मकान और कार खरीदने का अभी मौका, दिसंबर से बढ़ सकती है लोन की लागत; EMI पर पड़ेगा असर
Yuva India: अगर आप नया मकान या कार खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आने वाले महीनों में लोन की लागत पर नजर रखना जरूरी है। ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी से होम लोन और कार लोन लेने वाले ग्राहकों की मासिक किस्त (EMI) बढ़ सकती है। ऐसे में खरीदारी से पहले लोन की ब्याज दर, डाउन पेमेंट और कुल भुगतान की गणना करना फायदेमंद रहेगा।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 7 अक्टूबर 2026 को रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी करके इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया था। महंगाई के दबाव के बीच इस फैसले से कर्ज की लागत बढ़ने की आशंका है। कुछ वित्तीय विश्लेषकों ने दिसंबर से ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावना जताई है, लेकिन यह अभी निश्चित फैसला नहीं है।
दिसंबर से महंगे हो सकते हैं होम और कार लोन
रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। इसमें बढ़ोतरी होने पर बैंकों की फंडिंग लागत बढ़ सकती है। इसके बाद बैंक अपने कर्ज की ब्याज दरों में बदलाव कर सकते हैं। इसका असर खासतौर पर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है, जिनके होम या कार लोन की ब्याज दर फ्लोटिंग रेट से जुड़ी है।
हालांकि, रेपो रेट में बढ़ोतरी का मतलब यह नहीं है कि सभी बैंकों के सभी लोन तुरंत महंगे हो जाएंगे। ब्याज दरों में बदलाव बैंक की नीतियों, लोन के प्रकार, ग्राहक की क्रेडिट प्रोफाइल और लागू बेंचमार्क पर निर्भर करता है।
यदि दिसंबर में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी होती है, तो नए कर्ज लेने वाले ग्राहकों को पहले के मुकाबले अधिक ब्याज देना पड़ सकता है। पहले से लोन चुका रहे ग्राहकों की EMI या लोन की अवधि भी प्रभावित हो सकती है।
50 लाख के होम लोन पर कितना पड़ेगा असर?
मान लीजिए कि कोई ग्राहक 50 लाख रुपये का होम लोन 25 साल के लिए 7.50 प्रतिशत सालाना ब्याज दर पर लेता है। इस स्थिति में उसकी मासिक EMI करीब 36,950 रुपये होगी।
अगर ब्याज दर बढ़कर 7.75 प्रतिशत हो जाती है और लोन की अवधि 25 साल ही रहती है, तो EMI लगभग 37,770 रुपये तक पहुंच सकती है। यानी मासिक किस्त में करीब 820 रुपये का अंतर आ सकता है। यह एक उदाहरण है; वास्तविक EMI बैंक की दर, लोन की शेष राशि और भुगतान की अवधि पर निर्भर करेगी।
लंबी अवधि के होम लोन में ब्याज दर का छोटा-सा बदलाव भी कुल भुगतान पर बड़ा असर डाल सकता है। इसलिए घर खरीदने से पहले केवल संपत्ति की कीमत नहीं, बल्कि पूरी लोन अवधि में चुकाए जाने वाले ब्याज का अनुमान लगाना भी जरूरी है।
कार खरीदने वालों पर भी पड़ सकता है असर
कार खरीदने के लिए बैंक से लोन लेने वाले ग्राहकों की लागत भी ब्याज दरों में बढ़ोतरी से प्रभावित हो सकती है। यदि कार लोन की दर बढ़ती है, तो समान राशि और अवधि के लिए EMI पहले से अधिक हो सकती है।
त्योहारी सीजन में वाहन कंपनियां और डीलर छूट, एक्सचेंज बोनस तथा अन्य ऑफर देते हैं। लेकिन ग्राहक को केवल छूट देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। कार की ऑन-रोड कीमत, डाउन पेमेंट, ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और कुल भुगतान की तुलना करना जरूरी है।
यदि खरीदारी की जरूरत तत्काल है, तो अलग-अलग बैंकों के ऑफर की तुलना करके बेहतर दर हासिल करने की कोशिश की जा सकती है। वहीं, केवल ब्याज दर बढ़ने की आशंका के कारण जल्दबाजी में खरीदारी करना भी सही रणनीति नहीं है।
क्या अभी मकान या कार खरीद लेना चाहिए ?
खरीदारी का सही समय आपकी आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता है। यदि आपकी आय स्थिर है, पर्याप्त डाउन पेमेंट उपलब्ध है और EMI चुकाने के बाद भी घरेलू खर्च तथा बचत के लिए पर्याप्त पैसा बचता है, तो खरीदारी पर विचार किया जा सकता है।
होम लोन लेने से पहले कम से कम कुछ बैंकों की ब्याज दरों की तुलना करें। कार खरीदते समय भी कुल लागत और लोन की शर्तों को ध्यान से पढ़ें। यदि आपके पास पहले से फ्लोटिंग रेट वाला लोन है, तो बैंक से यह पता करें कि ब्याज दर बदलने पर आपकी EMI बढ़ेगी या लोन की अवधि।
कुल मिलाकर, RBI की हालिया रेपो रेट बढ़ोतरी के बाद कर्ज की लागत पर दबाव बढ़ा है और दिसंबर से आगे बढ़ोतरी की संभावना पर चर्चा हो रही है। लेकिन ब्याज दरों में अगला बदलाव कब और कितना होगा, यह निश्चित नहीं है। इसलिए मकान या कार खरीदने का फैसला अफवाहों या अनुमान के बजाय अपनी जरूरत, बजट और बैंक के वास्तविक ऑफर के आधार पर करें।

