Yuva India : मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद की रिपोर्ट सामने आने के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के विभिन्न फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की।
हालांकि, चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने इन आपत्तियों को औपचारिक मतभेद मानने से इनकार किया है। आयोग का कहना है कि चर्चा के दौरान अलग-अलग राय और सुझाव सामने आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए जाते है।
10 महीने में 14 बार लिखित आपत्ति का दावा
संधू और जोशी ने नवंबर 14 महिनों के बीच कम से कम 14 मौकों पर आपत्तियां दर्ज कीं। इनमें मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने, एसआईआर प्रक्रिया तथा मतदाता डेटाबेस और आईटी सिस्टम से जुड़े मुद्दे शामिल थे।
दोनों आयुक्तों ने कुछ मामलों में यह भी सवाल उठाया कि आयोग के नाम से जारी किए गए कुछ फैसलों या आदेशों की जानकारी उन्हें पहले से नहीं थी।
फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर भी उठे सवाल
चुनाव आयोग के फॉर्म-6 में किए गए बदलाव का भी उल्लेख है। यह फॉर्म नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होता है। फॉर्म में एसआईआर से संबंधित अतिरिक्त जानकारी मांगे जाने को लेकर भी चुनाव आयुक्तों की ओर से आपत्ति दर्ज की गई थी।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
आयोग की ओर से कहा गया है कि किसी मुद्दे पर अलग राय रखना संस्थागत कामकाज का हिस्सा है। आयोग के सूत्रों के अनुसार, टिप्पणियों और सुझावों पर विचार किया गया और उन्हें औपचारिक असहमति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
विपक्ष ने उठाए सवाल
रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और एसआईआर को लेकर सवाल उठाए। कुछ विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग भी की है। ये राजनीतिक दलों के दावे और मांगें हैं कि चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर सभी अंतिम फैसलों को सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कही है।
एसआईआर और वोटर लिस्ट का मामला क्यों महत्वपूर्ण ?
एसआईआर के तहत मतदाता सूचियों की समीक्षा और सत्यापन किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम बनाए रखने के साथ-साथ गलत या अपात्र प्रविष्टियों को हटाने की प्रक्रिया भी शामिल है। इसी वजह से मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और पुनः जोड़ने से जुड़े फैसले महत्वपूर्ण हैं।
