की आशंका रहती है।

यह जानकारी वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के अधिकारियों के हवाले से सामने आई है। राज्यों ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए अपनी वार्षिक कार्ययोजनाएं जनवरी में आयोग को सौंपी थीं, जिन्हें फरवरी में अंतिम रूप दिया गया था। इन योजनाओं में अलग-अलग कामों के लिए चरणबद्ध समयसीमा तय की गई थी। इनमें से कई महत्वपूर्ण उपाय 31 अक्टूबर तक पूरे किए जाने थे, ताकि प्रदूषण का स्तर बढ़ने से पहले जरूरी व्यवस्थाएं लागू हो सकें।

राजस्थान का प्रदर्शन सबसे कमजोर, यूपी सबसे आगे

30 सितंबर तक के आंकड़ों के आधार पर किए गए आकलन में राजस्थान का प्रदर्शन सबसे कमजोर बताया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश राज्यों में सबसे बेहतर स्थिति में रहा। हरियाणा और पंजाब समेत अन्य राज्यों में भी कई निर्धारित उपाय पूरे नहीं हो सके हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, सभी राज्यों को अपने प्रयास तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। उनका कहना है कि अलग-अलग क्षेत्रों में काम शुरू हुआ है और कुछ प्रगति भी हुई है, लेकिन मौजूदा स्थिति संतोषजनक नहीं है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि तय समयसीमा के भीतर जमीन पर काम पूरा करना भी जरूरी है।

किन क्षेत्रों में किए जाने हैं सुधार?

CAQM की वार्षिक कार्ययोजनाओं में प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों को नियंत्रित करने के लिए कई उपाय शामिल हैं। इनमें सड़कों की धूल पर नियंत्रण, निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाली धूल का प्रबंधन, कचरे का उचित निस्तारण, वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करना और औद्योगिक इकाइयों के उत्सर्जन पर निगरानी रखना शामिल है।

इसके अलावा पराली और फसल अवशेषों के प्रबंधन, प्रदूषण की निगरानी के लिए एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन बढ़ाने तथा हरित क्षेत्र विकसित करने जैसे कदम भी योजनाओं का हिस्सा हैं। इन सभी क्षेत्रों में संबंधित राज्य सरकारों और स्थानीय एजेंसियों को अपनी जिम्मेदारी निभानी है।

पंजाब में पराली जलाने पर रोक बड़ी चुनौती

पंजाब के लिए पराली जलाने की घटनाओं पर नियंत्रण एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। राज्य ने फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जागरूकता अभियान, किसानों तक जानकारी पहुंचाने और खेतों में मशीनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने जैसे उपायों की योजना बनाई है। इसके लिए जनसंचार माध्यमों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और स्थानीय स्तर पर जागरूकता गतिविधियों का सहारा लिया जा रहा है।

हालांकि, पंजाब की प्रदूषण नियंत्रण योजना में पराली जलाने पर रोक को लेकर उपायों पर विशेष जोर है। इसके साथ ही सड़क की धूल, कचरा प्रबंधन और वाहनों से निकलने वाले धुएं जैसे अन्य स्रोतों पर भी लगातार कार्रवाई की जरूरत है। पराली जलाने का धुआं केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों की हवा को भी प्रभावित कर सकता है।

सर्दियों से पहले बढ़ सकती है मुश्किल

दिल्ली-NCR में सर्दियों के दौरान हवा की गुणवत्ता अक्सर खराब श्रेणी में पहुंच जाती है। कम तापमान, हवा की धीमी गति और प्रदूषकों के वातावरण में जमा होने जैसी परिस्थितियां प्रदूषण की समस्या को गंभीर बना सकती हैं। ऐसे में राज्यों की ओर से प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को समय पर लागू करना बेहद जरूरी है।

CAQM ने सभी संबंधित राज्यों और एजेंसियों को कार्ययोजनाओं पर तेजी से काम करने के निर्देश दिए हैं। आयोग का जोर केवल कागजों पर प्रगति दिखाने के बजाय सड़क, उद्योग, परिवहन, कचरा और कृषि क्षेत्र में वास्तविक बदलाव लाने पर है।

अब देखना होगा कि हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश समेत संबंधित राज्य बाकी बचे उपायों को कितनी तेजी से पूरा कर पाते हैं। आने वाले दिनों में इन प्रयासों का असर दिल्ली-NCR और आसपास के इलाकों की हवा की गुणवत्ता पर भी दिखाई दे सकता है।

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