Yuva India: डिजिटल युग और सोशल मीडिया के दौर में आज के मातापिता बच्चों के पालनपोषण को लेकर बेहद चिंतित और तनावग्रस्त दिखाई दे रहे हैं। इंटरनेट पर पैरेंटिंग (परवरिश) की टिप्स, किताबों और विशेषज्ञों की सलाहों की बाढ़ आ चुकी है। ऐसे में बच्चे को संभालने से ज्यादा, हर कदम ‘सही’ उठाने की होड़ में मातापिता खुद पर से भरोसा खोने लगे हैं।
ऑनलाइन सलाह से बढ़ता डर और चिंता
ब्रिटेन की रोजी व्हिटफील्ड का अनुभव इस समस्या को बखूबी बयां करता है। मां बनने के बाद उन्होंने घंटों ऑनलाइन ‘जेंटल पैरेंटिंग’ (Gentle Parenting) के बारे में रिसर्च किया। लेकिन धीरेधीरे हर छोटेबड़े फैसले को लेकर उनका डर बढ़ता चला गया। उन्हें डर सताने लगा कि बच्चे को 20 मिनट भी टीवी दिखाना उसके दिमाग को नुकसान पहुँचा सकता है।
समस्या किसी एक पैरेंटिंग पद्धति की नहीं, बल्कि उस दबाव की है जहाँ मातापिता हर समय ‘सही व्यवहार’ की तलाश में रहते हैं—बच्चे को कितनी देर सुलाएं, गुस्सा आए तो क्या करें, या खाना कैसे खिलाएं?
आँकड़े क्या कहते हैं?
69% मातापिता ब्रिटेन में हुए एक सरकारी शोध के अनुसार, पैरेंटिंग के लिए उपलब्ध ढेर सारी जानकारी और सलाहों से खुद को परेशान मानते हैं।
68% मातापिता का कहना है कि अलगअलग सलाहों के चक्कर में उन पर यह भरोसा करना मुश्किल हो जाता है कि कौन सा तरीका सही है।
निष्कर्ष: समस्या अब सलाह की कमी की नहीं, बल्कि सलाह की भारी अति (ओवरलोड) की है।
पैरेंटिंग के नए ‘ब्रांड्स’ और बढ़ता कन्फ्यूजन
आज पैरेंटिंग को कई अलगअलग परिभाषाओं और नामों में बाँट दिया गया है:
- हेलीकॉप्टर पैरेंटिंग: बच्चे की हर गतिविधि पर लगातार निगरानी रखना।
- टाइगर पैरेंटिंग: सख्त अनुशासन और हमेशा ऊँची उपलब्धियों का दबाव।
- स्नोप्लाउ पैरेंटिंग: बच्चे के रास्ते की हर मुश्किल को पहले ही हटा देना।
- एविडेंसबेस्ड पैरेंटिंग: हर काम को वैज्ञानिक दावों के आधार पर तय करना।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन भारीभरकम शब्दों और परिभाषाओं ने मातापिता के स्वाभाविक रिश्ते और मानवीय व्यवहार को और उलझा दिया है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
प्रो. एली ली (निदेशक, सेंटर फॉर पैरेंटिंग कल्चर स्टडीज, ब्रिटेन):
“हर बच्चे का स्वभाव और परिस्थितियां अलग होती हैं। अलगअलग सुझावों पर समय बर्बाद करने के बजाय मातापिता को अपनी समझ और खुद पर भरोसा रखना चाहिए।”
सारा ओकवेल (जेंटल पैरेंटिंग की लोकप्रिय लेखिका):
“सोशल मीडिया पर अधूरी जानकारी फैलाई जा रही है। पैरेंटिंग में केवल स्पष्ट सीमाएं तय करना और बच्चे को अनुशासन सिखाना ही काफी है।”
मटिल्डा गोसलिंग (लेखिका, एविडेंसबेस्ड पैरेंटिंग):
“पैरेंटिंग के नएनए ट्रेंड्स इंसानी रिश्तों को कठिन बना रहे हैं। मातापिता को बस प्यार देने और कुछ बुनियादी नियम तय करने की आवश्यकता है।”
डायना बॉमरिंड (मनोवैज्ञानिक):
“सलाहों की भरमार से मातापिता भ्रमित होकर अपने फैसलों पर भरोसा खो रहे हैं। बच्चे के साथ गर्मजोशी और प्यार ही काफी है।”
पैरेंट्स के लिए मुख्य सीख (Key Takeaway)
- कोई एक फार्मूला सब पर लागू नहीं होता: अपने बच्चे की ज़रूरतों को समझें, दूसरों के नुस्खे न थोपें।
- सोशल मीडिया के अतिज्ञान से बचें: लगातार मिल रही सलाहों से थकान, चिंता और डिप्रेशन हो सकता है।
- बुनियादी बातें ही काफी हैं: प्यार, गर्मजोशी, आपसी संवाद और थोड़ी सीमाएं—यही अच्छी परवरिश की असली कुंजी हैं।

