Yuva India : एशियन गेम्स में भारत के लिए रोइंग में सतनाम सिंह और सलमान खान की जोड़ी ने पुरुषों की डबल स्कल्स प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। दोनों खिलाड़ी अलग-अलग पृष्ठभूमि से आते हैं। सतनाम किसान परिवार से हैं, जबकि सलमान पूर्व ऊबर ड्राइवर रह चुके हैं।
नागोया में आयोजित प्रतियोगिता में दोनों ने पुरुषों की डबल स्कल्स में कांस्य पदक हासिल किया। यह एशियन गेम्स के इस संस्करण में भारत का इस स्पर्धा में पहला पदक है।
पांच दिन पहले बदली गई थी टीम
सतनाम सिंह और सलमान खान को शुरुआत में चौगुनी स्कल्स टीम के लिए तैयार किया गया था। लेकिन प्रतियोगिता से महज पांच दिन पहले टीम में बदलाव किया गया और दोनों को डबल स्कल्स में उतारने का फैसला हुआ।
दिलचस्प बात यह रही कि दोनों ने इससे पहले कभी साथ में डबल स्कल्स में रेस नहीं की थी। अचानक हुए बदलाव के बावजूद दोनों ने तालमेल बनाया और पदक जीतने में कामयाब रहे।
किसान परिवार से आते हैं सतनाम सिंह
सतनाम सिंह की उम्र 26 वर्ष है और वह हरियाणा के ताऊरू से हैं। उनके पिता ट्रक बॉडी बनाने का काम करते थे। वर्ष 2016 में पिता के निधन के बाद परिवार को कई जिम्मेदारियों का सामना करना पड़ा।
सतनाम ने बताया कि परिवार में सबसे बड़े बेटे होने के कारण उन पर जिम्मेदारियां थीं। इसी वजह से उन्हें अपनी पढ़ाई छोड़कर परिवार की मदद करनी पड़ी।
पूर्व उबर ड्राइवर हैं सलमान खान
28 वर्षीय सलमान खान का सफर भी आसान नहीं रहा। उन्होंने रोइंग में आने से पहले उबर ड्राइवर के तौर पर काम किया। वह दिल्ली और गुरुग्राम के बीच सुबह और शाम लंबी शिफ्ट में गाड़ी चलाते थे।
2018 में एक दोस्त के कहने पर उन्होंने सेना के लिए ट्रायल दिया। इसके बाद उनका चयन हुआ और सेना में जाने के बाद उन्हें रोइंग से जुड़ने का मौका मिला।
सेना में आने के बाद रोइंग से जुड़ा सफर
सलमान जब नागोया पहुंचे तो वह भारतीय रोइंग टीम के स्थापित सदस्यों में शामिल थे। उन्होंने बताया कि रोइंग से उनका जुड़ाव लगभग संयोग से हुआ। सेना में उनके कमांडिंग अधिकारी ने उन्हें इस खेल में बने रहने के लिए प्रेरित किया।
सलमान और सतनाम को शुरुआत में बलराज सिंह और लाखर खान के साथ चौगुनी स्कल्स के लिए तैयार किया गया था। लेकिन अंतिम समय में टीम में बदलाव के बाद केवल लाखर खान को बरकरार रखा गया और सलमान-सतनाम को डबल स्कल्स में उतारा गया।
अचानक मिली चुनौती को बनाया कामयाबी
टीम में बदलाव से दोनों खिलाड़ी निराश हुए थे, क्योंकि वे कई महीनों से एक अलग स्पर्धा के लिए तैयारी कर रहे थे। इसके बावजूद उन्होंने नई चुनौती स्वीकार की और डबल स्कल्स में भारत के लिए कांस्य पदक जीत लिया।
यह पदक सतनाम सिंह और सलमान खान के संघर्ष, मेहनत और अंतिम समय में हुए बदलाव के बावजूद प्रदर्शन करने की क्षमता को दर्शाता है।
