Yuva India: अमेरिका में H-1B वीजा नियमों को लेकर सख्ती और बढ़ाने की तैयारी है। ट्रंप समर्थक सांसदों ने H-1B वीजा से जुड़े उल्लंघनों पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान करने वाला नया बिल पेश किया है। प्रस्तावित कानून में गंभीर उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाने और कुछ मामलों में H-1B स्पॉन्सर करने पर कई वर्षों तक रोक लगाने का प्रावधान है।
अमेरिका में H-1B वीजा पर सख्ती अब उन IT कंपनियों तक भी पहुंच रही है, जो विदेशी कर्मचारियों को वीजा स्पॉन्सर करती हैं। H-1B वीजा के लाभार्थियों में करीब 71% भारतीय बताए जाते हैं। ऐसे में प्रस्तावित नियमों का भारतीय IT प्रोफेशनल्स और कंपनियों पर भी असर पड़ सकता है।
H-1B नियम तोड़ने पर भारी जुर्माने का प्रस्ताव
रिपब्लिकन सांसद बेथ वैन डाइन ने पांच अन्य सांसदों के साथ मिलकर ‘H-1B Visa Fraud Crackdown Act’ पेश किया है। प्रस्तावित बिल में वीजा नियमों के गंभीर उल्लंघन पर मौजूदा सजा और जुर्माने को बढ़ाने की बात कही गई है।
प्रस्ताव के अनुसार, अमेरिकी कर्मचारी को हटाकर उसकी जगह H-1B कर्मचारी रखने जैसे गंभीर उल्लंघन पर 2.4 करोड़ रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही संबंधित कंपनी को 10 साल तक H-1B स्पॉन्सर करने से रोका जा सकता है।
भारतीय IT कंपनियों पर भी असर की आशंका
अमेरिका में H-1B वीजा का इस्तेमाल बड़ी संख्या में भारतीय IT प्रोफेशनल्स करते हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि TCS, Infosys समेत छह बड़ी भारतीय IT कंपनियों के नए H-1B रजिस्ट्रेशन में 92% की कमी आई है।
अगर प्रस्तावित कानून लागू होता है तो वीजा नियमों के उल्लंघन के मामलों में कंपनियों के लिए जोखिम और बढ़ सकता है।
अलग-अलग उल्लंघनों पर बढ़ सकती है सजा
| उल्लंघन | मौजूदा कानून में सजा | नए बिल में प्रस्ताव |
| जानबूझकर नियम तोड़ना | 4.8 लाख रुपये, 2 साल रोक | 95 लाख रुपये, 5 साल रोक |
| अमेरिकी कर्मचारी को हटाना | 33 लाख रुपये, 3 साल रोक | 2.4 करोड़ रुपये, 10 साल रोक |
| दस्तावेजों में फ्रॉड | 24 हजार–1.9 लाख रुपये | 95 हजार–9.5 लाख रुपये |
| गंभीर/दोबारा फ्रॉड | 1.9–4.8 लाख रुपये | 19–48 लाख रुपये |
भारतीय कर्मचारियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण ?
H-1B वीजा अमेरिकी कंपनियों को विशेष कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देने की अनुमति देता है। भारतीय IT प्रोफेशनल्स लंबे समय से इस वीजा कार्यक्रम के सबसे बड़े लाभार्थियों में शामिल रहे हैं।
ऐसे में H-1B नियमों में किसी भी बड़े बदलाव का सीधा असर भारतीय IT कंपनियों, विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति और अमेरिका में भारतीय टेक प्रोफेशनल्स के रोजगार अवसरों पर पड़ सकता है।

