Yuva India: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जहां सड़क है, वहां पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित, स्पष्ट और अतिक्रमण मुक्त फुटपाथ भी होना चाहिए। कोर्ट ने पैदल यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने और इसके लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने पर जोर दिया है।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और आलोक अराधे की पीठ ने केंद्र सरकार को ऐसी केंद्रीय अथॉरिटी तय करने और पायलट प्रोजेक्ट के लिए देश के पांच शहरों का चयन करने का निर्देश दिया है। इस अथॉरिटी के पास पर्याप्त फंड, स्टाफ और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध होना चाहिए, ताकि फुटपाथ से जुड़े मानकों और सुरक्षा उपायों को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।
कोर्ट ने 19 जून के फैसले में फुटपाथ पर चलने को पैदल यात्रियों का मौलिक अधिकार बताया था। इसके साथ ही शहरों में पैदल यात्रियों के लिए बेहतर और सुरक्षित बुनियादी ढांचा विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
हर दिन औसतन 100 पैदल यात्रियों की मौत
देश में 2024 के दौरान सड़क हादसों में 36,526 पैदल यात्रियों की मौत हुई। यानी औसतन करीब 100 पैदल यात्रियों की रोजाना जान गई। यह कुल सड़क हादसों में हुई मौतों का लगभग 20.6 प्रतिशत है। वहीं, 2023 में सड़क हादसों में 35,221 पैदल यात्रियों की मौत हुई थी।
देश में फुटपाथ की कमी से होने वाली मौतों का अलग राष्ट्रीय आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का उद्देश्य शहरों में पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित रास्ते सुनिश्चित करना और उन्हें मोटर वाहनों से होने वाले जोखिम से बचाना है।
मुख्य बिंदु
- हर सड़क पर सुरक्षित और अतिक्रमण मुक्त फुटपाथ की जरूरत।
- पैदल यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का निर्देश।
- केंद्र को केंद्रीय अथॉरिटी तय करने को कहा गया।
- पायलट प्रोजेक्ट के लिए पांच शहर चुने जाएंगे।
- अथॉरिटी के पास पर्याप्त फंड, स्टाफ और इंफ्रास्ट्रक्चर होना चाहिए।
- 2024 में सड़क हादसों में 36,526 पैदल यात्रियों की मौत हुई।

