दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री बना भारत, 22 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा कारोबार
Yuva India: भारत ने ऑटोमोबाइल सेक्टर में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक, भारत जापान को पीछे छोड़कर दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार बन गया है। भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग का आकार करीब 22 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। गडकरी ने विश्वास जताया कि आने वाले पांच वर्षों में भारत इस क्षेत्र में दुनिया का नंबर एक देश बन सकता है।
मंत्री के अनुसार, देश में सड़क और राजमार्गों के बुनियादी ढांचे में सुधार, वाहन निर्माण में बढ़ती क्षमता और नई तकनीकों के इस्तेमाल से ऑटोमोबाइल उद्योग को मजबूती मिल रही है। यह क्षेत्र न केवल अर्थव्यवस्था में योगदान देता है, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार और निर्यात के अवसर भी उपलब्ध कराता है।
2014 में सातवें स्थान पर था भारत
नितिन गडकरी के अनुसार, वर्ष 2014 में भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग वैश्विक स्तर पर सातवें स्थान पर था और इसका आकार करीब 14 लाख करोड़ रुपये था। अब यह बढ़कर लगभग 22 लाख करोड़ रुपये हो गया है और भारत जापान से आगे निकलकर तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।
भारत में दोपहिया वाहनों, कारों, वाणिज्यिक वाहनों और अन्य परिवहन साधनों की बड़ी मांग है। घरेलू बाजार की मजबूती के साथ भारतीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं। वैश्विक वाहन निर्माता कंपनियों की भारत में मौजूदगी से उत्पादन, तकनीक और प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा मिला है।
गडकरी का कहना है कि भारत के पास बड़ा घरेलू बाजार, कुशल इंजीनियरिंग प्रतिभा और निर्माण क्षमता है। इन संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करके देश वैश्विक ऑटोमोबाइल उत्पादन और निर्यात में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकता है।
पांच साल में नंबर एक बनने का लक्ष्य
केंद्रीय मंत्री ने उम्मीद जताई कि भारत अगले पांच वर्षों में दुनिया का सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल उद्योग बन सकता है। इसके लिए अनुसंधान, नवाचार, गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धी कीमतों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होगी।
भारत को इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए केवल घरेलू बिक्री बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा। वाहन निर्माण की लागत कम करना, सुरक्षा मानकों को मजबूत करना, नई तकनीकों को अपनाना और विदेशी बाजारों में निर्यात बढ़ाना भी महत्वपूर्ण होगा।
गडकरी ने उद्योग जगत से अपील की है कि वह भारत को वैश्विक वाहन निर्माण केंद्र बनाने के लिए मिलकर काम करे। इससे देश में निवेश बढ़ने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावनाएं हैं। हालांकि, दुनिया में पहले स्थान पर पहुंचना भविष्य का लक्ष्य है, मौजूदा स्थिति नहीं।
इलेक्ट्रिक और वैकल्पिक ईंधन पर जोर
भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र के भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहन और वैकल्पिक ईंधन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। गडकरी लगातार इथेनॉल, बायोडीजल, मेथनॉल, एलएनजी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और हाइड्रोजन जैसे विकल्पों को बढ़ावा देने की बात करते रहे हैं।
इन तकनीकों का उद्देश्य पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता घटाना, प्रदूषण कम करना और ऊर्जा आयात पर होने वाले खर्च को नियंत्रित करना है। इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ-साथ हाइड्रोजन आधारित परिवहन और जैव ईंधन पर काम करने से भारत को स्वच्छ परिवहन व्यवस्था विकसित करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, इन विकल्पों को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए चार्जिंग स्टेशन, हाइड्रोजन ईंधन की उपलब्धता, बेहतर बैटरी तकनीक और उचित कीमतों जैसी चुनौतियों का समाधान करना होगा। वाहन कंपनियों के साथ सरकार और ऊर्जा क्षेत्र को भी इस दिशा में निवेश बढ़ाना होगा।
सड़क निर्माण से अर्थव्यवस्था को फायदा
गडकरी ने यह भी कहा कि बेहतर सड़कों, एक्सप्रेसवे और राजमार्गों के निर्माण से माल ढुलाई की लागत में कमी आई है। उनके मुताबिक, देश में लॉजिस्टिक्स लागत में लगभग 6 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। बेहतर कनेक्टिविटी से यात्रा का समय घटने के साथ राजमार्गों के आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलता है।
रोजगार और निर्यात के लिए अहम क्षेत्र
ऑटोमोबाइल उद्योग वाहन निर्माण के अलावा कलपुर्जों, सर्विसिंग, परिवहन, लॉजिस्टिक्स और बिक्री जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार पैदा करता है। भारत की वैश्विक स्थिति मजबूत होने से इन क्षेत्रों में नए अवसर मिलने की संभावना है।
कुल मिलाकर, भारत का दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार बनना देश के औद्योगिक विकास की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अब चुनौती इस उपलब्धि को टिकाऊ विकास, स्वच्छ ईंधन, बेहतर वाहन सुरक्षा और बढ़ते निर्यात में बदलने की है।
